अभिषेक बनर्जी को थोड़ी राहत, बागियों के हमलों के बीच खुलकर सपोर्ट में आईं TMC सांसद महुआ मोइत्रा
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अभिषेक बनर्जी के ऊपर बागी नेता हमलावर बने हुए हैं। इसी क्रम में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने अभिषेक का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अगर नेताओं को दिक्कत थी, तो चुनाव के पहले पार्टी छोड़ देते।

Abhishek Banerjee: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सत्ता जाने के बाद अभिषेक बनर्जी अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर आ गए हैं। पार्टी छोड़कर बागी हुए नेता खुले तौर पर ममता बनर्जी को अपना समर्थन दे रहे हैं लेकिन अभिषेक के ऊपर लगातार हमलावर हो रहे हैं। इन सभी बातों के बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने अभिषेक बनर्जी का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि भले ही अभिषेक को पहली बार लोकसभा टिकट ममता बनर्जी के भतीजे होने के नाते मिला था, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित करते हुए अपनी पहचान स्थापित की है।
हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए महुआ मोइत्रा ने पार्टी के बागी सांसदों और विधायकों द्वारा अभिषेक पर किए जा रहे हमलों की निंदा की। उन्होंने कहा, "क्या अभिषेक बनर्जी को पहली बार 2014 में लोकसभा का टिकट इसलिए मिला था कि वह ममता बनर्जी के भतीजे थे? हां, बिल्कुल ऐसा ही हुआ था। लेकिन उसके बाद से वह लगातार तीन बार चुनाव जीतकर आए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने हैं और लगातार अपनी पहचान बनाई है। वह पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में भी लगातार लगे रहे हैं। उन्होंने डायमंड हार्बर से लेकर बंगाल के बाकी राज्यों में पार्टी का संगठन खड़ा किया है। वह लगातार यहां हैं। ऐसे में साफ है कि उन्होंने इसकी कीमत चुकाई है।"
बता दें, महुआ मोइत्रा की अभिषेक बनर्जी को लेकर यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई हैं, जब अभिषेक लगातार हमलों का सामना कर रहे हैं। पार्टी के बागी विधायक और सांसद अभिषेक बनर्जी को ही हार के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
अभिषेक से दिक्कत थी तो पहले क्यों नहीं छोड़ी पार्टी: मोइत्रा
बागी सांसदों और विधायकों पर सवाल उठाते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा कि अगर इन लोगों को अभिषेक बनर्जी से दिक्कत थी तो इन्होंने चुनाव के पहले पार्टी क्यों नहीं छोड़ी? उन्होंने कहा, "अगर 60 विधायकों में से किसी को भी अभिषेक बनर्जी से समस्या थी, तो 2026 के चुनाव के पहले ही पार्टी क्यों नहीं छोड़ दी। अगर इतनी ही परेशानी थी तो टिकट वापस कर देते और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ लेते।" इतना ही नहीं महुआ मोइत्रा ने शुभेंदु अधिकारी का जिक्र करते हुए कहा कि वह जिस तरीके से गए थे। वह तरीका सही था। उन्होंने कहा, "शुभेंदु ने कहा कि मैं पार्टी का अगला प्रमुख बनना चाहता हूं। जब तक अभिषेक बनर्जी यहां है, मुझे वह जगह नहीं मिलेगी। इसलिए वह अलग हो गए। वह भाजपा में चले गए और आज मुख्यमंत्री हैं।"
अभिषेक बनर्जी के लिए आज हालात उस वक्त और भी ज्यादा खराब हो गए, जब पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ममता बनर्जी के भरोसेमंद माने जाने वाले कल्याण बनर्जी ने खुले तौर पर अभिषेक का नाम लेते हुए उन्हें घमंडी तक कह दिया। उन्होंने ममता बनर्जी को संबोधित करते हुए कहा कि या तो अभिषेक बनर्जी को चुन लें या फिर उन्हें चुन लें।
बता दें, 4 मई को चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए कुछ भी सही नहीं चल रहा है। चुनाव के तुरंत बाद ही पार्टी के कुछ प्रवक्ताओं ने पार्टी के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया था। इसके बाद टूट का एक सिलसिला शुरू हुआ, जो आज 60 से ज्यादा विधायक, 15 से ज्यादा लोकसभा सांसद और 4 राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे पर पहुंच गया है। इसके अलावा कई नेता खुले तौर पर अपनी नाराजगी जता रहे हैं।




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