Left with Ram Know how Bhagwa revolution came to Bengal Read inside story of Mamata departure राम के साथ वाम, पश्चिम बंगाल में ऐसे आई है 'भगवा' क्रांति; ममता बनर्जी की विदाई की इनसाइड स्टोरी, India News in Hindi - Hindustan
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राम के साथ वाम, पश्चिम बंगाल में ऐसे आई है 'भगवा' क्रांति; ममता बनर्जी की विदाई की इनसाइड स्टोरी

ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर भाजपा को 'सबसे बड़ा दुश्मन' बताते हुए सभी विपक्षी दलों से एकजुट होने का आह्वान किया था, लेकिन लेफ्ट दलों ने इसे ठुकरा दिया। शुरू में इसे पुरानी सियासी अदावत का नतीजा माना गया, लेकिन अब जो हकीकत सामने आई है, उससे साफ है कि यह एक सोची-समझी रणनीति थी।

Tue, 12 May 2026 03:22 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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राम के साथ वाम, पश्चिम बंगाल में ऐसे आई है 'भगवा' क्रांति; ममता बनर्जी की विदाई की इनसाइड स्टोरी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने न केवल सत्ता का माथा बदला है, बल्कि राज्य की दशकों पुरानी राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह उलट दिया है। पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर सरकार बनाई है और शुभेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। सत्ता से बेदखल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ कांग्रेस, सीपीएम और अन्य वाम दलों को मिलाकर एक संयुक्त विपक्षी मोर्चा बनाने की अपील की। हालांकि, वाम दलों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर भाजपा को 'सबसे बड़ा दुश्मन' बताते हुए सभी विपक्षी दलों से एकजुट होने का आह्वान किया था, लेकिन लेफ्ट दलों ने इसे ठुकरा दिया। शुरू में इसे पुरानी सियासी अदावत का नतीजा माना गया, लेकिन अब जो हकीकत सामने आई है, उससे साफ है कि यह एक सोची-समझी रणनीति थी।

वामपंथी मतदाताओं की ‘मौन सहायता’ निर्णायक

चुनावी नतीजों के विश्लेषण में सामने आया है कि भाजपा की भारी जीत के पीछे वामपंथी मतदाताओं का ‘मौन समर्थन’ अहम भूमिका निभाया। टीएमसी शासन से नाराज और मजबूत विकल्प न दिखने के कारण बड़ी संख्या में वाम समर्थकों ने भाजपा को वोट दिया। न्यू बैरकपुर के सीपीआई(एम) कार्यकर्ता संजीत रॉय ने कहा कि हमारी पार्टी की ताकत कम होने के कारण समर्थकों ने टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए भाजपा को वोट दिया। भवानीपुर से जीत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने विजय भाषण में इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि भवानीपुर में सीपीएम को 13000 वोट मिले थे, जिनमें से कम से कम 10000 वोट मुझे मिले। मैं वहां के सीपीआई(एम) मतदाताओं का आभार व्यक्त करता हूं। दमदम उत्तर, जादवपुर, उत्तरपारा और आसनसोल जैसी कई सीटों पर भी वाम वोटों का भाजपा में ट्रांसफर साफ नजर आया।

‘एबार राम, पोरे बाम’ की रणनीति

वाम मोर्चा 2011 में 34 साल के शासन के बाद सत्ता से बाहर हुआ था। उसके बाद सीपीआई (M) का वोट शेयर 2011 के 41 प्रतिशत से लगातार गिरता गया और 2026 में मात्र 4.4 प्रतिशत रह गया। 2018 के पंचायत चुनावों के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा वामपंथी कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों और हत्याओं ने मोर्चा बदलने की प्रक्रिया को तेज कर दिया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 18 सीटें जीतीं और 2021 के विधानसभा चुनाव में 77 सीटें हासिल कीं। 2026 के चुनाव में वाम मतदाताओं की रणनीति साफ थी- ‘एबार राम, पोरे बाम’ (इस बार भाजपा को वोट, अगली बार वाम को)।

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वामपंथी मतदाताओं के इस रुख के दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं...

अस्तित्व का संकट: टीएमसी शासन में वाम कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले, उनके कार्यालयों पर कब्जा और राजनीतिक दमन के कारण वे सुरक्षा के लिए भाजपा की ओर मुड़े।

विश्वसनीय विकल्प की कमी: वाम दल खुद को टीएमसी के मुकाबले मजबूत विकल्प नहीं बना पाए, इसलिए कई समर्थकों ने फैसला किया कि टीएमसी को हटाना जरूरी है, चाहे भाजपा को वोट क्यों न देना पड़े।

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चुनावी नतीजे और असर

भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतीं और 45 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। कई सीटों पर मामूली अंतर से हुई जीत में वाम वोट ट्रांसफर निर्णायक साबित हुआ। केंद्रीय सशस्त्र बलों (CRPF) की भारी तैनाती के कारण चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहे, जिससे वामपंथी मतदाता बिना डर के वोट डाल सके।

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आगे क्या है चुनौती

भाजपा की इस बड़ी जीत के बाद वाम दल अब अपने कार्यालयों पर दोबारा कब्जा करने और संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुट गए हैं। हालांकि, कई कार्यकर्ता भाजपा सरकार में विपक्ष की भूमिका निभाने को लेकर सतर्क हैं। 34 साल के वाम शासन और 15 साल के टीएमसी शासन के बाद पश्चिम बंगाल में नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो गया है। अब सवाल यह है कि वाम दल 'एबार राम, पोरे बाम' वाली रणनीति के बाद फिर से संगठित होकर अपनी पुरानी ताकत हासिल कर पाएंगे या 2011 वाली अप्रासंगिकता के चक्र में फंस जाएंगे।