होर्मुज स्ट्रेट से जहाज सुरक्षित निकालने पर सवाल, ट्रंप बोले संभव; सैन्य अधिकारी ने कहा–मुश्किल
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को बढ़ा दिया है। होर्मुज में फंसे तेल के जहाजों पर संकट बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है जरूरत पड़ने पर यूएस नेवी जहाजों की मदद के लिए आ सकती है। वहीं, अमेरिकी सैन्य अधिकारी का कहना है कि फिलहाल ऐसा करना संभव नहीं है।

Iran US Israel war update: ईरान में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले के बाद शुरू हुए युद्ध ने दो हफ्तों में दुनिया का रुख मोड़ दिया है। युद्ध की शुरुआत में तमाम देश इस बात पर बहस कर रहे थे कि ईरान आखिर कितने दिनों तक इन हमलों का सामना कर सकता है। लेकिन अब बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच लगभग सभी देशों के सामने सवाल यह है कि क्या उनके जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से निकल सकते हैं? ईरान अपने सहयोगियों जैसे की चीन और तुर्किए के कई जहाजों को निकलने की इजाजत दे रहा है, लेकिन बाकियों के लिए उसने नाकेबंदी कर रखी है। भारत का भी एक जहाज इसी रास्ते से निकलकर मुंबई पहुंचा था, हालांकि एक जहाज पर हमला भी हुआ था। हालिया जानकारी के मुताबिक भारत की तरफ आने वाले दो और जहाजों को ईरान की तरफ से हरी झंडी मिल गई है।
होर्मुज पर चल रही ईरानी सेना की नाकेबंदी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से भी दो बयान सामने आए हैं। एक तो यह कि उन्होंने कहा कि जब भी तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो अमेरिका इसका फायदा उठाता है, क्योंकि वह स्वयं ही एक तेल उत्पादक देश है। ट्रंप का यह बयान अमेरिका केंद्रित रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह केवल अमेरिका को ध्यान में रखकर बात कर रहे हैं। लेकिन इस युद्ध की वजह से अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के बाकी देश भी ऊर्जा संकट की आशंका से घिरे हुए हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या अमेरिका नौसेना होर्मुज से बाकी देशों के जहाजों को सुरक्षित रूप से निकालने में मदद कर सकती है? इस सवाल का जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब पूछा गया तो उन्होंने फॉक्स न्यूज को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि हां, जरूरतर पड़ने पर अमेरिका की नौसेना ऐसा कर सकती है।
ट्रंप की 'हां' पर सैन्य अधिकारी की 'न'
राष्ट्रपति ट्रंप भले ही कुछ भी कहें, लेकिन अब एक शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने कहा है कि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग “सैन्य दृष्टि से बहुत जटिल क्षेत्र” है। इससे अमेरिका की क्षमता और इरादों को लेकर कुछ अस्पष्टता भी सामने आई है।
अमेरिकी वायुसेना के जनरल और संयुक्त सैन्य समिति के अध्यक्ष डेन कैएन ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से निकालना शायद आसान नहीं होगा। इसी रास्ते से फारस और अरब क्षेत्र का बड़ा हिस्सा तेल दुनिया के बाकी हिस्सों में जाता है। उन्होंने कहा, “यह एक रणनीतिक रूप से जटिल माहौल है। इससे पहले कि हम बड़े पैमाने पर जहाजों को वहां से ले जाएं, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह हमारे वर्तमान सैन्य उद्देश्यों के अनुसार हो।” कैएन के इस बयान से ऐसा लगता है कि उन्होंने राजनैतिक दांव-पेंचों से दूर व्यावहारिक सैन्य स्थिति को सामने रख रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का अलग-अलग रुख
गौरतलब है कि जब इस सवाल का जवाब अमेरिका के बाकी अधिकारियों से मांगा गया था, तो उन्होंने भी इसमें अलग-अलग संकेत दिए थे। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्काई न्यूज को दिए अपने इंटरव्यू में कहा था कि जैसे ही सैन्य रूप से ऐसा संभव होगा अमेरिका की नेवी एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन के साथ जहाजों को निकालने का काम शुरू कर देगी। लेकिन अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के मुताबिक अमेरिकी सेना इसके लिए फिलहाल तैयार नहीं है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब जलडमरूमध्य में कम से कम दो तेल टैंकरों पर नए हमले हुए, जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं।
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