Amid Iran conflict authorities ask oil firms to ensure fuel for govt vehicles in Maharashtra भारत में बढ़ने वाली है तेल की किल्लत? मिडिल ईस्ट में जंग के बीच इस प्रदेश में खास आदेश, India News in Hindi - Hindustan
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भारत में बढ़ने वाली है तेल की किल्लत? मिडिल ईस्ट में जंग के बीच इस प्रदेश में खास आदेश

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में एक खास आदेश जारी हुआ है। यह आदेश तेल को लेकर दिया गया है। इसमें तेल और गैस कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि आवश्यक कार्य में लगे सरकारी वाहनों के लिए ईंधन स्टोर किया जाए।

Mon, 9 March 2026 04:58 PMDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, छत्रपति संभाजीनगर
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भारत में बढ़ने वाली है तेल की किल्लत? मिडिल ईस्ट में जंग के बीच इस प्रदेश में खास आदेश

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में एक खास आदेश जारी हुआ है। यह आदेश तेल को लेकर दिया गया है। इसमें तेल और गैस कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि आवश्यक कार्य में लगे सरकारी वाहनों के लिए ईंधन स्टोर किया जाए। सूत्रों के मुताबिक यह निर्देश मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के चलते वाहन आपूर्ति में होने वाली बाधा को लेकर जारी किया गया है।

क्या है निर्देश
जिला आपूर्ति अधिकारी ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के रिटेल सेल्स अधिकारियों को एक पत्र में कहाकि युद्ध जैसी स्थिति ने पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई चेन टूटने का खतरा पैदा कर दिया है। पांच मार्च को जारी किए इस पत्र में प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पेट्रोल पंपों को सरकारी वाहनों के लिए विशेष रूप से पेट्रोल और डीजल के पर्याप्त स्टॉक आरक्षित करने का निर्देश दें। खासतौर पर उन वाहनों के लिए जो तालुका और जिला स्तर पर आपातकाल और अनिवार्य सेवाओं में शामिल हैं।

कम हुआ है तेल उत्पादन
गौरतलब है कि इराक़, कुवैत और यूएई ने अपना तेल उत्पादन कम कर दिया है। जबकि ईरान, इजरायल और अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में विवाद के बाद से तेल और गैस ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे तेल और गैस सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बीच कच्चे तेल की कीमत सोमवार को 26 फीसदी से बढ़कर प्रति बैरल 10,549 रुपए के उच्च स्तर पर पहुंच गई।

तेल संकट पर वित्त मंत्री ने क्या कहा
उधर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहाकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर खास असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि देश में मुद्रास्फीति पहले से ही अपने निचले स्तर के करीब है। सीतारमण ने लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में कहाकि वैश्विक कच्चे तेल और भारतीय बास्केट (अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों का भारांश औसत, जिनकी खरीद भारतीय रिफाइनरी करती हैं) दोनों की कीमतों में पिछले एक वर्ष से लगातार गिरावट का रुख था। 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से इसमें तेजी आई है।

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वित्त मंत्री ने कहाकि फरवरी के अंत से दो मार्च, 2026 तक कच्चे तेल की कीमत (भारतीय बास्केट) 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80.16 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। चूंकि भारत में मुद्रास्फीति अपने निचले स्तर के करीब है, इसलिए फिलहाल महंगाई पर इसका प्रभाव महत्वपूर्ण नहीं माना जा रहा है। वह इस सवाल का जवाब दे रही थीं कि क्या सरकार ने देश में मुद्रास्फीति पर बढ़ते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के प्रभाव की समीक्षा की है।

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