Inse kaam Chhiniye ya transfer kijiye BCI letter to CJI Suryakant over AP High Court Judge Who Threatened Young Advocate नहीं चाहिए ऐसे जज, इनसे काम छीनिए या ट्रांसफर कीजिए मीलॉर्ड ! CJI से BCI की क्यों गुहार, India News in Hindi - Hindustan
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नहीं चाहिए ऐसे जज, इनसे काम छीनिए या ट्रांसफर कीजिए मीलॉर्ड ! CJI से BCI की क्यों गुहार

BCI की चिट्ठी में लिखा गया है कि किसी भी कोर्ट की गरिमा तब नहीं बढ़ती, जब किसी वकील को खुली अदालत में रहम की भीख मांगने पर मजबूर किया जाता हो और इसके बावजूद उसे एक प्रक्रियागत चूक के लिए हिरासत में भेज दिया जाता है।

Wed, 6 May 2026 05:11 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नहीं चाहिए ऐसे जज, इनसे काम छीनिए या ट्रांसफर कीजिए मीलॉर्ड ! CJI से BCI की क्यों गुहार

भारत में कानूनी पेशा और कानूनी शिक्षा को रेग्यूलेट करने वाली सर्वोच्च वैधानिक संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने आज (बुधवार, 6 मई को) देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को एक चिट्ठी लिखी है और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के जज जस्टिस तरलाडा राजशेखर राव द्वारा एक युवा वकील के साथ खराब बर्ताव करने के मामले में उनसे दखल देने की मांग की है। BCI ने हाई कोर्ट के जज से काम छीनने या उन्हें दूसरी अदालत में ट्रंसफर करने की गुहार लगाई है। दरअसल, यह मांग जस्टिस तरलाडा राजशेखर राव द्वारा सुनवाई के दौरान एक युवा वकील को 24 घंटे के लिए पुलिस हिरासत में भेजने की धमकी देने के बाद की गई है।

CJI सूर्यकांत को 6 मई की तारीख में लिखी गई एक चिट्ठी में BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के जज जस्टिस तरलाडा राजशेखर राव के बर्ताव को लेकर गंभीर चिंता जताई है। हाई कोर्ट की कार्यवाही का एक वायरल वीडियो का ज़िक्र करते हुए BCI ने चिट्ठी में कहा है कि यह घटना न्यायिक स्वभाव, आनुपातिकता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। चिट्ठी में यभी कहा गया है कि इस तरह की घटनाओं का बार के युवा सदस्यों पर बुरा असर पड़ता है। ये उनके मन में डर पैदा करती हैं।

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खुली अदालत में रहम की भीख मांगने पर मजबूर किया

चिट्ठी में लिखा गया है, "किसी भी कोर्ट की गरिमा तब नहीं बढ़ती, जब किसी वकील को खुली अदालत में रहम की भीख मांगने पर मजबूर किया जाता हो और इसके बावजूद उसे एक प्रक्रियागत चूक के लिए हिरासत में भेज दिया जाता है।” BCI ने युवा वकील को हिरासत में भेजने का निर्देश देने की भी आलोचना की और कहा, “एक वकील, खासकर इस पेशे का कोई युवा सदस्य, अगर हालात सही हों तो उसे कानून के मुताबिक सुधारा जा सकता है, चेतावनी दी जा सकती है, या उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। लेकिन, एक युवा वकील को इस तरह 24 घंटे के लिए न्यायिक हिरासत में भेजना, पहली नजर में, बेहद अनुचित और इस संस्था में बार के भरोसे को गहरा नुकसान पहुंचाने वाला लगता है।”

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जज का खिलाफ कार्रवाई करें CJI

बार एंड बेंच के मुताबिक, CJI सूर्यकांत को दिए अपने प्रतिवेदन में BCI ने उनसे अनुरोध किया है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले का संस्थागत संज्ञान ले और हाई कोर्ट की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग, जज द्वारा पारित आदेश और मामले से जुड़ी सभी परिस्थितियों पर संज्ञान लें। BCI ने अपनी चिट्ठी में CJI सूर्यकांत से हाई कोर्ट के जस्टिस तरलाडा राजशेखर राव के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की है, जिसमें समीक्षा लंबित रहने तक उनसे न्यायिक कार्य वापस लेना, उनका स्थानांतरण करना, और न्यायालय प्रबंधन, न्यायिक स्वभाव और बार-बेंच संबंधों पर उचित न्यायिक प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है।

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क्या है मामला?

यह विवाद 4 मई को हाई कोर्ट में हुई एक सुनवाई से जुड़ा है, जिसमें एक लुक आउट सर्कुलर और पासपोर्ट ज़ब्त करने को चुनौती देने वाली एक याचिका लिस्टेड थी। कार्यवाही के दौरान, जस्टिस राव ने याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील को फटकार लगाई और कहा कि उसने लापरवाही से बर्ताव किया है, और पूछा कि क्या वह खुद को कोई महान सीनियर वकील समझता है। इस बातचीत का एक वीडियो क्लिप, जो तब से वायरल हो रहा है, दिखाता है कि युवा वकील माफी मांग रहा है और नरमी बरतने की गुहार लगा रहा है; वह कह रहा है कि उसे दर्द हो रहा है और वह हाथ जोड़कर “रहम की भीख” मांग रहा है। इसके बावजूद, जज ने पुलिसकर्मियों को उसे 24 घंटे के लिए हिरासत में लेने का निर्देश दिया। सूत्रों ने बाद में बताया कि हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के दखल के बाद, कोर्ट ने बाद में वकील को पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश रद्द कर दिया।