AAP 80 ki hain ye umra ladne ki nahin, Supreme Court tells Rani Kapur in dispute with Priya Kapur to go for mediation आप 80 की हैं, ये उम्र लड़ने की नहीं; कपूर फैमिली के झगड़े में ऐसा क्यों बोले मीलॉर्ड? एक नसीहत भी, India News in Hindi - Hindustan
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आप 80 की हैं, ये उम्र लड़ने की नहीं; कपूर फैमिली के झगड़े में ऐसा क्यों बोले मीलॉर्ड? एक नसीहत भी

सोना ग्रुप में संपत्ति और जायदाद पर नियंत्रण को लेकर इसी तरह के अन्य मुकदमे पहले से ही दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर इस मुकदमे में ट्रस्ट की सभी संपत्तियों के हस्तांतरण या बिक्री पर 'यथास्थिति' बनाए रखने की मांग की गई है।

Mon, 27 April 2026 02:34 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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आप 80 की हैं, ये उम्र लड़ने की नहीं; कपूर फैमिली के झगड़े में ऐसा क्यों बोले मीलॉर्ड? एक नसीहत भी

सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर और पत्नी प्रिया सचदेवा कपूर के बीच सोना ग्रुप फैमिली ट्रस्ट को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार (27 अप्रैल) को दोनों पक्षों को मध्यस्थता (mediation) का रास्ता अपनाने की सलाह दी है। कोर्ट ने रानी कपूर के वकील से कहा कि 80 साल की उम्र में किसी व्यक्ति का लंबे समय तक विरासत की लड़ाई लड़ना किसी काम का नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि 80 साल की उम्र कोर्ट में लड़ने की नहीं होती है। इससे बेहतर होगा कि दोनों पक्ष मध्यस्थता का रास्ता अपनाएँ।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने वकीलों से कहा, "आप सब क्यों लड़ रहे हैं? यह आपके मुवक्किल के लड़ने की उम्र नहीं है... एक बार हमेशा के लिए मध्यस्थता का रास्ता अपनाएँ, शुरू से आखिर तक। वरना, यह सब बेकार है।" सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि सिर्फ़ मुकदमे को लंबा खींचने से कुछ हासिल नहीं होता, खासकर तब जब विवाद बुढ़ापे में सामने आते हैं। कोर्ट ने कहा, “आप 80 साल की हैं। यह आपके मुवक्किल के लड़ने की उम्र नहीं है।”

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'रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट' के गठन को चुनौती

यह विवाद रानी कपूर द्वारा दायर एक मुकदमे से शुरू हुआ है, जिसमें उन्होंने 'रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट' के गठन को चुनौती दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस ट्रस्ट का गठन धोखाधड़ी से किया गया था और इसका इस्तेमाल उनकी पूरी संपत्ति, जिसमें सोना ग्रुप की कंपनियों पर उनका नियंत्रण भी शामिल है, उनसे छीनने के लिए किया गया। मुकदमे के अनुसार, 2017 में जब उन्हें स्ट्रोक आया, तो उनके दिवंगत बेटे संजय कपूर और उनकी पत्नी प्रिया कपूर ने उनकी शारीरिक स्थिति और उनके भरोसे का फायदा उठाया। आरोप है कि उन्होंने बिना उनकी पूरी जानकारी और सहमति के उनकी संपत्तियों को फैमिली ट्रस्ट में ट्रांसफ़र कर दिया। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि प्रशासनिक सुविधा के बहाने उनसे कई दस्तावेज़ों पर, जिनमें सादे कागज भी शामिल थे, दस्तखत करवाए गए।

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कपूर की मौत के बाद विवाद गहराया

पिछले साल जून में संजय कपूर की मौत के बाद यह विवाद और गहरा गया। रानी कपूर ने आरोप लगाया है कि उसके बाद प्रिया कपूर ने तेजी से कदम उठाते हुए सोना ग्रुप की मुख्य कंपनियों पर अपना नियंत्रण जमा लिया। उनका दावा है कि परिवार की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा अब प्रिया कपूर और उनके बच्चों के पास चला गया है, और उनके पास कुछ भी नहीं बचा है।

दिल्ली हाई कोर्ट में भी चल रहे मुकदमे

बता दें कि सोना ग्रुप में संपत्ति और जायदाद पर नियंत्रण को लेकर इसी तरह के अन्य मुकदमे पहले से ही दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर इस मुकदमे में ट्रस्ट की सभी संपत्तियों के हस्तांतरण या बिक्री पर 'यथास्थिति' बनाए रखने की मांग की गई है। बार एंड बेंच के मुताबिक, रानी कपूर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने दलील दी कि जब विवाद "विशाल संपत्तियों और बड़े दावों" से जुड़े होते हैं, तो कोर्ट आमतौर पर शुरुआती चरण में ही सुरक्षात्मक आदेश जारी करते हैं। बेटी की ओर से पेश हुईं सीनियर एडवोकेट माधवी दीवान ने बेटी के पक्ष का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें “कुछ भी नहीं मिला है।”

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मध्यस्थता ही सभी के हित में : कोर्ट

कुछ पोते-पोतियों की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट नवीन पाहवा ने भी इस याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें इससे बाहर रखा गया है। कोर्ट ने कहा कि यह विवाद लंबा खिंच सकता है और इसलिए उसने आपसी सुलह पर ज़ोर दिया। पीठ ने कहा, "अगर सभी संबंधित पक्ष मध्यस्थता (mediation) का रास्ता अपनाते हैं और शांतिपूर्ण तथा निष्पक्ष तरीके से विवादों को सुलझाने की कोशिश करते हैं, तो यह सभी के हित में होगा... अगर ज़रूरी हुआ, तो हम मामले की सुनवाई उसके गुण-दोष के आधार पर करेंगे; लेकिन, सबसे पहले हमें पक्षों को मध्यस्थता के लिए राज़ी करने की कोशिश करनी चाहिए।" इस मामले की अगली सुनवाई अगले हफ़्ते होगी।