TMC के बागियों के पास नहीं है 20 का आंकड़ा? महुआ मोइत्रा बोलीं- अब तक आ जाती चिट्ठी
tmc split latest news: TMC में मची भगदड़ के बीच सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी गुट के 20 सांसदों के समर्थन वाले दावे को खारिज कर दिया है। महुआ ने काकोली घोष और सुष्मिता देव पर तंज कसते हुए इसे टीएमसी का 'शुद्धिकरण' बताया है।

tmc split latest news: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई सांसदों के पार्टी छोड़ने और नेताओं के पाला बदलने की अटकलों के बीच, पार्टी हाल के वर्षों की अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती का सामना कर रही है। इस बीच, लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी गुट के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें 20 सांसदों के समर्थन की बात कही गई थी। महुआ ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर बागियों के पास वाकई इतने नंबर होते, तो अब तक उनकी चिट्ठी सामने आ चुकी होती और बीजेपी के साथ उनकी संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हो गई होती।
HT को दिए एक इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद यह बात कही। मोइत्रा ने कहा कि जो लोग 20 सांसदों के समर्थन का दावा कर रहे हैं, इसे साबित करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।
काकोली घोष का दावा और महुआ का पलटवार
हाल ही में टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा देने वालीं बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया था कि उनके बागी गुट ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा था कि बंगाल के विकास के लिए उनके सहित करीब 20 टीएमसी सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का मन बनाया है और इसके लिए वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को औपचारिक पत्र लिखकर एक अलग ब्लॉक (गुट) के रूप में बैठने की व्यवस्था मांग रहे हैं।
काकोली के इस दावे पर पलटवार करते हुए महुआ ने कहा, "वे 16 कह रहे हैं, वे 20 का भी दावा कर रहे हैं। अब यह साबित करने की जिम्मेदारी उनकी है। मैं स्पष्ट रूप से कह सकती हूं कि उनके पास 20 सांसद नहीं हैं।"
दल-बदल कानून पर महुआ का तर्क
दल-बदल की कार्यवाही से बचने के लिए टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 19 सांसदों (दो-तिहाई) के बागी होने की जरूरत है। महुआ ने तर्क दिया कि केवल सांसदों का एक समूह जुटा लेने से दल-बदल कानून के तहत किसी गुट को मान्यता नहीं मिल जाती। कानून से बचने के लिए केवल 'विधायक दल' का नहीं, बल्कि 'राजनीतिक पार्टी' के दो-तिहाई हिस्से का अलग होना और बीजेपी में विलय करना जरूरी है, जो कि उनके पास नहीं है।
महुआ ने तंज कसते हुए कहा, "अगर उनके पास 20 सांसद हो भी जाएं, तो उन्हें क्या मिलेगा? लोकसभा या विधानसभा में किसी अलग गुट को मान्यता देने की कोई जगह नहीं है। वे चाहें तो खुद को 'काकोली कांग्रेस', 'शताब्दी कांग्रेस' या बंगाल में 'बीजेपी की बी-टीम' कह सकते हैं। वे अलग बैठकर बीजेपी को वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन यह उनके लोकसभा करियर का अंत होगा।"
सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर के इस्तीफे पर क्या बोलीं?
सुष्मिता देव के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ ने कहा कि हर व्यक्ति अपनी राजनीतिक पसंद चुनने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने याद दिलाया कि सुष्मिता देव जब कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में आई थीं, तो पार्टी ने उन्हें एक बार नहीं, बल्कि दो बार राज्यसभा की सीट दी। महुआ ने कहा, "वह क्यों गईं, इसका जवाब उन्हें ही देना होगा। उन्होंने जो किया, उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं।"
उन्होंने सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे का भी जिक्र करते हुए कहा, "हमारे पास 13 राज्यसभा सांसद हैं, जिनमें से सुखेंदु शेखर ने इस्तीफा दे दिया और अब सुष्मिता देव ने। अब देखना यह है कि क्या वे बीजेपी सांसद के रूप में वापस आते हैं या बीजेपी बंगाल से उनकी जगह किसी और को मैदान में उतारती है।"
इस्तीफों को बताया टीएमसी का 'शुद्धिकरण'
पार्टी में मची भगदड़ के बावजूद, महुआ मोइत्रा ने कहा कि टीएमसी में निराशा का कोई माहौल नहीं है। इसके उलट, उन्होंने इन इस्तीफों को पार्टी के लिए फायदेमंद बताया। महुआ ने कहा, "एक तरह से हम वास्तव में खुश हैं क्योंकि शुद्धिकरण हो रहा है।"
ममता बनर्जी को एक भावुक नेता बताते हुए महुआ ने कहा कि ममता दीदी लोगों के प्रति हमेशा वफादार रही हैं, जो बीजेपी की 'क्रूर राजनीतिक संस्कृति' से बिल्कुल अलग है। मोइत्रा ने तल्ख लहजे में कहा, "बीते 15 सालों से ममता दीदी के नाम का फायदा उठाने वाले ये बेकार और बदतमीज लोग... दीदी को तो इन्हें बहुत पहले ही अलग कर देना चाहिए था।"




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