तमिलनाडु चुनाव: जोसेफ विजय ने स्टालिन को कैसे हराया? वो 5 वजह जिनसे DMK की हुई हार
पहली बार चुनावी मैदान में उतरी टीवीके ने तमिलनाडु में सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके को धूल चटाकर इतिहास रच दिया है। तमिलनाडु में ऐसा पहली बार होगा कि कोई पार्टी अपनी स्थापना के महज 2 साल बाद सत्ता में आएगी।

अभिनेता से नेता बने साउथ की फिल्मों के सुपरस्टार सी. जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके ने ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इतिहास रच दिया है। पहली बार चुनावी मैदान में उतरी टीवीके ने तमिलनाडु में सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके को धूल चटा दी है। सोमवार को सामने आए चुनावी नतीजों में 234 सदस्यीय टीवीके 108 सीटें जीत सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। डीएमके को 59 सीटे मिली हैं। वहीं एडीएमके 47 सीटें पाकर तीसरे स्थान पर रही। कांग्रेस को केवल 5 सीटें ही मिल पाईं।
टीवीके की स्थापना फरवरी 2024 में हुई थी। तमिलनाडु में ऐसा पहली बार होगा कि कोई पार्टी अपनी स्थापना के महज 2 साल बाद सत्ता में आएगी। टीवीके ने अपने पहले चुनाव में करीब 35 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं। टीवीके के मुखिया विजय ने जहां पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट दोनों सीटों से जीत हासिल की है। वहीं डीएमके अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को उनके ही गढ़ कोलाथुर सीट पर 8,795 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। वहीं एडीएमके तीसरे स्थान पर रही।
डीएमके की हार के 5 प्रमुख कारण
डीएमएक को राज्य में औद्योगिक विकास और कल्याणकारी योजनाओं के सहारे स्टालिन के फिर से सत्ता में लौटने का पूरा भरोसा था। हालांकि, डीएमके की हार के पीछे पांच ऐसे अहम कारण रहे, जिन्होंने स्टालिन को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
● सुपरस्टार सी. जोसेफ विजय की धमाकेदार एंट्री ने उन वोटर्स में जोश भर दिया जो सत्ता में बारी-बारी से आने वाली दो बड़ी द्रविड़ पार्टियों से बदलाव चाहते थे।
● महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों जैसे कारणों से सत्ता-विरोधी लहर को कम आंकना भी डीएमके की हार का अहम कारण रहा।
● संघवाद और 'केंद्र बनाम तमिलनाडु' की बहस ने स्टालिन का ध्यान स्थानीय मुद्दों से हटा दिया।
● मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का विजय को एक गंभीर दावेदार के तौर पर स्वीकार करने में हिचकिचाना भी अहम कारण बना।
● स्टालिन के बेटे को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद विपक्ष द्वारा लगातार लगाए जा रहे वंशवादी राजनीति के आरोप हार की एक वजह बना।
गठबंधन में तालमेल की दिखी कमी
इसके अलावा सहयोगियों के बीच जमीनी स्तर पर तालमेल की कमी ने भी डीएमक के नेतृत्व वाले गठबंधन की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया। कांग्रेस के भीतर ही कुछ गुटों ने सीटों के बंटवारे पर बातचीत शुरू होने से पहले ही सत्ता में हिस्सेदारी की मांग कर दी थी। इनमें से एक गुट टीवीके के साथ गठबंधन करने पर जोर दे रहा था। साथ ही राहुल गांधी का स्टालिन के साथ प्रचार न करने से भी गठबंधन के भीतर दरारें पड़ने के संकेत मिले।
टीवीके के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हुईं
बता दें कि, 1967 में राज्य में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह पहली बार है, जब दो द्रविड़ दलों के अलावा कोई अन्य पार्टी चुनाव में विजयी हुई है। इस जीत के साथ ही विजय और टीवीके के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हो गई हैं। ईसाई धर्म से आने वाले पार्टी के संस्थापक विजय अल्पसंख्यक समुदाय से राज्य की बागडोर संभालने वाले पहले व्यक्ति होंगे।




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