US-ईरान युद्ध में इस मुस्लिम देश का हो गया बड़ा फायदा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बन सकती है बादशाहत
ट्रंप ने ईरान संग सीजफायर का ऐलान करते हुए कहा था कि ईरान होर्मुज को खोलने के लिए तैयार हो गया है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की इज्जत ईरानी सैन्य प्रबंधन के तहत ही दी जाएगी।

अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से भी ज्यादा समय तक चले युद्ध के बाद आखिरकार सीजफायर पर सहमति बन गई है। दोनों देशों ने दो हफ्ते के लिए युद्धविराम रोकने का समझौता किया है, जिससे पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है। इससे पहले युद्ध की वजह से ना कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, बल्कि कई देशों में गंभीर ईंधन संकट पैदा हो गए थे। इन सबकी वजह थी ईरान का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाना। अब युद्धविराम के तहत इस रास्ते को खोलने पर सहमति बनी है। इन सब के बीच एक मुस्लिम देश का सबसे बड़ा फायदा होता नजर आ रहा है।
यह देश है ओमान। ईरान अमेरिका के बीच सीजफायर से जुड़ी शर्तों की अब तक मिली जानकारी के मुताबिक अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ओमान की पकड़ और मजबूत हो सकती है। दरअसल ईरान ने अमेरिका को जो 10 सूत्री सीजफायर प्रस्ताव सौंपा है, उसमें एक अहम प्रावधान यह है कि तेहरान और ओमान दोनों होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूल सकते हैं।
गौरतलब है कि ईरान और ओमान के बीच स्थित करीब 34 किलोमीटर चौड़ा यह रास्ता अब तक अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता रहा है, जहां किसी तरह का टोल नहीं लिया जाता था। यह दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्गों में से एक है और यहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है, इसलिए इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है।
क्या है ईरान की योजना?
ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की पक्की प्लानिंग कर रहा है, जिसमें ओमान भी उसका साथ दे रहा है। अमेरिका संग सीजफायर की घोषणा के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि जहाजों के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति ईरानी सैन्य प्रबंधन के तहत दी जाएगी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इसका मतलब यह है कि ईरान इस मार्ग पर अपनी पकड़ पूरी तरह ढीली करेगा या नहीं। एक क्षेत्रीय अधिकारी के अनुसार, इस योजना के तहत ईरान और ओमान दोनों को इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने की अनुमति होगी। अधिकारी ने कहा कि ईरान इस धन का उपयोग पुनर्निर्माण के लिए करेगा।
इससे पहले ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम घरीबाबादी ने भी कहा था कि ओमान के साथ मिलकर एक ऐसा प्रोटोकॉल तैयार किया जा रहा है, जिसमें जहाजों को यहां से गुजरने के लिए परमिट और लाइसेंस लेना होगा। उनका कहना है कि इसका मकसद ट्रांजिट को आसान बनाना है, ना कि रोकना। वहीं ओमान ने भी पुष्टि की है कि उसने ईरान के साथ बातचीत की है, ताकि इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही सुचारू बनी रहे। यह इसीलिए अहम है क्योंकि युद्ध से पहले ईरान या ओमान ऐसा कोई शुल्क नहीं वसूल रहे थे। ऐसे में यह ओमान के लिए फायदे की योजना होगी।
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