ST को 22% और SC को 16% से ज्यादा मिलेगा आरक्षण, छात्रों के लिए इस राज्य ने लिया फैसला
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अखिल भारतीय कोटा के अंतर्गत आने वाली सीटों पर यह नई आरक्षण नीति लागू नहीं होगी। इसके अलावा, विकलांग व्यक्तियों, पूर्व सैनिकों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और अन्य क्षैतिज आरक्षण संबंधी मौजूदा प्रावधान पहले की तरह ही बरकरार रहेंगे।

ओडिशा सरकार ने राज्य के सभी प्रोफेशनल शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) के लिए आरक्षण को बढ़ाने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस साल की शुरुआत में ओडिशा प्रोफेशनल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2007 के तहत गठित पॉलिसी प्लानिंग बॉडी की सिफारिशों के आधार पर यह फैसला लिया गया। अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग से जारी आदेश के अनुसार, अब एसटी के लिए आरक्षण 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 22.50 प्रतिशत, एससी के लिए 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 16.25 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही एसईबीसी वर्ग के लिए नया 11.25 प्रतिशत आरक्षण भी शुरू किया गया है।
यह बदलाव उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल शिक्षा में पिछड़े वर्गों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। नई आरक्षण नीति इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, मेडिसिन, डेंटल साइंसेज, नर्सिंग, फार्मेसी, वेटरनरी साइंसेज, एग्रीकल्चर, आर्किटेक्चर, पॉलिटेक्निक, आईटीआई और अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज पर लागू होगी। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधीन आने वाले सभी संस्थानों में यह नीति एक समान रूप से लागू की जाएगी। इससे एसटी, एससी और एसईबीसी समुदायों के छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे और वे चिकित्सा, इंजीनियरिंग व अन्य प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में अधिक संख्या में प्रवेश पा सकेंगे।
सामाजिक न्याय को मजबूत करना मकसद
सरकार का मानना है कि यह आरक्षण सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा और राज्य में शैक्षणिक समानता को बढ़ावा देगा। नई व्यवस्था 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू हो जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अखिल भारतीय कोटा के अंतर्गत आने वाली सीटों पर यह नई आरक्षण नीति लागू नहीं होगी। इसके अलावा, विकलांग व्यक्तियों, पूर्व सैनिकों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और अन्य क्षैतिज आरक्षण संबंधी मौजूदा प्रावधान पहले की तरह ही बरकरार रहेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आरक्षण की नई व्यवस्था अन्य योग्य श्रेणियों के अधिकारों पर कोई असर न डाले।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सभी संस्थानों को इस नई नीति का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला ओडिशा में पिछड़े वर्गों के उत्थान की दिशा में एक अहम पहल है। इससे लाखों छात्रों के भविष्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ा हुआ आरक्षण न केवल सामाजिक समानता लाएगा बल्कि राज्य की समग्र विकास प्रक्रिया को भी मजबूती प्रदान करेगा। छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कदम का स्वागत किया है।




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