जिस IAS अफसर के लिए PM मोदी से टकरा गईं थीं ममता बनर्जी; TMC के हारते ही इस्तीफा देकर चलते बने
Mamata Banerjee Close IAS Officer: मई 2021 में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को वापस बुलाने का आदेश जारी किया था। यह आदेश चक्रवात 'यास' के बाद PM मोदी की बैठक से गायब रहने पर दिया गया था।

पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भले ही CM पद से इस्तीफा सौंपने से इनकार कर दिया हो लेकिन उनके सिपहसालारों ने चुनाव में TMC की हार होते ही अगले दिन यानी मंगलवार (5 मई) को अपने-अपने पदों से इस्तीफे सौंप दिए। इनमें कुछ पूर्व IAS तो कुछ अर्थशास्त्री और पत्रकार हैं। इस सूची में पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय, HK द्विवेदी और मनोज पंत, साथ ही अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार शामिल हैं। ये सभी ममता बनर्जी द्वारा नियुक्त किए गए थे।
अभिरूप सरकार ने बुधवार को हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया, "मैं पश्चिम बंगाल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (WBIDC) और पश्चिम बंगाल स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (WBSIDC) का अध्यक्ष था। मैंने मंगलवार को ही संबंधित विभागों के सचिवों को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है।" सरकार ने कहा, "भले ही मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूँ, लेकिन ये नियुक्तियाँ राजनीतिक नियुक्तियाँ थीं। मुझे तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नियुक्त किया था। चूंकि वह चुनाव हार गई हैं, इसलिए मुझे पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।" सरकार ने अतीत में समितियों, आयोगों और निगमों में कई पदों पर काम किया है।
कौन हैं अलापन बंद्योपाध्याय
बता दें कि मई 2021 में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को वापस बुलाने का आदेश जारी किया था। यह आदेश चक्रवात 'यास' के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में उनके गैर हाजिर रहने के कारण दिया गया था। तब राज्य सरकार से कहा गया था कि इस IAS अधिकारी को कार्यमुक्त करे और उन्हें नॉर्थ ब्लॉक में रिपोर्ट करने का निर्देश दे लेकिम ममता सरकार ने ऐसा नहीं किया। हालाँकि, ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से इस आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया। बाद में उन्होंने केंद्र सरकार को सूचित किया कि बंद्योपाध्याय सेवा से सेवानिवृत्त हो गए हैं इसलिए वह दिल्ली में कार्यभार ग्रहण नहीं करेंगे। इसके बाद ममता ने बंद्योपाध्याय को अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त कर दिया। उन्होंने तब राज्य सरकार द्वारा दी गई तीन महीने की सेवा विस्तार की अवधि का लाभ उठाने के बजाय 31 मई 2021 को ही सेवानिवृत्त होना चुना था।
HK द्विवेदी और मनोज पंत का भी इस्तीफा
बंद्योपाध्याय ने कहा, "मंगलवार को मैंने राज्य के मुख्य सचिव को अपना इस्तीफा भेज दिया।" सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि कुछ अन्य पूर्व नौकरशाहों ने भी अपने इस्तीफे भेज दिए हैं। ये नौकरशाह राज्य के मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और बाद में बनर्जी द्वारा सलाहकार के रूप में नियुक्त किए गए थे; इनमें HK द्विवेदी और मनोज पंत भी शामिल हैं। राज्य के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग में मीडिया सलाहकार के रूप में कार्यरत एक पूर्व पत्रकार ने भी मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
ममता का सीएम पद छोड़ने से इनकार
ये इस्तीफे ऐसे समय में आए हैं, जब ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से हटने से इनकार कर दिया है। उनका दावा है कि उनकी पार्टी ने चुनाव जीता है, लेकिन वोटों की गिनती की प्रक्रिया में चुनाव आयोग, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और BJP ने मिलकर धांधली की है। इस बीच, राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी पश्चिम बंगाल के गवर्नर RN रवि को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। दत्ता दिसंबर 2023 से एडवोकेट जनरल के तौर पर काम कर रहे थे, और इससे पहले भी 2017 से 2021 तक इस पद पर रह चुके थे। बता दें कि 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में हुए विधानसभा चुनावों में BJP ने ज़बरदस्त जीत हासिल की है और 294 में से 207 सीटें जीतीं हैं, जबकि TMC को केवल 80 सीटें मिलीं हैं।




साइन इन