दिल्ली के बाद महाराष्ट्र की बारी, जिमखानों की होगी जांच; रडार पर कौन-कौन
दिल्ली जिमखाना को 5 जून तक परिसर खाली करने का नोटिस मिलने के बाद महाराष्ट्र सरकार सक्रिय हुई है। केंद्र ने रक्षा ढांचे को मजबूत करने और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया था। मुंबई में बॉम्बे जिमखाना 1875 में स्थापित क्लब है।

महाराष्ट्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार की ओर से दिए गए नोटिस के बाद मुंबई के प्रमुख जिमखानों की जांच शुरू करने का फैसला किया है। सरकारी जमीन पर चल रहे 10 जिमखानों का किराया राज्य को सालाना करीब 2 करोड़ रुपये मिलता है। इन क्लबों की लीज शर्तों और नियमों के पालन की जांच की जाएगी। यह कदम सुरक्षा और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। बॉम्बे जिमखाना, पीजे हिंदू जिमखाना, कैथोलिक जिमखाना, पारसी जिमखाना, इस्लाम जिमखाना जैसे प्रतिष्ठित क्लब इस जांच के दायरे में आएंगे।
दिल्ली जिमखाना को 5 जून तक परिसर खाली करने का नोटिस मिलने के बाद महाराष्ट्र सरकार सक्रिय हुई है। केंद्र ने रक्षा ढांचे को मजबूत करने और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया था। मुंबई में बॉम्बे जिमखाना 1875 में स्थापित एक ऐतिहासिक क्लब है। इसका लीज 2006 में समाप्त हो चुका है, जबकि ग्राउंड का लीज 2007 में खत्म हुआ। सरकार अब सभी डिफॉल्टर क्लबों को नोटिस जारी करेगी और सुनवाई भी आयोजित करेगी। 2003 की रेंट पॉलिसी को अदालत में चुनौती दी गई थी, जिसे 2013 और 2025 में संशोधित किया गया।
बॉम्बे जिमखाना और बीएमसी विवाद
बॉम्बे जिमखाना और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के बीच जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद चल रहा है। बीएमसी फैशन स्ट्रीट से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) तक हजरिमल सोमानी मार्ग को चौड़ा करने के लिए क्लब की करीब 3000 वर्ग मीटर जमीन लेना चाहती है। इससे क्लब के सीईओ के बंगले का भी हिस्सा प्रभावित होगा। क्लब इस प्रस्ताव का विरोध कर रहा है। इस बीच अन्य जिमखाने भी अपनी लीज़ स्थिति को लेकर चिंतित हैं।
इस्लाम जिमखाना के अध्यक्ष यूसुफ अबरानी ने उम्मीद जताई कि दिल्ली जिमखाना को अदालत से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि अगर सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जमीन चाहिए तो दिल्ली बड़ा शहर है, वहां अन्य जगहों पर समायोजन किया जा सकता है। महाराष्ट्र सरकार अब सभी जिमखानों की लीज, नियमों का पालन और राजस्व संबंधी मामलों की समीक्षा करेगी। यह कार्रवाई एलीट क्लबों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।




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