ईरान में शांति का दावा और अब अफगानिस्तान में दखल; चीन के इरादों का भारत पर कितना असर
सवाल यह है कि आखिर ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम का दावा करने वाले चीन की अफगानिस्तान में अब इतनी क्यों दिलचस्पी है और इसका भारत पर इसका कितना असर होगा। दरअसल सार्क देशों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश चीन लंबे समय से करता रहा है। अफगानिस्तान भी उसका ही एक हिस्सा है।

ईरान की सभ्यता को ही खत्म करने का ऐलान करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेडलाइन पूरी होने से कुछ घंटे पहले ही इरादा बदल लिया। उन्होंने ईरान के साथ दो सप्ताह के सीजफायर का ऐलान कर दिया। इस बीच उम्मीद जताई है कि ईरान सही रुख अपनाएगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल सकेगा। इस सीजफायर का क्रेडिट एक तरफ पाकिस्तान ले रहा है तो वहीं दूसरी तरफ उसके सदाबहार दोस्त का तमगा रखने वाले चीन ने भी ऐसा ही दावा किया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि हमने मध्य पूर्व में शांति स्थापित कराने के लिए प्रयास किए हैं। यही नहीं चीन का कहना है कि अब वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे युद्ध को भी समाप्त कराएगा।
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम दोनों पक्षों से बात करेंगे और उन्हें वार्ता के लिए एक मंच उपलब्ध कराएंगे। चीन का कहना है कि दोनों देशों ने हमारे साथ मीटिंग में सहमति जताई है कि वे अब विवाद को आगे नहीं बढ़ाएंगे। अब सवाल यह है कि आखिर ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम का दावा करने वाले चीन की अफगानिस्तान में इतनी क्यों दिलचस्पी है और इसका भारत पर कितना असर होगा। जानकार मानते हैं कि अफगानिस्तान वह मुल्क है, जिस पर अपनी सॉफ्ट पावर के जरिए हर सुपरपावर दखल चाहती है। फिर चीन तो पड़ोसी देश है और पाकिस्तान के साथ उसके रिश्ते तभी मजबूत होंगे, जब वह भारत को घेरते हुए उससे दोस्ती बढ़ाए।
अफगानिस्तान में चीन की एंट्री ऐसी ही एक कोशिश है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में अकसर होने वाली हिंसा और आतंकी घटनाओं के पीछे पाकिस्तान हमेशा अफगानिस्तान का हाथ बताता है। ऐसे में यदि दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से कोई समाधान निकलता है तो पाकिस्तान को इस मोर्चे पर कुछ राहत मिल सकती है।
अफगानिस्तान में कितना है भारत का दखल
इसके अलावा भारत का अफगानिस्तान में इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश समेत कई मसलों पर बड़ा दखल रहा है। भारत और अफगानिस्तान के संबंध काफी पुराने हैं और पाकिस्तान से बिगड़ते रिश्तों के बीच अफगानियों की भारत से नजदीकी बढ़ी है। ऐसे में चीन चाहता है कि किसी भी तरह से अफगानिस्तान को अपने पाले में लाया जाए। इससे भारत का असर वहां कमजोर होगा। इसके अलावा मिडल ईस्ट का गेटवे कहे जाने वाले अफगानिस्तान में उसकी पैठ बढ़ेगी।
सार्क देशों में क्यों पैठ बनाने की कोशिश में है चीन
चीन की लंबे समय से यह कोशिश रही है कि सार्क देशों में वह अपनी पैठ बनाए। इन देशों में भारत का गहरा असर रहा है। बीते कई सालों से इसके आयोजन लंबित हैं और इसका फायदा चीन उठाने की कोशिश करता रहा है। इसी के तहत उसने श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है। अब उसकी नजर अफगानिस्तान पर है। भारत के नजरिए से बात करें तो उसे अफगानिस्तान के साथ संबंध बेहतर बनाए रखने होंगे।




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