Government blunt answer on Petrol Diesel LPG crisis When things will be normal in India पेट्रोल-डीजल, एलपीजी की कमी नहीं, सरकार ने बताया युद्ध खत्म होने पर कितने दिन में बेहतर होंगे हालात, India News in Hindi - Hindustan
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पेट्रोल-डीजल, एलपीजी की कमी नहीं, सरकार ने बताया युद्ध खत्म होने पर कितने दिन में बेहतर होंगे हालात

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही एक सवाल यह भी उठ रहा है कि देश में ऊर्जा संकट का क्या हाल है? सोमवार को सरकार की तरफ से इसको लेकर जवाब आया है।

Mon, 25 May 2026 09:23 PMDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पेट्रोल-डीजल, एलपीजी की कमी नहीं, सरकार ने बताया युद्ध खत्म होने पर कितने दिन में बेहतर होंगे हालात

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही एक सवाल यह भी उठ रहा है कि देश में ऊर्जा संकट का क्या हाल है? सोमवार को सरकार की तरफ से इसको लेकर जवाब आया है। केंद्र सरकार की तरफ से संसदीय पैनल को यह आश्वासन दिया गया है कि भारत किसी भी तरह के संकट का सामना करने के लिए तैयार है। साथ ही यह भी कहा गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध पूरी तरह से बंद होने के चार-पांच दिन के भीतर ही देश में तेल और एलपीजी को लेकर हालात सामान्य हो जाएंगे।

दो घंटे की बैठक
यह आश्वासन लगभग दो घंटे लंबी संसद की स्थायी समिति की बैठक के दौरान आया। इस बैठक में पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न हो रही बदलती स्थिति पर चर्चा की गई। इस दौरान विदेश मंत्रालय और कॉमर्स व पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। इन प्रतिनिधियों ने संसदीय समिति को बताया कि सरकार किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। इस दौरान भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों का पूरी तरह से ख्याल रखा जाएगा। इंडिया टुडे के मुताबिक मीटिंग में मौजूद सूत्रों ने जानकारी दी है कि अधिकारियों ने कहाकि क्षेत्र में लगातार अनिश्चितता के बावजूद, देश में तात्कालिक तौर पर ऊर्जा सप्लाई या खाद की उपलब्धता को लेकर कोई संकट नहीं है।

फिलहाल 78 दिनों का भंडार
सरकारी प्रतिनिधियों ने बताया कि फिलहाल देश में 78 दिनों का ऊर्जा भंडार है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होने या फिर शिपिंग रूट्स में कोई समस्या होने पर इनसे निपटा जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान उर्वरक आयात को लेकर चिंताएं उठीं। खास तौर इसलिए क्योंकि भारत की उर्वरक से जुड़ी आपूर्ति का 30 फीसदी से अधिक हिस्सा होर्मुज से जुड़ा है। हालांकि, अधिकारियों ने सांसदों को आश्वासन दिया कि सरकार ने पहले ही आपूर्ति चैनलों को डाइवर्सिफाई कर लिया है। साथ ही किसी भी कमी से बचने के लिए खरीद की वैकल्पिक व्यवस्था तैयार है।

बन चुका है इमरजेंसी प्लान
अधिकारियों ने यह भी बताया कि कई मंत्रालयों द्वारा व्यापक इमरजेंसी प्लान पहले ही बनाया जा चुका है। इसका मकसद यह है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भले ही क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहे, सप्लाई चेन एक्टिव रहें। सूत्रों के मुताबिक, सबसे महत्वपूर्ण आश्वासन लॉजिस्टिक्स और शिपिंग संचालन संभालने वाले अधिकारियों की तरफ से आया। इन अधिकारियों ने पैनल को बताया कि अगर युद्ध की स्थिति सामान्य हो जाती है, तो माल और आपूर्ति का प्रवाह चार से पांच दिन में फिर से शुरू हो सकता है।

ईंधन आपूर्ति की निगरानी
वहीं, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को कहा कि सरकार देशभर में ईंधन आपूर्ति की दैनिक आधार पर निगरानी कर रही है और पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कुछ पेट्रोल पंप पर ईंधन की कमी का कारण घबराकर पेट्रोल और डीजल की खरीद होना है। शर्मा ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू खाना पकाने की गैस (एलपीजी) का पर्याप्त स्टॉक है। कुछ पंप पर ईंधन की कमी मांग में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि का परिणाम है। उदाहरण के लिए कृषि में बढ़ी खपत और कीमतों में अंतर के कारण थोक उपभोक्ता अपनी जरूरतों के लिए पेट्रोल पंप का रुख कर रहे हैं।

घबराकर न करें खरीदारी
उन्होंने उपभोक्ताओं से आग्रह किया कि वे घबराकर खरीदारी न करें, ईंधन की बचत करें और जहां संभव हो, पाइप वाली प्राकृतिक गैस और इंडक्शन चूल्हे जैसे विकल्पों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि डिपो और टर्मिनल में पर्याप्त स्टॉक नहीं है, बल्कि अंतिम छोर तक आपूर्ति में बाधाओं के कारण कुछ दिक्कतें आ रही हैं। साथ ही, जमाखोरी और कुप्रबंधन को रोकने के लिए राज्य सरकारों से भी मदद मांगी जा रही है। सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक की थी। बैठक में उनसे स्थानीय आपूर्ति की स्थिति पर नजर रखने और जमाखोरी या कुप्रबंधन को रोकने का आग्रह किया गया था।

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कितना प्रभावित हुआ है आयात
अधिकारी ने कहा कि इस संकट ने भारत के कच्चे तेल आयात के लगभग 40 प्रतिशत, एलपीजी आयात के 90 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस आयात के 65 प्रतिशत को प्रभावित किया है। हालांकि, कच्चे तेल (पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन बनाने का कच्चा माल) की आपूर्ति वैकल्पिक स्रोतों से की जा रही है। वहीं घरेलू उपलब्धता को बनाए रखने के लिए रिफाइनरियों में एलपीजी का उत्पादन बढ़ाकर लगभग 50,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है।