एमपी में तलाकशुदा बेटियां भी होंगी पेंशन की हकदार, मोहन यादव कैबिनेट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश में अब विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के साथ अविवाहित बेटियां भी परिवार पेंशन की हकदार होंगी। कैबिनेट ने मंगलवार को नियमों में बदलाव को मंजूरी दे दी है। अब पिता की मृत्यु के बाद इन बेटियों को भी पेंशन मिल सकेगी।

मध्य प्रदेश में अब विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के साथ-साथ अविवाहित बेटियां भी परिवार पेंशन के लिए योग्य होंगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मंगलवार को हुई बैठक में मध्य प्रदेश परिवार पेंशन नियमों में बदलावों को मंजूरी दे दी है। अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां भी अपने पिता की मौत के बाद परिवार पेंशन की हकदार होंगी।
विधवा, तलाकशुदा और अविवाहित बेटियों को पेंशन
एक अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट ने विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अविवाहित बेटियों को पारिवारिक पेंशन का पात्र बनाने का फैसला किया है। मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम- 2026 के नियम-44 के तहत अब इन महिलाओं को भी पारिवारिक पेंशन के हकदार सदस्यों में शामिल कर लिया गया है।
बड़ी संख्या में महिलाओं को फायदा
इस फैसले से बड़ी संख्या में ऐसी महिलाओं को फायदा होगा जो तलाक के बाद माता-पिता पर निर्भर हैं। अब तक तलाकशुदा बेटियां पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं थीं। इस कदम से बेसहारा महिलाओं को लाभ होगा। समाज के एक जरूरतमंद वर्ग को सुरक्षा मिलेगी।
एक अप्रैल होंगे लागू
आधिकारिक बयान के अनुसार, कैबिनेट ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का क्रियान्वयन) नियम- 2026 और मध्य प्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत ग्रेच्युटी का भुगतान) नियम- 2026 को मंजूरी दे दी है। ये नियम एक अप्रैल 2026 से लागू होंगे। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और ई-सेवा पुस्तिका संबंधी प्रावधान भी किया गया है।
नेशनल पेंशन सिस्टम पर भी फैसला
इसके साथ ही नेशनल पेंशन सिस्टम को लागू करने का तरीका, योगदान की दर, देरी होने पर जिम्मेदारी तय करना और रिटायरमेंट, स्वैच्छिक रिटायरमेंट, इस्तीफे और मौत के मामलों में बाहर निकलने के नियम बनाए गए हैं। बयान के अनुसार, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के दायरे में आने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट होगी।
कर्मचारियों को टेक्निकल कैडर की भर्ती में छूट
यही नहीं कैबिनेट ने हाई कोर्ट और जिला अदालतों के आईटी कैडर में काम करने वाले कर्मचारियों को टेक्निकल कैडर की भर्ती में शामिल होने के लिए उम्र सीमा में एक बार के लिए 5 साल की छूट दी है। फिलहाल सामान्य श्रेणी के लिए उम्र सीमा 40 साल और आरक्षित श्रेणी के लिए 45 साल तय की गई है।




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