CM की कुर्सी छोड़ने के बाद सिद्धारमैया को कांग्रेस में मिला ये पद, DK शिवकुमार के शपथ ग्रहण से पहले ऐलान
सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा उनके लंबे राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उन्होंने दो कार्यकालों में कुल 8 वर्ष से अधिक समय तक कर्नाटक की कमान संभाली, जो एक रिकॉर्ड है।

कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) का सदस्य नियुक्त करने की घोषणा की। यह फैसला उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के महज कुछ दिनों बाद आया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने सिद्धारमैया को तत्काल प्रभाव से सीडब्ल्यूसी का सदस्य बनाया है। सीडब्ल्यूसी कांग्रेस का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला अंग है, जिसमें पार्टी की प्रमुख नीतियां और रणनीतियां तय की जाती हैं। इस नियुक्ति से सिद्धारमैया को राष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका मिली है।
सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा उनके लंबे राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उन्होंने दो कार्यकालों में कुल 8 वर्ष से अधिक समय तक कर्नाटक की कमान संभाली, जो एक रिकॉर्ड है। उनकी नियुक्ति डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले हुई, जो अब नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। सिद्धारमैया और शिवकुमार लंबे समय से एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद दोनों नेताओं के बीच सीएम पद को लेकर समझौता हुआ था, जिसमें सिद्धारमैया को शुरुआती 2.5 साल और शिवकुमार को बाद के 2.5 साल का समय तय किया गया था। लेकिन नवंबर 2025 में समय पूरा होने के बावजूद सिद्धारमैया ने पद छोड़ने में देरी की, जिससे आंतरिक कलह बढ़ गई।
क्या संदेश देना चाहता है पार्टी हाईकमान
पार्टी की हाई कमान ने आखिरकार इस विवाद को सुलझाते हुए शिवकुमार को उनका वादा निभाया और उन्हें मुख्यमंत्री पद सौंपा। सिद्धारमैया ने राज्यसभा सीट लेने से इनकार कर दिया था और राज्य की राजनीति में सक्रिय रहने की इच्छा जताई थी। उनकी सीडब्ल्यूसी में नियुक्ति को पार्टी के अंदर सिद्धारमैया का सम्मान बनाए रखने और उनके अनुभव का राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग करने के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम कांग्रेस के आंतरिक संतुलन को बनाए रखने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम से कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन और अनुशासन का संदेश गया है। सिद्धारमैया वरिष्ठ नेता के रूप में अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका निभाएंगे, जबकि शिवकुमार राज्य में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। यह बदलाव 2023 के चुनावी वादों को पूरा करने का प्रतीक भी है। यह नियुक्ति सिद्धारमैया के राजनीतिक सफर को नई दिशा देती है और पार्टी की रणनीति में उनके योगदान को जारी रखती है।




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