स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय नौसेना का अभेद्य पहरा, सुरक्षित निकल रहे तिरंगा वाले जहाज
Iran War Updates: होर्मुज जलमार्ग मात्र 55 किमी चौड़ा है, लेकिन यहां से दुनिया का 31% तेल गुजरता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अमेरिका और इजरायल के समर्थक जहाजों को यहां से नहीं निकलने देगा।
मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के बावजूद भारतीय नौसेना के 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों को सुरक्षित पार कराया। आपको बता दें कि दुनिया के अधिकांश देश के जहाज अज्ञात हमलों और नाकेबंदी के डर से सहमे हुए हैं, वहीं भारतीय नौसेना की निगरानी में भारत की ओर आ रहे मालवाहक जहाजों ने इस मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर लिया है।
सरकारी सूत्रों और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी (LPG) टैंकर, 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' भारतीय नौसेना की कड़ी निगरानी में होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से 'शिवालिक' को भारतीय युद्धपोत द्वारा सीधे एस्कॉर्ट किया जा रहा है। इसके अलावा, एक अन्य भारतीय तेल टैंकर 'जग प्रकाश', जो ओमान से अफ्रीका की ओर गैसोलीन ले जा रहा है, वह भी होर्मुज के पूर्वी हिस्से से सुरक्षित निकल चुका है।
ऑपरेशन संकल्प- खाड़ी में भारत का सुरक्षा कवच
भारतीय नौसेना ने जून 2019 में 'ऑपरेशन संकल्प' की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षा प्रदान करना था। ओमान के तट पर तैनात भारतीय युद्धपोत पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। अब तक इस ऑपरेशन के तहत 23 युद्धपोतों को बारी-बारी से तैनात किया जा चुका है। इस संकटपूर्ण क्षेत्र में लगभग 23,000 भारतीय नाविक और 24 व्यापारिक जहाज मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी नौसेना बखूबी निभा रही है।
ईरान ने दिया सेफ पैसेज का भरोसा
भारत की विदेश नीति को एक बड़ी सफलता तब मिली, जब भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने संकेत दिए कि भारत को जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आधिकारिक तौर पर सुरक्षित मार्ग मिल सकता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी नेतृत्व के बीच हुई वार्ताओं ने इस तनावपूर्ण माहौल में भी भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित की है।
एक तरफ जहां खाड़ी में युद्ध की स्थिति है, वहीं भारतीय नौसेना की वैश्विक उपस्थिति भी दर्ज हो रही है। भारतीय नौसैनिक प्रशिक्षण पोत INS सुदर्शिनी अपनी ऐतिहासिक 22,000 समुद्री मील की वैश्विक यात्रा 'लोकायन-26' के तहत माल्टा के वैलेटा बंदरगाह पहुंच गया है। स्वेज नहर और अलेक्जेंड्रिया को पार कर सुदर्शिनी का माल्टा पहुंचना भारत और यूरोपीय देशों के बीच गहरे समुद्री संबंधों का प्रतीक है।
क्यों डरी हुई है दुनिया?
होर्मुज जलमार्ग मात्र 55 किमी चौड़ा है, लेकिन यहां से दुनिया का 31% तेल गुजरता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अमेरिका और इजरायल के समर्थक जहाजों को यहां से नहीं निकलने देगा। तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में भारतीय नौसेना की तैनाती न केवल हमारे जहाजों को बचा रही है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर रही है।




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