JNU प्रोटेस्ट मामले में दिल्ली कोर्ट का आदेश, 14 छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए
दिल्ली की एक अदालत ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार 14 छात्रों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि जमानत मिलने के बाद सिर्फ कागजी प्रक्रिया लंबी होने के कारण किसी को जेल में रखना उचित नहीं है।

दिल्ली की एक अदालत ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार 14 छात्रों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि जमानत मिलने के बाद सिर्फ कागजी प्रक्रिया लंबी होने के कारण किसी को जेल में रखना उचित नहीं है।
पुलिसकर्मियों पर हमला गंभीर अपराध, लेकिन…
ड्यूटी मजिस्ट्रेट रवि ने यह आदेश छात्रों की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। इसमें उन्होंने मजिस्ट्रेट अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इससे पहले 27 फरवरी को अदालत ने इन 14 छात्रों को जमानत दी थी। अदालत ने उस समय कहा था कि पुलिसकर्मियों पर हमला गंभीर अपराध है, लेकिन आरोपी छात्र हैं और उनका भविष्य आगे पड़ा है।
अदालत ने किस मूल अधिकार का दिया हवाला
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जमानत का उद्देश्य आरोपी की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करना है, न कि उसे पहले से सजा देना। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार यह स्वीकार नहीं करता कि जिसे जमानत मिल चुकी है, उसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी के कारण जेल में रखा जाए।
अगर छात्र को जेल में रखेंगे, तो…
अदालत ने कहा कि यदि जमानत और जमानती बांड की जांच की प्रक्रिया में देरी के कारण छात्रों को जेल में रखा जाता है, तो जमानत का आदेश बेअसर हो सकता है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों की रिहाई कुछ कड़े और सावधानीपूर्वक तय की गई शर्तों के अधीन होगी, ताकि अभियोजन पक्ष की चिंताओं का समाधान हो सके।
जांच अधिकारी (IO) ने अदालत में छात्रों की रिहाई का विरोध करते हुए कहा कि स्थायी पते और जमानतदारों की जांच जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सुनवाई के दौरान मौजूद रहें और फरार न हों। पुलिस ने यह भी दावा किया कि कुछ आरोपियों ने शुरुआत में सही जानकारी नहीं दी थी।
अब समझिए प्रोटेस्ट वाला मामला क्या था
यह गिरफ्तारी JNU छात्रसंघ (JNUSU) के सदस्यों द्वारा निकाले गए एक मार्च के बाद हुई थी। छात्र विश्वविद्यालय परिसर के साबरमती टी-पॉइंट पर इकट्ठा हुए थे और शिक्षा मंत्रालय की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। यह विरोध कुलपति संतिश्री धुलीपुडी पंडित की हालिया टिप्पणियों, UGC मानकों के लागू होने, छात्रसंघ पदाधिकारियों के निलंबन और प्रस्तावित रोहित वेमुला एक्ट को लेकर था।
पुलिस ने विश्वविद्यालय के गेट पर बैरिकेडिंग कर छात्रों को रोक दिया, जिसके बाद झड़प हुई। पुलिस का दावा है कि इस दौरान कुछ कर्मियों को चोटें आईं। कुल 51 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका बाबू, पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार और संयुक्त सचिव दानिश अली शामिल थे।




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