क्या है दुर्गाड़ी किला? जहां एक हो गए शिंदे-उद्धव गुट; महाराष्ट्र में हिन्दू-मुस्लिम राजनीति का नया अखाड़ा,पुलिस से झड़प
वैसे तो हर साल बकरीद के मौके पर किले की ओर जाने वाली सड़क पर नमाज़ पढ़ी जाती है और सुरक्षा के लिहाज से मंदिर में प्रवेश कुछ समय के लिए रोक दिया जाता है लेकिन इस साल यह रोक हिन्दुओं को नागवार गुजरी।

महाराष्ट्र के कल्याण (ठाणे) में स्थित करीब 450 साल पुराना दुर्गाड़ी किला एक बार फिर हिन्दू-मुस्लिम राजनीतिक का अखाड़ा बन गया है। बुधवार (27 मई) को यह ऐतिहासिक किला तब सियासी और धार्मिक लड़ाई का केंद्र बन गया, जब सत्ताधारी भाजपा और विरोधी शिवसेना के कार्यकर्ताओं की पुलिस से हिंसक झड़प हो गई। दरअसल, पुलिस ने बकरीद की नमाज़ को देखते हुए उस किले में स्थित मंदिर में हिन्दुओं के प्रवेश पर अस्थाई रोक लगा दी थी। इस रोक ने दोनों समुदायों के बीच तनाव और टकराव पैदा कर दिया।
ताजा विवाद ने इस ऐतिहासिक किला परिसर में मालिकाना हक, पूजा के अधिकार और राजनीतिक प्रतीकों को लेकर सदियों पुराने विवाद को फिर से जिंदा कर दिया है। दरअसल, इस किले में एक मस्जिद और एक मंदिर, दोनों मौजूद हैं और यह महाराष्ट्र के सबसे संवेदनशील धार्मिक विवादों में से एक बना हुआ है। आज से करीब छह दशक पहले यही किला महाराष्ट्र में शिवसेना की हिन्दुत्व राजनीति का केंद्र बना था। यहीं से शिवसेना की राजनीति का उभार हुआ था।
शिवसेना के दोनों गुटों का विरोध
वैसे तो हर साल बकरीद के मौके पर किले की ओर जाने वाली सड़क पर नमाज़ पढ़ी जाती है और सुरक्षा के लिहाज से मंदिर में प्रवेश कुछ समय के लिए रोक दिया जाता है लेकिन इस साल यह रोक हिन्दुओं को नागवार गुजरी। खासकर शिवसेना के दोनों गुटों (उद्धव गुट और एकनाथ शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं ने इस रोक का विरोध किया। उन्होंने मांग की कि नमाज़ के समय भी हिंदू श्रद्धालुओं को मंदिर में बिना किसी रुकावट के प्रवेश करने दिया जाए।
मंदिर लगभग 30 मिनट तक बंद रहा
पुलिस के मुताबिक, इस ऐतिहासिक किले में बकरीद की नमाज़ के दौरान मंदिर लगभग 30 मिनट तक बंद रहा, जिसके बाद किला परिसर के पास विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विजय साल्वी के नेतृत्व में शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ताओं ने "घंटानाद" विरोध प्रदर्शन किया और महाआरती की। वहीं, BJP पार्षद महेश पाटिल ने सड़कों पर नमाज़ पढ़े जाने पर आपत्ति जताई और प्रशासन को मंदिर में प्रवेश रोकने के खिलाफ चेतावनी दी। जैसे-जैसे तनाव बढ़ा, पुलिस ने पाटिल को हिरासत में ले लिया, किले की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए लाल चौकी इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया।
क्या है दुर्गाड़ी किला?
दुर्गाड़ी किला मुंबई से लगभग 50 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में कल्याण (ठाणे) में स्थित है। इसका इतिहास 16वीं सदी से जुड़ा है, जब कल्याण मुस्लिम शासन के अधीन एक प्रमुख व्यापारिक बंदरगाह था। अरब सागर के करीब होने के कारण इसकी काफी अहमियत थी। इस किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में आदिलशाही सल्तनत के दौरान हुआ था। बाद में 1760 में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसे अपने अधीन कर लिया और यहां दुर्गा देवी का मंदिर बनवाया। किले पर एक तरफ हिंदू पक्ष दुर्गा देवी का मंदिर होने का दावा करता है, वहीं मुस्लिम पक्ष इसे वक्फ बोर्ड की संपत्ति और ईदगाह-मस्जिद बताता है। ये किला लगभग 70 एकड़ में फैला हुआ है।
अदालती फैसला क्या?
लगभग 48 वर्षों तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, कल्याण सिविल कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह जगह राज्य सरकार की संपत्ति है और यह एक मंदिर है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष द्वारा मस्जिद के दावे और वक्फ बोर्ड के अधिकारों से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष की कानूनी चुनौती 'लिमिटेशन एक्ट' के तहत मान्य नहीं है, क्योंकि यह केस 1976 में दायर किया गया था। यानी, 1968 में कथित तौर पर कब्ज़ा बाधित होने के लगभग नौ साल बाद।
फिलहाल स्थिति क्या?
हालाँकि, इस फैसले से विवाद का निपटारा नहीं हुआ। मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि केस को ऐतिहासिक और धार्मिक दावों की मेरिट के आधार पर नहीं, बल्कि तकनीकी आधार पर खारिज किया गया है। जनवरी 2025 में, ज़िला कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक अपील पर सुनवाई चल रही है, तब तक किले में 'यथास्थिति' बनाए रखी जाए। इस आदेश के प्रभावी होने का मतलब है कि विवादित जगह पर तब तक कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता, जब तक कि इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता। कोर्ट ने कहा, "यह साफ है कि यह विवाद काफी संवेदनशील है... और इसलिए, यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी रहना चाहिए।"




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