मीनाक्षी का पर्चा रद्द, फ्लाइट कैंसिल, MLA वापस; एमपी RS चुनाव में कांग्रेस के साथ क्या-क्या हुआ?
Meenakshi Natarajan Nomination Rejected: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में दिनभर हाई-वोल्टेज ड्रामा चला। कांग्रेस क्रॉस वोटिंग के डर से विधायकों को बेंगलुरु भेजने की तैयारी कर रही थी, लेकिन उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होते ही पूरा खेल बदल गया।

Meenakshi Natarajan Nomination Rejected: मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में मंगलवार का दिन किसी पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म से कम नहीं रहा। सुबह तक कांग्रेस अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजकर तीसरी राज्यसभा सीट बचाने की प्लानिंग पर काम कर रही थी। चार्टर विमान तैयार था, विधायक एयरपोर्ट पहुंच चुके थे; क्योंकि पार्टी को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा था। लेकिन, शाम होते-होते पूरा खेल ही उलट गया। क्योंकि तब तक मध्य प्रदेश से कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने की खबर आ चुकी थी। अब हवा में ही बदल गई कांग्रेस की सारी प्लानिंग। क्योंकि, जिस चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से रणनीतियां बन रही थीं, उसका परिणाम वोटिंग से पहले ही लगभग तय हो गया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ जानिए पूरे दिन का सियासी घटनाक्रम।
- भाजपा ने तीसरा कैंडिडेट उतारा, तो कांग्रेस को सताने लगा डर
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। संख्या बल के हिसाब से भाजपा 2 सीटें आसानी से जीत सकती थी, जबकि कांग्रेस के पास अपनी 1 सीट सुरक्षित रखने लायक विधायक थे। लेकिन भाजपा ने राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के तौर पर उतारकर मुकाबले को अचानक रोमांचक बना दिया।
भाजपा के पास तीसरी सीट जिताने के लिए जरूरी वोट नहीं थे। उसके पास कुल जरूरी वोटों से 10 कम थे। ऐसे में कांग्रेस को इस बात का डर खाए जा रहा था कि उसके विधायकों में सेंध लगाने की कोशिश हो सकती है। यही वजह थी कि पार्टी ने अपने विधायकों को वोटिंग तक कर्नाटक भेजने की प्लानिंग बनाई थी।
- एयरपोर्ट पर कांग्रेस MLA और चार्टर विमान तैयार, लेकिन…
तय प्लान के मुताबिक, आज मंगलवार सुबह से कांग्रेस विधायक भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पहुंचने लगे थे। चार्टर विमान भी तैयार था। योजना थी कि सभी विधायकों को कांग्रेस शासित कर्नाटक भेज दिया जाए, ताकि किसी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना न रहे।
हालांकि विमान को उड़ान की अनुमति मिलने में देरी हुई और विधायक घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करते रहे। इसी दौरान विधानसभा में एक दूसरा राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा था। ये था- एमपी कांग्रेस की इकलौती राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को रद्द करना।
- विधानसभा में कांग्रेस-भाजपा विधायकों में हुई धक्का-मुक्की
दरअसल, भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की ओर से मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई गई। आरोप लगाया गया कि उन्होंने हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी। जैसे-जैसे सुनवाई आगे बढ़ी, विधानसभा परिसर में राजनीतिक हलचल बढ़ती गई। भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मौके पर पहुंच गए। दोनों दलों के नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। कई मौकों पर माहौल इतना गर्म हो गया कि धक्का-मुक्की और नोकझोंक की खबरें भी सामने आईं।
- शाम तक रहा सस्पेंस, फिर रद्द हुआ नामांकन
रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। कांग्रेस का कहना था कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, केवल एक नोटिस जारी हुआ था। इसलिए जानकारी छिपाने का सवाल ही नहीं उठता। दूसरी ओर भाजपा का दावा था कि आवश्यक जानकारी हलफनामे में नहीं दी गई और नामांकन नियमों के अनुरूप नहीं है। शाम करीब साढ़े छह बजे फैसले का इंतजार खत्म हुआ। रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया।
- हवा में ही बदल गई कांग्रेस की योजना
फैसले की खबर मिलते ही कांग्रेस की पूरी रणनीति ध्वस्त हो गई। जिन विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए कर्नाटक भेजा जा रहा था, उनकी यात्रा पर तुरंत पूर्ण विराम लग गया। पार्टी की ओर से तत्काल नई रणनीति पर विचार शुरू हुआ और विधायकों की प्रस्तावित शिफ्टिंग रोक दी गई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि जिस चुनाव को लेकर कांग्रेस कई दिनों से सतर्क थी, वह मुकाबला एक प्रशासनिक फैसले के बाद अचानक खत्म होता दिखाई देने लगा।
- कांग्रेस बोली- सीट चोरी, BJP ने कहा- न्याय की जीत
फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया। मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि भाजपा पहले "वोट चोरी" करना चाहती थी, लेकिन अब "सीट चोरी" करने लग गई है। पार्टी ने अदालत जाने का ऐलान किया है। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा नेताओं ने फैसले का स्वागत किया। भाजपा ने इसे नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीत बताया। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति ही ऐसी है कि उसके लोग खुद जानकारी बाहर पहुंचा रहे हैं।
- अगर कांग्रेस को नहीं मिली राहत, तो भाजपा की तीसरी जीत पक्की
अगर कांग्रेस को अदालत से राहत नहीं मिलती है तो मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में जिस तीसरी सीट को लेकर भाजपा को अतिरिक्त वोट जुटाने पड़ सकते थे, वह सीट अब बिना मतदान के ही उसके खाते में जाती दिख रही है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश का यह राज्यसभा चुनाव अब सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि "वोट चोरी बनाम सीट चोरी" की राजनीतिक बहस में बदल गया है।




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