भोपाल के 10 वार्डों में पानी की किल्लत, पाइप से पानी रिसने के इंतजार में बाल्टी लेकर खड़े रहते हैं बच्चे
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। भोपाल नगर निगम के 85 में से लगभग 10 क्षेत्रों में पानी की सप्लाई एक दिन छोड़कर की जा रही है। लोगों का कहना है कि गर्मियों में हालात और भी बिगड़ गए हैं। एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई होने के बावजूद सप्लाई का समय भी कम कर दिया गया है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। भोपाल नगर निगम के 85 में से लगभग 10 क्षेत्रों में पानी की सप्लाई एक दिन छोड़कर की जा रही है। लोगों का कहना है कि गर्मियों में हालात और भी बिगड़ गए हैं। एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई होने के बावजूद सप्लाई का समय भी कम कर दिया गया है।
10 प्रतिशत हिस्से में एक दिन छोड़कर सप्लाई
भोपाल नगर निगम के एक अधिकारी ने कहा कि निगम के 85 में से लगभग 10 वार्डों में पानी की सप्लाई एक दिन छोड़कर की जा रही है। अपर लेक के पास स्थित और शीरीन नदी से होकर गुजरने वाला कोह-ए-फिजा पानी के मुख्य स्रोतों के इतने करीब होने के बावजूद रोजाना पानी की सप्लाई से वंचित है। नगर निगम के सिटी इंजीनियर उदित गर्ग ने बताया कि राज्य की राजधानी के लगभग 7 से 10 प्रतिशत हिस्से में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई हो रही है।
बच्चे स्टील की बाल्टियां थामे खड़े हो जाते हैं
आरिफ नगर में सूरज डूबने के समय बच्चे स्टील की बाल्टियां थामे कतार में खड़े हो जाते हैं, और नगर निगम से आने वाले पानी का पाइपों से रिसकर पानी आने का इंतजार करते हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि गर्मियों में हालात और भी बिगड़ गए हैं। एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई होने के बावजूद सप्लाई का समय भी कम कर दिया गया है।
हर बूंद का सोच-समझकर इस्तेमाल
महिलाएं पानी की हर बूंद को बहुत सोच-समझकर इस्तेमाल कर रही हैं। वह यह तय करती हैं कि उससे खाना बनाएं, सफाई करें या फिर अगले दिन के लिए बचाकर रखें। चौकदारपुरा में दुकानदार बोतलबंद पानी से अपनी दुकानों के धूल भरे फर्श साफ करते हैं वहीं दूसरी ओर, कोह-ए-फिजा में परिवार के लोग इस उम्मीद में पानी के टैंकों के आसपास जमा हो जाते हैं कि यह पानी 48 घंटों तक चल जाए।
सामाजिक कार्यक्रम पर भी असर
कई लोगों के लिए यह संकट अदृश्य है। शहर के बीचों-बीच स्थित दफ्तरों में एयर कंडीशनर की गूंज सुनाई देती है। रेस्तरां में ठंडे पेय परोसे जाते हैं और सुविधा-संपन्न लोग इस संघर्ष पर शायद ही कभी ध्यान देते हैं। लेकिन कबाड़खाना और बेरसिया रोड में एक दिन छोड़कर पानी मिलने का नियम ही जीवन का आधार है। शाहजहानाबाद के एक निवासी ने बताया कि कुछ इलाकों में सामाजिक कार्यक्रम भी पानी की उपलब्धता के हिसाब से ही तय किए जाते हैं।
बच्चों को पानी बचाने की सीख
फिजा कॉलोनी में पड़ोसी जमा किया हुआ पानी आपस में बांटते हैं। इस तरह पानी की कमी ने उनमें आपसी एकजुटता को बढ़ा दिया है। घोड़ा नक्कास में औरतें बच्चों को पानी बचाने की सीख देती हैं। बजट भाषणों के दौरान ज्यादा आवंटन तथा नई पाइपलाइन परियोजनाओं के बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद कई कॉलोनियों के निवासियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर राहत मिलना अभी भी दूर की कौड़ी है।




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