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अमेरिका-ईरान सीजफायर पर आ गया भारत का रिएक्शन, क्या कहा? पाकिस्तान ने कराई है डील

भारत सरकार ने अमेरिका-ईरान सीजफायर का स्वागत किया। MEA का आधिकारिक बयान: पश्चिम एशिया में स्थायी शांति, डी-एस्केलेशन और हार्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध नौवहन बहाल। ऊर्जा संकट टला, व्यापार बढ़ेगा।

Wed, 8 April 2026 02:31 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अमेरिका-ईरान सीजफायर पर आ गया भारत का रिएक्शन, क्या कहा? पाकिस्तान ने कराई है डील

भारत के विदेश मंत्रालय ने आज एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर का स्वागत किया है। बयान में कहा गया है कि यह सीजफायर पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। भारत सरकार ने लंबे समय से तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति पर जोर दिया है जिससे चल रहे संघर्ष का जल्द समाधान निकल सके।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने बयान में कहा, 'हम सीजफायर तक पहुंचने का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की ओर ले जाएगा। जैसा कि हम पहले से लगातार वकालत कर रहे थे, तनाव कम करना, संवाद और कूटनीति चल रहे संघर्ष को जल्द समाप्त करने के लिए आवश्यक हैं। इस संघर्ष ने लोगों को भारी पीड़ा दी है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क को बाधित किया है। हम उम्मीद करते हैं कि स्ट्रेट ऑफ हार्मुज में बिना किसी रोक-टोक के वैश्विक जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी।'

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यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच मध्यरात्रि में हुए सीजफायर समझौते के कुछ घंटों बाद आया है। समझौते के अनुसार दोनों पक्षों ने तत्काल प्रभाव से दो सप्ताह का युद्धविराम घोषित किया है, जिसमें लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में लड़ाई रुक जाएगी। ईरान ने इस दौरान स्ट्रेट ऑफ हार्मुज में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की गारंटी दी है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई बहाल हो सकेगी।

ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को श्रेय दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मध्यस्थता में यह समझौता हुआ। पाकिस्तान ने ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार को इस्लामाबाद में बैठक के लिए आमंत्रित किया है, जहां आगे की बातचीत होगी।

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पिछले कई हफ्तों से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हुई इस जंग में मिसाइल हमले, ड्रोन हमले और सैन्य टारगेट पर स्ट्राइक्स शामिल थे। स्ट्रेट ऑफ हार्मुज बंद होने की आशंका से वैश्विक ऊर्जा कीमतें आसमान छू रही थीं। भारत खाड़ी देशों से भारी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। वह भी इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल था।

भारत सरकार ने पहले भी कई बार कूटनीतिक प्रयास किए थे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान, यूएई और कतर के समकक्षों से कई बार बात की थी। भारत यूके की मेजबानी में हार्मुज सुरक्षा पर हुई बैठक में भी शामिल हुआ था। MEA ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरान में रहने वाले भारतीयों को सतर्क रहने की सलाह दी थी और कुछ भारतीय जहाजों को क्षेत्र से बाहर निकाला था।

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