Ex CJI DY Chandrachud To Mediate In Kapur vs Kapoor Family Trust Case Supreme court appointed as mediator पूर्व CJI चंद्रचूड़ निपटाएंगे सास-बहू का झगड़ा; SC ने कपूर फैमिली विवाद में मध्यस्थ किया नियुक्त, India News in Hindi - Hindustan
More

पूर्व CJI चंद्रचूड़ निपटाएंगे सास-बहू का झगड़ा; SC ने कपूर फैमिली विवाद में मध्यस्थ किया नियुक्त

Kapoor Family Case: पीठ ने कहा कि आज संबंधित पक्षों की ओर से पेश सभी वकीलों ने मध्यस्थता के लिए सहर्ष सहमति व्यक्त की है। इसे देखते हुए हम भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त करते हैं।

Thu, 7 May 2026 02:44 PMPramod Praveen पीटीआई, नई दिल्ली
share
पूर्व CJI चंद्रचूड़ निपटाएंगे सास-बहू का झगड़ा; SC ने कपूर फैमिली विवाद में मध्यस्थ किया नियुक्त

Kapoor Family Case: देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (Ex CJI) जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ एक हाई प्रोफाइल बिजनेस फैमिली के झगड़े के सुलझाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कपूर फैमिली विवाद में मध्यस्थ के तौर पर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति कपूर फैमिली के पारिवारिक ट्रस्ट से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए की गई है। यह विवाद उस कानूनी लड़ाई का केंद्र बिंदु है, जो पिछले साल जून में व्यवसायी संजय कपूर के निधन के बाद उनके द्वारा छोड़ी गई 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रही है। मुख्य विवाद संजय कपूर की मां रानी कपूर और उनकी पत्नी प्रिया कपूर के बीच है।

शीर्ष अदालत ने कहा है कि यह मध्यस्थता केवल RK ट्रस्ट (यानी रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट) और Sona Comstar तथा कपूर परिवार से जुड़ी अन्य कंपनियों तक ही सीमित है; इसमें संजय कपूर की वसीयत शामिल नहीं है। संजय कपूर की माँ, रानी कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक दीवानी मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने इस ट्रस्ट को "अवैध और धोखाधड़ी एवं जालसाजी के जरिए बनाया गया" घोषित करने की मांग की थी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:नहीं चाहिए ऐसे जज, इनसे काम छीनिए या ट्रांसफर कीजिए मीलॉर्ड ! CJI से कैसी गुहार

परिवार के सभी सदस्य मध्यस्थता के लिए राजी

विवाद में शामिल परिवार के सभी सदस्य ट्रस्ट से जुड़े मामले में मध्यस्थता के लिए पेश होने को राजी हो गए हैं। इनमें संजय कपूर की दूसरी पत्नी करिश्मा कपूर के बच्चे, समायरा और कियान भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जालसाजी का उनका मामला ट्रस्ट से अलग चलेगा। उनकी तीसरी पत्नी, प्रिया कपूर ने अदालत से कहा कि उनके दिवंगत पति की माँ यानी रानी कपूर को सार्वजनिक रूप से घर के झगड़े ज़ाहिर करना बंद कर देना चाहिए। उनका इशारा इस मामले पर सार्वजनिक रूप से की जा रही टिप्पणियों की ओर था।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:पूरे देश के पुजारी तुम ही हो क्या? इससे मिल क्या जाएगा;भरी अदालत क्यों भड़के CJI

सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें

इसके बाद न्यायालय ने सभी पक्षों से खुले दिमाग से मध्यस्थता की कार्यवाही में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि वे सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें और विवाद के बारे में सोशल मीडिया पर कुछ नहीं कहें। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइंया की पीठ ने कहा, ''यह एक पारिवारिक विवाद है। इसे केवल परिवार के सदस्यों तक ही सीमित रहने दें। इसे मनोरंजन का स्रोत नहीं बनाया जाना चाहिए।'' पीठ ने टिप्पणी की कि परिवार के सदस्यों के बीच विवाद की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, उसने 27 अप्रैल को सुझाव दिया था कि पक्षों को मध्यस्थता का सहारा लेने पर विचार करना चाहिए।

अगली सुनवाई अब अगस्त में होगी

पीठ ने कहा, ''आज संबंधित पक्षों की ओर से पेश सभी वकीलों ने मध्यस्थता के लिए सहर्ष सहमति व्यक्त की है। इसे देखते हुए हम भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त करते हैं।'' पीठ ने यह भी कहा, '' हम मध्यस्थ से प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने की प्रतीक्षा करेंगे और उसके बाद मामले में आगे की कार्यवाही करेंगे। मामले की अगली सुनवाई अब अगस्त में होगी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:आप 80 की, ये उम्र लड़ने की नहीं… कपूर फैमिली के झगड़े में ऐसा क्यों बोले मीलॉर्ड

पारिवारिक ट्रस्ट को "अमान्य" घोषित करने की मांग

शीर्ष अदालत ने 27 अप्रैल को, संजय कपूर की मां द्वारा दायर उस मामले में प्रिया कपूर और अन्य से जवाब मांगा था जिसमें पारिवारिक ट्रस्ट को "अमान्य" घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। पीठ ने 80 वर्षीय रानी कपूर द्वारा दायर याचिका पर प्रिया कपूर और अन्य को नोटिस जारी किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित ट्रस्ट "जाली, मनगढ़ंत और धोखाधड़ी वाले" दस्तावेजों का परिणाम था। संपत्ति और परिसंपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर कानूनी कार्यवाही दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है और शीर्ष अदालत में दायर याचिका में ट्रस्ट की सभी संपत्तियों के हस्तांतरण पर यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया गया था।