Tamilnadu Seat sharing talk between DMK and Congress reaches at one Rajya Sabha berth for Pawan Khera आधी रात गए थे सीट-सत्ता में हिस्सेदारी मांगने, पर CM के सामने INC नेता मांगने लगे RS की एक अदद सीट, India News in Hindi - Hindustan
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आधी रात गए थे सीट-सत्ता में हिस्सेदारी मांगने, पर CM के सामने INC नेता मांगने लगे RS की एक अदद सीट

स्टालिन पहले ही साफ कर चुके हैं कि डीएमके सरकार में सत्ता-साझेदारी संभव नहीं है। बैठक में विधानसभा सीटों के बंटवारे पर भी अंतिम निर्णय नहीं हुआ और इसे अगले दौर की बातचीत के लिए छोड़ दिया गया। 

Mon, 23 Feb 2026 06:20 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई
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आधी रात गए थे सीट-सत्ता में हिस्सेदारी मांगने, पर CM के सामने INC नेता मांगने लगे RS की एक अदद सीट

दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में भी आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहां देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस राज्य की सत्ताधारी डीएमके के साथ गठबंधन में है। आगामी चुनावों के लिए सीटों के बंटवारे और जीत के बाद सत्ता में हिस्सेदारी पर दोनों दलों के बीच पेच फंसा हुआ है। इसी सिलसिले में बात करने के लिए कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल रविवार रात मुख्यमंत्री और डीएमके चीफ एमके स्टालिन के चेन्नई के अलवरपेट स्थित आवास पहुंचे थे। तब से यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि दोनों दलों के बीच सियासी तनातनी बढ़ सकती है लेकिन हुआ इससे उलट। दोनों नेताओं के बीच जब बातचीत शुरू हुई तो बातचीत का रुख अलग रहा और टकराव की बजाय दोनों संतुलन बनाने पर जोर देते रहे।

DMK और तमिलनाडु कांग्रेस के टॉप सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मीटिंग के दौरान दोनों नेताओं ने हाल के हफ्तों में टकराव की वजह बनी पावर-शेयरिंग की मांग पर जोर देने के बजाय अलग मुद्दे पर बातचीत की। रिपोर्ट में कहा गया है कि वेणुगोपाल ने मीटिंग के दौरान सीट शेयरिंग की बजाय राज्यसभा सीट पर ध्यान केंद्रित की और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के लिए एक सीट की मांग की। डीएमके सूत्रों का कहना है कि इस तरह की मांग असामान्य जरूर है, लेकिन पार्टी नेतृत्व को इससे विशेष आपत्ति नहीं हो सकती।

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हाल के दिनों में सीट शेयरिंग पर तनातनी बढ़ी है

बता दें कि हाल के हफ्तों में जिस सत्ता-साझेदारी (पावर शेयरिंग) के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से दबाव बनाया था, उसे इस बैठक में प्रमुखता नहीं दी गई। यह बदलाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने न केवल अधिक विधानसभा सीटों की मांग की थी, बल्कि राज्य सरकार में हिस्सेदारी की भी बात उठाई थी। इस पर स्टालिन पहले ही साफ कर चुके हैं कि डीएमके सरकार में सत्ता-साझेदारी संभव नहीं है। बैठक में विधानसभा सीटों के बंटवारे पर भी अंतिम निर्णय नहीं हुआ और इसे अगले दौर की बातचीत के लिए छोड़ दिया गया। हालांकि, संकेत हैं कि डीएमके कांग्रेस को 2021 के 25 सीटों के मुकाबले थोड़ा बढ़ाकर 27-28 सीटें देने पर विचार कर सकती है।

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सत्ता-साझेदारी का मतलब सिर्फ कैबिनेट में हिस्सेदारी नहीं

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि बैठक में पार्टी ने अपनी चिंताओं और राज्यभर के कार्यकर्ताओं के मुद्दों को रखा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सत्ता-साझेदारी का मतलब केवल मंत्रिमंडल में जगह नहीं है, बल्कि स्थानीय निकायों, समितियों और अन्य संस्थाओं में भागीदारी भी है, ताकि जमीनी स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ सके। तमिलनाडु के लगभग 40 कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में पार्टी हाईकमान से मुलाकात की थी, और लीडरशिप से DMK अलायंस को न तोड़ने की अपील की थी, जबकि लोकल बॉडीज़, कोऑपरेटिव संस्थाओं और दूसरे फोरम में ज़्यादा सीटें और ज़्यादा रिप्रेजेंटेशन की मांग की थी।

बैठक में कौन-कौन थे शामिल

इस बैठक में वेणुगोपाल के साथ तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई और एआईसीसी प्रभारी गिरीश चोडंकर भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी का एक सीलबंद पत्र भी स्टालिन को सौंपा गया, जिससे बैठक को और अहम माना जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों दलों के नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी से तनाव बढ़ा था। हालांकि, ताजा बातचीत से संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेतृत्व अब अधिक संतुलित और व्यावहारिक रुख अपनाते हुए गठबंधन को बनाए रखने पर जोर दे रहा है।