जेल में दोस्ती,बाहर आकर बनाया गैंग; श्वेता-अलका ने नेताओं और कारोबारियों को ऐसे किया हनीट्रैप
इंदौर के चर्चित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग कांड की पुलिस जांच में सामने आया है कि श्वेता जैन और अलका दीक्षित की दोस्ती जिला जेल में हुई थी। अलका दीक्षित शराब तस्करी से जुड़ी थी। जांच में एक पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी के भी नाम सामने आए हैं।

इंदौर के चर्चित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग कांड में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने वाले गैंग की मास्टरमाइंड भोपाल निवासी श्वेता विजय जैन बताई जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि श्वेता और शराब तस्करी से जुड़ी अलका दीक्षित की दोस्ती जिला जेल में हुई थी और वहीं से पूरे हनीट्रैप नेटवर्क की पटकथा तैयार हुई।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर नेताओं, कारोबारियों और रसूखदार लोगों को जाल में फंसाकर ब्लैकमेलिंग और उगाही का धंधा शुरू कर दिया। पुलिस का दावा है कि यह गैंग पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और कई हाईप्रोफाइल लोगों को अपना शिकार बना चुका है। हालांकि बदनामी के डर से कई पीड़ित सामने नहीं आ रहे हैं।
छह दिन की पुलिस रिमांड पर आरोपी
डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के मुताबिक, मंगलवार को श्वेता जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और जितेंद्र पुरोहित को कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने सभी आरोपियों को छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पूछताछ में श्वेता जैन ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2019 के चर्चित हनीट्रैप मामले में जेल के दौरान उसकी मुलाकात अलका दीक्षित से हुई थी। उस समय अलका शराब तस्करी के मामले में जेल में बंद थी। दोनों की दोस्ती वहीं हुई और जमानत के बाद भी संपर्क लगातार बना रहा।
'फंसाओ और वसूली करो' बना गैंग का तरीका
पुलिस जांच में सामने आया है कि अलका पहले से अनैतिक गतिविधियों और शराब तस्करी से जुड़ी रही है। आरोप है कि श्वेता के इशारे पर अलका ने लोगों को जाल में फंसाना शुरू किया और फिर फोटो-वीडियो के जरिये ब्लैकमेल कर रकम वसूली जाती थी। जांच अधिकारियों के अनुसार यह गैंग नेताओं, कारोबारियों और रसूखदार लोगों को टारगेट करता था। पुलिस को शक है कि 2019 के हनीट्रैप कांड से जुड़े कुछ लोग भी इस नए नेटवर्क के संपर्क में रहे हैं।
भाजपा पदाधिकारी बताकर करता था शिकार की तलाश
पुलिस के अनुसार आरोपी लाखन चौधरी मूल रूप से खंडवा-पीथमपुर क्षेत्र का रहने वाला है और खुद को भाजपा पदाधिकारी बताता था। वह प्रॉपर्टी कारोबार की आड़ में लोगों से संपर्क करता और संभावित शिकार तलाशता था। जांच में यह भी सामने आया है कि हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर को फंसाने के बाद अलका ने इंटेलिजेंस शाखा में तैनात हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा से सलाह ली थी। आरोप है कि अलका ने कारोबारी के फोटो भी पुलिसकर्मी को भेजे थे।
पुलिसकर्मी और कथित मीडियाकर्मी की भूमिका भी जांच में
पूछताछ में हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा ने अलका से संपर्क होने की बात स्वीकार की है। पुलिस को शक है कि वह आरोपियों को ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाने के तरीके बता रहा था। वहीं, देवास निवासी जितेंद्र पुरोहित, जो खुद को मीडियाकर्मी बताता था, उसका नाम भी जांच में सामने आया है। पुलिस का कहना है कि जितेंद्र ने भी कथित तौर पर अलका को पीड़ितों से रकम वसूलने के तरीके बताए और पूरे षड्यंत्र में शामिल हो गया।
कई बड़े नाम सामने आने की आशंका
क्राइम ब्रांच अब आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट, सोशल मीडिया कनेक्शन और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि आने वाले दिनों में कई हाईप्रोफाइल नाम सामने आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार कई कारोबारी और राजनीतिक लोग गैंग के संपर्क में थे, लेकिन बदनामी के डर से शिकायत दर्ज नहीं करवा रहे हैं।
रिपोर्ट - हेमंत




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