24 दिनों तक पीटा, सोने नहीं दिया, हाथ-पैर...; साध्वी प्रज्ञा की टॉर्चर की खौफनाक कहानी
इस केस के तहत साध्वी प्रज्ञा अक्तूबर 2008 से लेकर साल 2017 तक जेल में रही थीं। साध्वी ने आरोप लगाया था कि जेल में उनको बुरी तरह टॉर्चर किया गया, खासकर हमले के बाद हुई पूछताछ में।

मालेगांव विस्फोट मामले में भाजपा की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया है। इस केस के तहत साध्वी प्रज्ञा अक्तूबर 2008 से लेकर साल 2017 तक जेल में रही थीं। साध्वी ने आरोप लगाया था कि जेल में उनको बुरी तरह टॉर्चर किया गया, खासकर हमले के बाद हुई पूछताछ में। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि उन्हें 24 दिन तक बुरी तरह पीटा गया। सोने नहीं दिया गया। इतना मारते थे कि हाथ-पांव नीले-काले पड़ जाते थे।
24 दिन तक बुरी तरह पीटा
प्रज्ञा ठाकुर ने आरोप लगाया था कि जेल में उनके साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की गई थी। उन्होंने न्यूज चैनल इंडिया टीवी को दिए एक इंटरव्यू में अपना दर्द साझा किया था। साध्वी ने बताया कि पुलिस और एटीएस ने मेरी 24 दिन तक पिटाई की। मुझे दिन-रात बुरी तरह पीटा। इतनी बुरी तरह से मारते थे कि मेरे पैर-हाथ नीले और काले पड़ जाते थे। इतना मारते थे कि मेरी उंगलियां भी टेड़ी नहीं हो पाती थीं, इसके चलते मैं गिलास से पानी भी नहीं पी पाती थी।
सोने नहीं देते थे, दिन-रात पीटा
साध्वी ने बताया कि भोजन मैं करती नहीं थी। सिर्फ पानी पीती थी। ये लोग सोने नहीं देते थे। और मानसिक तौर पर कमजोर करते थे। ये लोग रात-दिन पीटते थे। जब वो लोग थक जाते थे, तो बैठकर गालियां देना शुरू कर देते थे। साध्वी प्रज्ञा ने बताया कि इतनी अभद्र और गंदी गालियां देते थे कि आप कल्पना नहीं कर सकते। व्यक्ति बदल जाता था, लेकिन मैं वही रहती थी। इस तरह वे लोग रोजाना विजी रखते हुए पूछते-मारते थे।
कड़ों में फंसाकर बेल्टों से मारते थे
13 दिन तक मुझे गैरकानूनी तरीके से रखा गया। वो लोग पूछताछ के दौरान मुझे ले जाकर जोर से पटक देते थे और दीवार से सिर टकरा जाता था। ऐसा लगता था कि नशे में हूं और टॉर्चर किया जा रहा है। कड़ों में फंसाकर मारते पीटते थे। बीच में मुझे रखते थे और एक साथ बैल्टों से पीटते थे। शरीर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं होता था, जहां बेल्टों से पीटते नहीं थे।
2008 का मालेगांव बम विस्फोट केस
अब आपको मालेगांव में हुए धमाके के बारे में बताते हैं। मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर मालेगांव शहर में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास एक विस्फोट हुआ था। मोटरसाइकिल में लगाए गए विस्फोटक सामान में विस्फोट होने से छह लोगों की मौत हो गयी थी और 101 अन्य लोग घायल हो गए थे। इस मामले के आरोपियों में प्रज्ञा सिंह ठाकुर, पुरोहित, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी शामिल थे।
अदालत ने सभी सातों आरोपियों को बृहस्पतिवार को बरी करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं हैं। अदालत ने कहा कि कोई भी धर्म हिंसा नहीं सिखाता है। उसने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन अदालत सिर्फ धारणा के आधार पर दोषी नहीं ठहरा सकती।
एक नजर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भारतीय राजनीति की एक चर्चित और विवादित शख्सियत हैं। वे मध्य प्रदेश के भोपाल से भारतीय जनता पार्टी की लोकसभा सांसद है रह चुकी हैं। उनका नाम विशेष रूप से 2008 के मालेगांव विस्फोट केस में सामने आया था, जिसमें वे कई वर्षों तक आरोपी रहीं, लेकिन बाद में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया गया है।




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