अमृतपाल सिंह को हाई कोर्ट से तगड़ा झटका, नहीं मिली बजट सत्र में शामिल होने की इजाजत
खाडूर साहिब से सांसद और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को कोर्ट ने संसद के बजट सत्र में शामिल होने के लिए जेल से रिहाई के आदेश नहीं दिए हैं। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है।

खाडूर साहिब से सांसदऔर खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी अस्थायी रिहाई की अपील को खरिज कर दिया है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की बेंच के सामने उनकी याचिका पेश की गई थी। अमृतपाल सिंह ने कहा था कि वह खाडूर साहिब की जनता के प्रतिनिधि हैं और इसलिए उन्हें बजट सेशल में पेश होने के लिए रिहा किया जाना चाहिए। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरम 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा।
अमृतपाल सिंह ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी का आदेश राजनीति से प्रेरित है। वह 19 लाख लोगों की आबादी वाले खाडूर साहिब का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं। इस तरह लगातार जेल में रखने से उनके लोकतांत्रक अधिकारों का हनन हो रहा है। बेंच ने कहा था कि वह 59 बैठकों में लोकसभा में उपस्थित नहीं रहे लेकिन इससे उनकी सदस्यता पर कोी प्रभाव नहीं पड़ा है। फिर भी वह चाहें तो छुट्टी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसपर संसदीय समिति विचार करेगी।
सरकार ने इस बारे में कहा कि अगर कोई सांसद लगातार 60 सिटिंग में हाजिर नहीं होता है तो उसकी सीट को खाली घोषित किया जा सकता है। हालांकि सभी परिस्तियों में यह नियम लागू भी हनीं होता है। उन्होंने कहा कि संसद ने एक कमेटी बनाई है जिसे कॉन्डोनेशन ऑफ ऐबसेंस कमेटी कहते हैं। इस कमेटी के सामने वह छुट्टी के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) सत्य पाल जैन ने ने अधिवक्ता धीरज जैन के साथ पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि संविधान के अनुच्छेद 104 के तहत, यदि कोई सांसद लगातार 60 बैठकों तक अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सीट को रिक्त घोषित किया जा सकता है। अमृतपाल (33) वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। जैन ने कहा कि सदन से अनुपस्थिति को माफ करने के लिए लोकसभा में एक समिति है और यदि कोई सांसद अनुपस्थिति के कारणों सहित आवेदन प्रस्तुत करता है, तो समिति उस पर विचार कर सकती है और अपनी सिफारिशों के साथ लोकसभा को सौंप सकती है। जैन ने कहा कि लोकसभा आमतौर पर अनुपस्थिति माफ कर देती है।
'वारिस पंजाब दे' समूह के प्रमुख अमृतपाल को एक महीने से अधिक समय तक चली तलाश के बाद 23 अप्रैल, 2023 को मोगा के रोडे गांव से गिरफ्तार किया गया था। अमृतपाल ने खुद को मारे जा चुके खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तर्ज पर स्थापित किया था। पंजाब पुलिस ने 23 फरवरी, 2023 को अजनाला घटना के बाद यह कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें सिंह और उनके समर्थकों ने कथित तौर पर बैरिकेड तोड़कर अमृतसर शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक पुलिस थाने में घुसकर अपने सहयोगियों की रिहाई के लिए पुलिस से झड़प की। इस दौरान अमृतपाल के कई समर्थक तलवार और बंदूकें लहरा रहे थे।
अमृतपाल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और पंजाब के खडूर साहिब से जीत हासिल की। अप्रैल 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत उनकी हिरासत बढ़ा दी गई, जबकि उनके नौ सहयोगियों को, जो असम जेल में बंद थे, पंजाब वापस लाया गया।इन नौ सहयोगियों को 2023 के अजनाला पुलिस थाने पर हमले की घटना के संबंध में गिरफ्तार किया गया था।




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