First Hyderabad Census conducted in 1881 in Night with Moon Light help what is secret story बिजली नहीं, तो चाँद ही सही; एक ही रात में कैसे पूरी हो गई थी हैदराबाद की पहली जनगणना? अनूठी है दास्ताँ, India News in Hindi - Hindustan
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बिजली नहीं, तो चाँद ही सही; एक ही रात में कैसे पूरी हो गई थी हैदराबाद की पहली जनगणना? अनूठी है दास्ताँ

First Hyderabad Census Story: रिपोर्ट के मुताबिक, उस रात अधिकारियों और स्वयंसेवकों ने लोगों को उनके घरों के भीतर ढूँढने के बजाय, उनके सोने के जगहों पर जाकर उनकी गिनती की थी।

Fri, 1 May 2026 10:51 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बिजली नहीं, तो चाँद ही सही; एक ही रात में कैसे पूरी हो गई थी हैदराबाद की पहली जनगणना? अनूठी है दास्ताँ

First Hyderabad Census Secret Story: जनगणना 2027 के पहले चरण के अंतर्गत पांच राज्यों आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत एक केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य शुक्रवार (1 मई) से शुरू हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नई दिल्ली नगर निगम क्षेत्र, राजस्थान, महाराष्ट्र, मेघालय और झारखंड में स्व-गणना सुविधा भी शुरू हो चुकी है। इस बीच, पहली जनगणना यानी 1881 की एक अनोखी कहानी सुर्खियों में है, जो सिर्फ एक रात में अनूठे तरीके से संपन्न हो गई थी।

दरअसल, आज के आधुनिक युग में जहाँ जनगणना के लिए डिजिटल पोर्टल और 'सेल्फ-एन्युमरेशन' जैसे तरीकों का उपयोग किया जा रहा है, वहीं हैदराबाद के इतिहास में एक ऐसी जनगणना दर्ज है जो बिजली के अभाव में पूरी तरह से चाँदनी रात में चांद की रोशनी के भरोसे संपन्न हुई थी। 17 फरवरी, 1881 की वह रात ऐतिहासिक थी, जब हैदराबाद रियासत की पहली जनगणना महज एक रात के भीतर पूरी कर ली गई थी।

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बिजली नहीं, तो चाँदनी का सहारा

1881 में बिजली नहीं थी। इस कारण इस कार्य को अंजाम देना एक बड़ी चुनौती थी। इसी वजह से हैदरावाद रियासत में जनगणना की तारीख का चुनाव बहुत ही सोच-समझकर 'शुक्ल पक्ष' (waxing moon phase) के दौरान किया गया था, ताकि चाँद की पर्याप्त रोशनी में गणना करने वाले अपना काम आसानी से कर सकें। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, उस रात अधिकारियों और स्वयंसेवकों ने लोगों को उनके घरों के भीतर ढूँढने के बजाय, उनके सोने के जगहों पर जाकर उनकी गिनती की थी।

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स्वयंसेवकों का योगदान और खर्च

इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए पेशेवर अधिकारियों के साथ-साथ उन साक्षर स्वयंसेवकों की मदद ली गई, जिन्होंने बिना किसी वेतन के अपनी सेवाएँ दीं। रिपोर्टों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया पर उस समय कुल 1.97 लाख रुपये का खर्च आया था। यह पूरी कवायद ब्रिटिश भारत के साथ तालमेल बिठाकर की गई थी और इसका समय इस तरह चुना गया था कि यह स्थानीय त्योहारों या मेलों के साथ न टकराए।

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145 सालों में हैदराबाद की आबादी 600% बढ़ी

ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, पुरानी हैदराबाद रियासत की आबादी पिछले 145 सालों में चौंका देने वाले 600% तक बढ़ गई है। खास तौर पर, हैदराबाद शहर की आबादी में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। 1881 में यह 367,417 थी, जो आज बढ़कर लगभग 1.16 करोड़ हो गई है। आज की जनगणना पद्धतियाँ भले ही बदल गई हों, लेकिन 1881 का वह 'मिडनाइट ऑपरेशन' हैदराबाद के प्रशासनिक इतिहास का एक रोमांचक अध्याय बना हुआ है।