एग्जाम सेंटर पर सिख महिला से पगड़ी उतारने को कहा? MPPSC परीक्षा में हंगामा, अफसरों ने मांगी माफी
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में MPPSC परीक्षा के दौरान एक अमृतधारी सिख महिला से पगड़ी (दुमाला) उतारने को कहे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। घटना रविवार को उस स्कूल में हुई, जिसे मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया था।

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में MPPSC परीक्षा के दौरान एक अमृतधारी सिख महिला से पगड़ी (दुमाला) उतारने को कहे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। घटना रविवार को उस स्कूल में हुई, जिसे मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया था।
सुरक्षा के दौरान पगड़ी उतारने को कहा
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरलीन कौर नामक अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंची थी। वह अमृतधारी सिख हैं। सुरक्षा जांच के दौरान ड्यूटी पर तैनात महिला स्टाफ ने उनसे दुमाला उतारने के लिए कहा। इस बात की जानकारी स्थानीय सिख समुदाय के लोगों तक पहुंची, जिसके बाद बड़ी संख्या में समुदाय के सदस्य परीक्षा केंद्र के बाहर एकत्र हो गए और घटना पर कड़ी आपत्ति जताई।
अधिकारियों ने मांगी माफी
सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। सिख समुदाय के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीक को हटाने के लिए कहना अनुचित है और संबंधित महिला कर्मी से सार्वजनिक माफी की मांग की।
काफी देर तक चली चर्चा के बाद उपखंड मजिस्ट्रेट प्रतीक सोनकर और केंद्र अधीक्षक सुभाष कुमावत ने समुदाय के सामने खेद व्यक्त किया और घटना पर माफी मांगी। अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से खेद जताने के बाद दोनों पक्षों ने मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा हुआ माना।
कौन हैं गुरलीन कौर
गुरलीन कौर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ की रहने वाली हैं। वह परीक्षा देने के लिए एक दिन पहले रतलाम पहुंची थीं और अपने रिश्तेदारों के यहां ठहरी हुई थीं। रविवार दोपहर वह परीक्षा देने केंद्र पर पहुंची थीं। फिलहाल, घटना को लेकर प्रशासन की ओर से कहा गया है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए आवश्यक सावधानियां बरती जाएंगी।
सिख धर्म की पगड़ी परंपरा और महत्व
सिख धर्म में पगड़ी (दस्तार/दुमाला) आस्था, सम्मान और पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। 10वें गुरु Guru Gobind Singh ने खालसा पंथ की स्थापना के साथ केश (अकट बाल) रखने का नियम दिया था। बाल न कटवाना सिखों के पाँच ककारों में से एक है, इसलिए उन्हें सम्मानपूर्वक ढकने के लिए पगड़ी पहनी जाती है।
खासकर अमृतधारी सिखों के लिए पगड़ी उतारना धार्मिक मर्यादा के खिलाफ माना जाता है। यह केवल पहनावा नहीं, बल्कि स्वाभिमान, समानता और धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक है, जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षण प्राप्त है।
खबर में इस्तेमाल की गई तस्वीर प्रतीकात्मक है। इसे एआई से बनाया गया है।




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