Amit Shah slams Indira, Rahul Gandhi and P Chidambaram in lok sabha over Naxalism spread in India main points of speech इंदिरा, राहुल, चिदंबरम और CPM; अमित शाह ने नक्सलवाद पर सबको लपेटा: पढ़ें- स्पीच की बड़ी बातें, India News in Hindi - Hindustan
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इंदिरा, राहुल, चिदंबरम और CPM; अमित शाह ने नक्सलवाद पर सबको लपेटा: पढ़ें- स्पीच की बड़ी बातें

शाह ने आरोप लगाया कि 1970 से लेकर 77 तक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी माओवादी विचारधारा की गिरफ्त में आईं और उसी समय यह आंदोलन 12 राज्यों में फैल गया था। उन्होंने कहा कि नक्सल विचारधारा का एकमात्र उद्देश्य देश में शासन, संविधान और सुरक्षा का शून्य (वैक्यूम) उत्पन्न करना है।

Mon, 30 March 2026 09:18 PMPramod Praveen भाषा, नई दिल्ली
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इंदिरा, राहुल, चिदंबरम और CPM; अमित शाह ने नक्सलवाद पर सबको लपेटा: पढ़ें- स्पीच की बड़ी बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश में नक्सलवाद पनपने के लिए कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा को जिम्मेदार ठहराते हुए सोमवार को लोकसभा में कहा कि देश अब नक्सल मुक्त हो गया है। शाह ने विभिन्न राज्यों में नक्सलवाद के खिलाफ चलाये गए अभियानों की सफलता को रेखांकित करते हुए कहा, ''हम ऐसा कह सकते हैं कि हम नक्सल मुक्त हो गए हैं।' सरकार ने देश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए 31 मार्च 2026 की समय सीमा निर्धारित की थी। देश में नक्सलवाद के पनपने के लिए कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा को जिम्मेदार ठहराते हुए शाह ने यह भी कहा कि 1970 से लेकर 2004 तक, चार वर्ष छोड़कर पूरे समय कांग्रेस का शासन रहा जिस दौरान यह विचारधारा पनपी और फैली।

उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि नक्सलियों के साथ रहते- रहते उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए। उन्होंने कहा, ''इसका जवाब उन्हें (कांग्रेस को) चुनाव में देना पड़ेगा।'' शाह ने करीब डेढ़ घंटे के अपने भाषण के दौरान, वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के प्रयासों पर नियम 193 के तहत हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ''कई सुरक्षा विशेषज्ञ कहते थे कि सत्ता के समर्थन के बिना किसी हथियारबंद आंदोलन का देश के बीचों बीच 'रेड कॉरिडोर' बनना संभव नहीं है।''

इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं

शाह ने कहा, ''2014 में सरकार बदली और मोदी सरकार के तहत वर्षों पुरानी समस्याओं का हल हुआ।'' उन्होंने कहा कि अब नक्सल मुक्त भारत भी इसी सरकार के शासन काल में बन रहा है और सरकार के प्रयासों में नक्सल मुक्त भारत को नंबर एक पर रखने से राजनीति विज्ञान के जानकार जरा भी नहीं हिचकेंगे। शाह ने कहा कि भोले-भाले आदिवासियों के सामने यह गलत विमर्श रखा गया था कि उन्हें न्याय दिलाने और उनके अधिकार की खातिर यह लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ''नक्सल का मूल कारण विकास की मांग, गरीबी और अन्याय नहीं, बल्कि विचारधारा है। इसका विकास से कोई लेना देना नहीं है। इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है।''

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लाल आतंक की परछाई

गृह मंत्री ने कहा कि अन्याय होने पर हथियार उठा लेना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है और ऐसी गतिविधि मोदी सरकार के दौरान कभी स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा, ''बस्तर क्षेत्र के लोग सरकार की सुविधाओं से छूट गए थे क्योंकि वहां लाल आतंक की परछाई थी। आज परछाई हट गई है और बस्तर विकसित हो रहा है।'' उन्होंने कहा कि नक्सलवाद और उग्रवाद समाप्त हो रहा है तो उसका पूरा श्रेय अर्धसैनिक बलों, विशेष कर कोबरा बटालियन, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), राज्यों की पुलिस विशेष रूप से छत्तीसगढ़ पुलिस तथा स्थानीय आदिवासियों को जाता है।

सबसे बड़ी समस्या माओवाद

गृह मंत्री ने कुछ विपक्षी सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन में शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा की तुलना नक्सलियों से करने की कोशिश की गई, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माना था कि कश्मीर और पूर्वोत्तर की तुलना में आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी समस्या माओवाद है, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। शाह ने यह भी कहा कि देश की आजादी के बाद संसाधन बहुत कम थे और दूर-दराज के कई क्षेत्रों में सरकार की पहुंच नहीं थी, ऐसे में वहां विकास पहुंचने की गति भी धीमी होना स्वाभाविक था।

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उन्होंने कहा जब सुनियोजित भेदभाव का वातावरण ही नहीं था तो इसे अत्याचार कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी एक कहानी गढ़ी जा रही है और सच्चाई यह है कि पूरा 'रेड कॉरिडोर' इसलिए चुना गया कि वहां राज्य की पहुंच कम थी और वहां भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाकर हथियार पकड़ाए गए। उन्होंने कहा, ''गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद के कारण सालों तक गरीबी रही।'' शाह ने कहा, ''15 अगस्त 1947 से पहले आदिवासी बिरसा मुंडा, तिलका मांझी को नायक मानते थे। वे 70 का दशक आते-आते माओ को नायक कैसे मानने लगे।''

अन्याय किसी के भी साथ हो सकता है

उन्होंने कहा कि नक्सलबाड़ी और बस्तर में नक्सलवाद पनपा, जबकि सहरसा (बिहार) और बलिया (उत्तर प्रदेश) जैसे स्थानों पर नहीं, हालांकि उनकी साक्षरता दर और प्रति व्यक्ति आय एक जैसी थी। शाह ने कहा, ''ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बलिया और सहरसा का भूगोल उनके अनुकूल नहीं था। हथियार लेकर आदिवासयों को बरगलाने की अनुकूल स्थिति नहीं थी।'' उन्होंने कहा कि अन्याय किसी के भी साथ हो सकता है, विकास कहीं पर भी कम-ज्यादा हो सकता है, ''लेकिन संवैधानिक तरीके से लड़ा जा सकता है, हथियार लेकर नहीं।''

शाह ने आरोप लगाया कि 1970 से लेकर 77 तक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी माओवादी विचारधारा की गिरफ्त में आईं और उसी समय यह आंदोलन 12 राज्यों में फैल गया था। उन्होंने कहा कि नक्सल विचारधारा का एकमात्र उद्देश्य देश में शासन, संविधान और सुरक्षा का शून्य (वैक्यूम) उत्पन्न करना है। माओवादियों से बात करने और उन्हें जान से नहीं मारने के कुछ विपक्षी सदस्यों के तर्कों पर शाह ने कहा, ''मैं बस्तर में जाकर 50 बार यह बात कह चुका हूं कि हथियार डाल दीजिए तो सरकार पूरे पुनर्वास की व्यवस्था करेगी। हमारी सरकार की नीति है कि चर्चा उसी से होती है, जो हथियार डालता है। जो गोली चलाता है, उसका जवाब गोली से दिया जाता है।''

वामपंथी विचारधारा दूसरे देशों की क्रांति से आई

शाह ने यह दावा भी किया कि देश में वामपंथी विचारधारा दूसरे देशों की क्रांति से आई। उन्होंने कहा 1969 में संसदीय राजनीति का विरोध करने के लिए भाकपा माले (माक्सर्वादी) की स्थापना हुई जिसका मकसद संसदीय राजनीति का विरोध कर सशस्त्र क्रांति करना था। उन्होंने कहा, ''ये ही आज के माओवादी हैं। इस मूल को समझना होगा।'' उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि नक्सलवाद को अन्याय के खिलाफ संघर्ष का स्वरूप मानकर महिमामंडित नहीं किया जाना चाहिए।

शाह ने यह भी कहा कि माओवादी समर्थक बुद्धिजीवी अपने लेखों में केवल उनके प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं लेकिन नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिजनों के प्रति संवेदना नहीं व्यक्त करते। उन्होंने कहा, ''आपकी मानवता संविधान तोड़कर हथियार लेकर घूमने वालों के लिए है। मैं मानवता के इस दोहरे चरित्र को स्वीकार नहीं करता। ये मानवतावादी नहीं, नक्सलियों के समर्थक हैं।''

राहुल-चिदंबरम पर भी निशाना

शाह ने नेता विपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और उन पर नक्सलवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने अपने राजनीतिक करियर में कई बार नक्सली नेताओं और उनके समर्थकों का साथ दिया है। शाह ने कहा कि गांधी ने कथित तौर पर एक प्रो-नक्सल खासकर हिडमा के समर्थन में नारे को रीपोस्ट किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में नक्सलवाद को पोषित किया गया। शाह ने पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम को भी लपेटे में लिया और उनके एक बयान को कोट किया। शाह ने कहा कि चिदंबरम "नक्सलियों का दिल जीतने" की बात करते थे, जिससे नक्सलवाद फला-फूला। उन्होंने वर्तमान सरकार की "सरेंडर करो या मरो" की नीति को देश को नक्सल मुक्त बनाने का श्रेय दिया।