यूथ विंग की इस एक हरकत से मुश्किल में आ गई कांग्रेस? INDI अलायंस में भी दरार; क्या बोल रहे साथी दल
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने अपने नेताओं को साफ कहा है कि यूथ कांग्रेस के इस एक्शन का बचाव किया जाना चाहिए लेकिन उसके सामने मुश्किल यह है कि साथियों को चुप कराना आसान नहीं नजर आ रहा है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (INDIA AI Impact Summit 2026) के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा आधा नंगा होकर किए गए प्रदर्शन ने काफी विवाद पैदा कर दिया है। हालत ये है कि यूथ कांग्रेस का यह कदम अब कांग्रेस के लिए एक सियासी बोझ बन गया है क्योंकि पहले तो INDIA ब्लॉक के साथियों ने ही इस विरोध से दूरी बना ली थी लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुलकर इस प्रदर्शन की आलोचना की तो इंडिया अलायंस के अन्य साथी भी अब खुलकर इसका विरोध करने लगे हैं।
बड़ी बात यह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी अब यूथ कांग्रेस के कदम पर अपनी नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व गवर्नर मार्गरेट अल्वा ने NDTV से कहा है कि इंटरनेशनल इवेंट्स के विरोध में अनुशासन और ज़िम्मेदारी की भावना बनाए रखना बहुत जरूरी है। एक और सीनियर कांग्रेस नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन जगह सही नहीं थी।
यूथ कांग्रेस का बचाव करने की सलाह
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने अपने नेताओं को साफ कहा है कि यूथ कांग्रेस के इस एक्शन का बचाव किया जाना चाहिए लेकिन उसके सामने मुश्किल यह है कि साथियों को चुप कराना आसान नहीं नजर आ रहा है। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल, जिन्होंने पार्लियामेंट में लगातार सपोर्ट किया है, उन्होंने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है। अखिलेश यादव ने कहा है कि BJP "झूठी" है और सरकार गलत जानकारी फैलाती है, लेकिन वह ऐसे विरोध प्रदर्शनों के पक्ष में नहीं हैं जो विदेशी डेलीगेट्स और विदेशों में भारत का अपमान करते हैं।
RJD, शिवसेना का क्या कहना?
वहीं, RJD के मनोज झा ने कहा कि देश में इस सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर गुस्सा है, खासकर इंडिया-US ट्रेड डील को लेकर। लेकिन वह फिर भी AI समिट में सेमी-न्यूड विरोध प्रदर्शन को अच्छा आइडिया नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए सही जगह चुनना बहुत जरूरी है और जगह अलग होनी चाहिए थी। इस बीच, शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के सदस्य अरविंद सावंत और आदित्य ठाकरे ने कांग्रेस से दूरी बनाते हुए बयान जारी किए हैं। सावंत ने कहा कि राजनीति में विरोध करने का हक सभी को है, लेकिन विरोध प्रदर्शन की जगह को समझना चाहिए। AI समिट एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म था और इससे बचना चाहिए था। आदित्य ठाकरे ने भी इससे सहमति जताते हुए कहा कि समिट एक प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म था और इसे पॉलिटिकल विरोध प्रदर्शन की जगह नहीं होना चाहिए था।
ममता के मंत्री ने दी तीखी प्रतिक्रिया
पश्चिम बंगाल के IT मिनिस्टर और TMC नेता बाबुल सुप्रियो ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एक पोस्ट में कहा कि इंटरनेशनल लीडर्स और ग्लोबल इंडस्ट्री लीडर्स के साथ एक प्लेटफॉर्म पर विरोध प्रदर्शन देश की प्रायोरिटीज़ के बारे में नेगेटिव मैसेज देता है। लोकतंत्र में सभी को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि पॉलिटिकल मतभेदों पर लड़ा जा सकता है, लेकिन इसकी कीमत देश की इज्जत और सम्मान से समझौता करके नहीं चुकाई जानी चाहिए।
कांग्रेस को बड़ा सबक मिल सकता है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से कांग्रेस को बड़ा सबक मिल सकता है। लोकसभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने और नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में होने के बावजूद, पार्टी को अब अपनी रणनीति अधिक संतुलित और सहयोगियों के हितों को ध्यान में रखकर तय करनी होगी, ताकि गठबंधन की एकजुटता बनी रहे। बता दें कि 20 फरवरी 2026 को भारत मंडपम में चल रहे वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन में भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कुछ कार्यकर्ता घुस गए और वहां अपने कपड़े उतारकर (अर्धनग्न होकर) प्रदर्शन करने लगे थे। ये कार्यकर्ता भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) और किसानों के हितों की कथित अनदेखी का विरोध कर रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की तस्वीरों वाली टी-शर्ट और पोस्टर लहराए जिन पर "PM is compromised" जैसे नारे लिखे थे।




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