जिस पूर्व चीफ जस्टिस ने SIR में कांग्रेस नेता को दी थी राहत, बंगाल चुनाव खत्म होते छोड़ा ट्रिब्यूनल; क्या बताई वजह
जस्टिस शिवगणनम पिछले साल सितंबर में कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद रिटायर्ड हुए थे। वह उन 19 पूर्व जजों में शामिल थे, जिनकी सिफारिश कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल ने की थी।

पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव संपन्न होने के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस टी.एस. शिवगणनम ने आज (गुरुवार, 7 मई को) उस ट्रिब्यूनल से इस्तीफ़ा दे दिया, जिसे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची से नाम हटाने से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनाया गया था। वह उन 19 रिटायर्ड जजों में शामिल थे, जिन्हें पश्चिम बंगाल में SIR के तहत न्यायिक अधिकारियों के फ़ैसलों के खिलाफ अपील सुनने के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल के तौर पर नियुक्त किया गया था।
कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख को दी थी बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस शिवगणनम से कलाकार नंदलाल बोस के पोते सुप्रबुद्ध सेन और कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख की अपीलों पर विशेष सुनवाई करने को कहा था। मोताब शेख ने बाद में फ़रक्का विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। निर्वाचन आयोग के अनुसार, फरक्का में कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख ने अपने निकटम प्रतिद्वंद्वी एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार सुनील चौधरी को 8,193 मतों के अंतर से हराया। क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी अमीरुल इस्लाम तीसरे स्थान पर रहे। कोर्ट ने शेख और सेन समेत कुछ अन्य अपीलकर्ताओं के लिए भी 'आउट-ऑफ़-टर्न' (प्राथमिकता के आधार पर) सुनवाई का आदेश जस्टिस टी.एस. शिवगणनम को दिया था। जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था।
जस्टिस शिवगणनम पिछले साल हुए थे रिटायर
जस्टिस शिवगणनम पिछले साल सितंबर में कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद रिटायर्ड हुए थे। वह उन 19 पूर्व जजों में शामिल थे, जिनकी सिफारिश कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सुजॉय पॉल ने की थी और जिन्हें चुनाव आयोग ने 20 मार्च को 'एकल-सदस्यीय अपीलीय ट्रिब्यूनल' के तौर पर अधिसूचित किया था। इस ट्रिब्यूनल ने अप्रैल में कामकाज शुरू किया था।
निजी कारणों से इस्तीफा
जस्टिस शिवगणनम ने अपना इस्तीफा कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस पॉल को भेज दिया है। इनके अलावा उन्होंने केंद्रीय चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी इसकी सूचना दी है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक संपर्क किए जाने पर जस्टिस शिवगणनम ने कहा, “मैंने निजी कारणों से इस्तीफा दिया है।”
बता दें कि SIR विवाद के बीच एक अभूतपूर्व क़दम उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को बंगाल में लाखों मतदाताओं की पात्रता तय करने के लिए जिला जज और अतिरिक्त जिला जज रैंक के न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच भरोसे की कमी है। तब चुनाव आयोग ने कुल 60.06 लाख मतदाताओं के मामलों को न्यायिक जाँच के लिए रखा था। इस काम के लिए 700 न्यायिक अधिकारियों को लगाया गया था। उनकी जाँच पूरी होने के बाद, 27.16 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाया था अपीलीय न्यायाधिकरण
इसके बाद 10 मार्च को, सुप्रीम कोर्ट ने एक अपीलीय तंत्र स्थापित करने का आदेश दिया था। इसी के तहत 19 अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना की गई थी। बंगाल में SIR को दी गई चुनौती पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने 13 अप्रैल को यह बात नोट की कि मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने के ख़िलाफ़ 34 लाख से ज़्यादा अपीलें दायर की गई हैं। बाद में, अदालत ने आदेश दिया कि बंगाल में मतदान से दो दिन पहले तक यानी पहले चरण के लिए 21 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 27 अप्रैल तक, ट्रिब्यूनलों द्वारा मंज़ूर की गई सभी अपीलें मतदाता सूची में वापस जोड़ी जा सकती हैं और मतदाताओं को वोट डालने की अनुमति दी जा सकती है। इन समय-सीमाओं से पहले ऐसी 2,000 से भी कम अपीलें मंज़ूर की गई थीं। सुनवाई के दौरान सूची से हटाए गए बाकी 27.16 लाख मतदाता इस बार अपना वोट नहीं डाल पाए।




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