इंदौर के हनीट्रैप में रेशू चौधरी को हिरासत में लिया गया, DIG साहब भी बन चुके शिकार!
हनीट्रैप की जांच का दायरा नेताओं, कारोबारियों और पुलिस अफसरों तक पहुंच गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गैंग कथित तौर पर हाईप्रोफाइल लोगों को जाल में फंसाकर उनके आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड करता था।

इंदौर के चर्चित हनीट्रैप मामले में क्राइम ब्रांच की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस मामले में सागर की रेशू चौधरी को भी हिरासत में लिया गया है, जो पूर्व में भाजपा से जुड़ी हुई बताई जा रही है। वहीं, हनीट्रैप की जांच का दायरा नेताओं, कारोबारियों और पुलिस अफसरों तक पहुंच गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गैंग कथित तौर पर हाईप्रोफाइल लोगों को जाल में फंसाकर उनके आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड करता था और बाद में ब्लैकमेलिंग के जरिए मोटी रकम वसूली जाती थी।
मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह सामने आया है कि गैंग की पहुंच छत्तीसगढ़ में पदस्थ एक DIG स्तर के अधिकारी तक भी थी। सूत्रों के अनुसार रेशू चौधरी ने इंदौर के एक होटल में मुलाकात के दौरान कथित तौर पर उस अधिकारी का वीडियो बनाया था। हालांकि पुलिस ने अब तक किसी अधिकारी के नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन मोबाइल से मिले डिजिटल डेटा और वीडियो ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस रेशू से पूछताछ कर रही है।
श्वेता जैन की करीबी निकली रेशू
पुलिस के अनुसार रेशू चौधरी, हनीट्रैप मामले की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन की करीबी सहयोगी है। जांच में सामने आया कि 2019 के चर्चित हनीट्रैप कांड के बाद श्वेता ने रेशू को अपने नेटवर्क में शामिल किया था। इसी दौरान जेल में श्वेता की दोस्ती अलका दीक्षित से हुई और वहीं से पूरे नेटवर्क का विस्तार शुरू हुआ। सूत्रों के मुताबिक श्वेता कोर्ट पेशी के दौरान रेशू को साथ लेकर अलका दीक्षित से मिलने जाती थी। बाद में तीनों ने मिलकर कथित तौर पर बड़े कारोबारियों, नेताओं और अफसरों को टारगेट करना शुरू किया।
शराब कारोबारी केस से खुला पूरा राज
शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर को धमकाने और ब्लैकमेल करने के मामले में रेशू चौधरी का नाम सामने आया था। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने पूछताछ कर उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच में पुलिस को जानकारी मिली कि रेशू खुद दावा करती थी कि उसके संपर्क कई नेता, प्रॉपर्टी कारोबारी, शराब व्यवसायी, फाइनेंसर और सरकारी अफसरों से हैं, जिन्हें आसानी से फंसाया जा सकता है।
हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल और फर्राटेदार अंग्रेजी से बनाती थी संपर्क
जांच एजेंसियों के मुताबिक रेशू सागर में अपनी मां के पास रहती थी, लेकिन पार्टी और शासकीय कामकाज के बहाने लगातार भोपाल और इंदौर आती-जाती रहती थी। उसकी फर्राटेदार अंग्रेजी, हाईप्रोफाइल अंदाज और राजनीतिक संपर्कों के कारण वह आसानी से नेताओं और अफसरों के करीब पहुंच जाती थी। पुलिस का दावा है कि इसके बाद कथित तौर पर खुफिया कैमरों और मोबाइल रिकॉर्डिंग के जरिए वीडियो तैयार किए जाते थे।
इंटेलिजेंस शाखा का प्रधान आरक्षक भी जांच के घेरे में
मामले में इंटेलिजेंस शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा की भूमिका भी जांच के दायरे में बनी हुई है। पुलिस ने अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं की है, लेकिन उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार विनोद शर्मा के मोबाइल की फोरेंसिक जांच करवाई जा रही है। आरोप है कि गैंग द्वारा बनाए गए कुछ वीडियो और फोटो उसके मोबाइल पर भी फॉरवर्ड किए गए थे।
देवास कनेक्शन और डिजिटल जांच
जांच में देवास निवासी जितेंद्र पुरोहित का नाम भी सामने आया है, जो कथित तौर पर अलका दीक्षित के संपर्क में था। क्राइम ब्रांच अब आरोपियों के मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और डिजिटल डेटा की गहन जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
पुलिस ने क्या कहा?
डीसीपी राजेश त्रिपाठी क्राइम ने बताया कि एक रियल एस्टेट के बिजनेसमैन को दीक्षित और उसके साथियों ने मिलकर रियल स्टेट के बिजनेस में समझौते के लिए दबाव डाला। एग्रीमेंट न होने पर उन्हें ₹1 करोड़ देने को कहा। धमकी दी थी कि अगर ऐसा नहीं किया तो फोटो-वीडियो सार्वजनिक किए जाएंगे जिनसे वह समाज में रहने लायक नहीं रहेंगे। जान से मारने की धमकी भी दी। ब्लैकमेलिंग का केस रजिस्टर किया गया था। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की गई थी। बाद में दो आरोपियों का नाम सामने आया। रेशू चौधरी और पुलिस आरक्षक विनोद शर्मा से पूछताछ चल रही है। यदि उनकी भी संलिप्तता पाई जाती है तो गिरफ्तारी की जाएगी। रेशु चौधरी श्वेता और अलका से जुड़ी हुई थी।
रिपोर्ट- हेमंत




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