Madhya pradesh HC says Oral anal sex between husband and wife not crime in 377 पति-पत्नी के बीच इस तरह का यौन संबंध अपराध नहीं; अदालत ने कही बड़ी बात, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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पति-पत्नी के बीच इस तरह का यौन संबंध अपराध नहीं; अदालत ने कही बड़ी बात

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में पत्नी-पत्नी के बीच विवाद के केस में एक अहम फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि रेप की विस्तारित परिभाषा में पत्नि-पत्नी के बीच इस तरह के संबंध को अपवाद माना गया है।

Thu, 26 March 2026 10:22 PMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल
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पति-पत्नी के बीच इस तरह का यौन संबंध अपराध नहीं; अदालत ने कही बड़ी बात

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में पत्नी-पत्नी के बीच विवाद के केस में एक अहम फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि पति-पत्नी के बीच यौन संबंध, जिनमें ओरल या एनल सेक्स भी शामिल है, भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत 'अप्राकृतिक अपराध' के दायरे में नहीं आते हैं। 25 मार्च के आदेश में जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने कहा कि यौन अपराधों से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत पति-पत्नी के बीच ऐसे संबंधों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने यह टिप्पणी उस पति की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए की, जिस पर पत्नी ने अप्राकृतक यौन संबंधों के आरोप लगाए हैं। महिला ने अपने पति के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों जैसे सास, ससुर और ननद पर भी कई आरोप लगाए हैं।

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महिला ने आरोप लगाया कि शादी के समय सोने के गहने और अन्य सामानों समेत 4 लाख मूल्य का दहेज दिया गया था। लेकिन बाद में पति के परिवार ने 6 लाख रुपये अतिरिक्त और बुलेट मोटरसाइकल की मांग की। महिला ने ससुराल के लोगों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए यह भी दावा किया कि पत्नी उसे जबरन ऐसे सेक्सुअल ऐक्ट करने के लिए दबाव डालता था जिससे उसे बेहद पीड़ा से गुजरना पड़ता था।

इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की कई धाराओं में केस दर्ज किया जिसमें 377 (अप्राकृतिक अपराध) भी शामिल था। इसके बाद पति ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने व परिजनों के खिलाफ दर्ज केस को रद्द करने की मांग की। पति के वकील ने दलील दी कि आरोप बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए हैं और गुजराता भत्ता की मांग के दौरान दिए गए बयानों से अलग हैं। उन्होंने आगे यह भी कहा कि पति-पत्नी के बीच यौन संबंधों में धारा 377 नहीं लगाई जा सकती है।

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पति-पत्नी संबंध अपवाद

हाई कोर्ट ने आपराधिक कानून में 2013 के संशोधनों के बाद यौन अपराधों से संबंधित कानूनी स्थिति का परीक्षण किया। इन संशोधनों के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में बलात्कार की परिभाषा का विस्तार किया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार की के पेनिट्रेशन जैसे ओरल और एनल को भी शामिल किया गया। हालांकि, अदालत ने कहा कि कानून में एक अपवाद है, जिसे आमतौर पर 'वैवाहिक बलात्कार अपवाद' कहा जाता है। यह कहता है कि यदि पत्नी नाबालिग नहीं है तो पति द्वारा पत्नी से बनाया गया संबंध बलात्कार नहीं है।

अदालत ने और क्या कहा?

अदालत ने नवतेज सिंह जोहार बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2018) केस का संदर्भ देते हुए अदालत ने कहा, 'आईपीसी की धारा 375 के अपवाद 2 के आलोक में पति और पत्नी (यदि नाबालिग ना हो) के बीच यौन संबंध बलात्कार नहीं है।'अदालत ने आगे कहा, 'इस तरह के कृत्य बलात्कार की विस्तारित परिभाषा में आते हैं, लेकिन लेकिन विवाह के भीतर उन्हें अपवाद के रूप में छूट दी गई है, इसलिए उन्हें अलग से भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत अभियोजित नहीं किया जा सकता।' अदालत ने ऐसा कहते हुए पति के खिलाफ लगाए गए धारा 377 को रद्द कर दिया। अदालत ने ननद के खिलाफ आरोपों में दम नहीं देखते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई पर भी रोक लगा दी। हालांकि, अदालत ने पति, ससुर और सास के खिलाफ अन्य आरोपों को खत्म करने से इनकार कर दिया।

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