indore Mosque controversy collector ordered to vacate illegal encroachment इंदौर में मस्जिद को लेकर विवाद, 300 की अनुमति पर 30 हजार वर्गफीट निर्माण; कब्जा हटाने के आदेश, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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इंदौर में मस्जिद को लेकर विवाद, 300 की अनुमति पर 30 हजार वर्गफीट निर्माण; कब्जा हटाने के आदेश

एमपी के इंदौर के एमवायएच और सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के पास स्थित मस्जिद को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। तहसीलदार कोर्ट ने माना है कि वर्ष 1985 में जिस मस्जिद को निर्माण की अनुमति दी गई थी, उसका क्षेत्रफल केवल 300 वर्गफीट था।

Sun, 22 Feb 2026 11:18 AMMohammad Azam लाइव हिन्दुस्तान, इंदौर
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इंदौर में मस्जिद को लेकर विवाद, 300 की अनुमति पर 30 हजार वर्गफीट निर्माण; कब्जा हटाने के आदेश

इंदौर के एमवायएच और सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के पास स्थित मस्जिद को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। तहसीलदार कोर्ट ने माना है कि वर्ष 1985 में जिस मस्जिद को निर्माण की अनुमति दी गई थी, उसका क्षेत्रफल केवल 300 वर्गफीट था। इसके बाद करीब 30 हजार वर्गफीट शासकीय जमीन पर अतिरिक्त निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है।

तहसीलदार ने बताया अवैध कब्जा

तहसीलदार कमलेश कुशवाह ने अपने आदेश में कहा है कि अनसर्वेड रेसीडेंसी एरिया के ब्लॉक 11 और 12 में मस्जिद और मुसाफिरखाने के अलावा किया गया निर्माण अनधिकृत कब्जा है। मूल मस्जिद संरचना को छोड़कर बाउंड्रीवाल और अन्य अवैध निर्माण तीन दिन के भीतर स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर आरआई और पटवारी को बेदखली की कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।

नजूल रिकॉर्ड में शासकीय भूमि दर्ज

एसडीएम प्रदीप सोनी के मुताबिक, जूनी इंदौर तहसील क्षेत्र के ब्लॉक नंबर 12 (नए सर्वे में ब्लॉक नंबर 38) में स्थित यह जमीन 0.70 एकड़ क्षेत्रफल की है। नजूल रिकॉर्ड में यह भूमि शासकीय दर्ज है। नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार 9 सितंबर 1985 को केवल 300 वर्गफीट में मस्जिद निर्माण की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने निगम और पटवारी की रिपोर्ट सहित उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कराई। जांच में यह भी सामने आया कि प्रारंभिक निर्माण छोटा था, जिसकी पुष्टि गूगल सैटेलाइट इमेज से भी होती है।

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‘सीआरपी लाइन’ शब्द बाद में जोड़ा गया

मामले में प्रस्तुत दस्तावेज की जांच में पाया गया कि ‘सीआरपी लाइन’ शब्द अलग हैंडराइटिंग से बाद में जोड़ा गया था। कोर्ट ने कहा कि इससे भूमि स्वामित्व का कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होता। आदेश में स्पष्ट किया गया कि मूल मस्जिद की आड़ में बाउंड्रीवाल और विस्तार कर किया गया निर्माण बिना अनुमति शासकीय भूमि पर किया गया है। हालांकि, मुसाफिरखाने के निर्माण को लेकर कोर्ट ने कहा कि इसकी अनुमति नगर निगम के भवन अधिकारी ने कलेक्टर की अनापत्ति के आधार पर दी थी। इस संबंध में नियमानुसार अलग से पत्र जारी किया जाएगा।

वक्फ बोर्ड और मस्जिद अध्यक्ष का दावा

मामले में अनावेदक सैयद शाहिर अली (मस्जिद अध्यक्ष, सदर अंजुमन इस्ला-उल-मुस्लेमिन) और वक्फ बोर्ड ने दावा किया है कि जमीन वर्ष 1967 से मस्जिद और इंदौर वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज है। कलेक्टर द्वारा वर्ष 1994 में इस भूमि पर अनापत्ति दिए जाने का भी हवाला दिया गया है। उनका कहना है कि मस्जिद का क्षेत्रफल करीब 40 हजार वर्गफीट है और इसके नाम पर 80 लाख रुपए का लोन भी स्वीकृत है।

जांच में गड़बड़ियां, कार्रवाई के निर्देश

जांच में कई तरह की अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि क्षेत्रीय एसडीएम और तहसीलदार को जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, सरकारी जमीनों को संरक्षित करने के लिए अन्य मामलों की भी जिला प्रशासन स्तर पर जांच जारी है।

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