इंदौर में छात्राओं को गलत राह पर धकेलने वाली छात्रा सस्पेंड; बैग से मिला आपत्तिजनक सामान, मचा हड़कंप
विश्वविद्यालय प्रशासन अब कॉल डिटेल, डिजिटल गतिविधियों और संपर्कों की गहन जांच कर रहा है। खुद कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए साफ कहा है कि, छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इंदौर के प्रतिष्ठित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले संस्थानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस गर्ल्स हॉस्टल को अभिभावक अपनी बेटियों के लिए सुरक्षित समझते हैं, वहां एक ऐसा खेल चल रहा था, जिसे जानने के बाद हर जिम्मेदार नागरिक को गुस्सा आ रहा है।
पांच छात्राओं ने प्रबंधन से की शिकायत
इस पूरे मामले का खुलासा उस वक्त हुआ, जब फर्स्ट ईयर की पांच छात्राओं ने हिम्मत जुटाकर इस मामले की शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा लगातार उन पर बॉयफ्रेंड बनाने का दबाव बना रही है। वह लड़की अन्य लड़कियों को बॉयफ्रेंड बनाकर लाइफ एंजॉय करने के लिए उकसाती थी। वह कहती थी, तुम बॉयफ्रेंड नहीं बना सकती तो मैं ऐप से बनवा दूंगी। लड़कियों ने बताया कि ये कोई दोस्ताना सलाह नहीं थी, बल्कि लगातार मानसिक दबाव था। इतना ही नहीं, वह छात्रा अक्सर दूसरी लड़कियों से सिगरेट और लाइटर मंगवाती, हॉस्टल के कमरे में घंटों वीडियो कॉल पर लड़कों से अश्लील बातचीत करती और बाकी छात्राओं को भी उसी राह पर धकेलने की कोशिश करती रहती।
आरोपी लड़की के बैग से जो मिला, उसने उड़ाए होश
जांच कमेटी ने जब दस अन्य छात्राओं के मौखिक बयान लिए, तो तस्वीर और भी साफ हो गई। सभी ने एक सुर में कहा उसका व्यवहार अनुचित था, वह लगातार लड़कियों को उकसा रही थी। लेकिन असली झटका तब लगा जब बैग की तलाशी में बेहद आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद हुआ। ऐसा सामान, जो भारत में प्रतिबंधित श्रेणी में आता है। जांच टीम के होश उड़ गए। क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत विकृति है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश? मामला यहीं नहीं रुकता। छात्रा कथित तौर पर एक ‘ऐप’ के जरिए लड़कों से संपर्क कराने की बात कर रही थी। कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि आरोपी छात्रा पश्चिम बंगाल की रहने वाली है और डाटा साइंस विभाग की स्टूडेंट है।
आरोपी छात्रा को हफ्ते भर में कमरा खाली करने का निर्देश
विश्वविद्यालय प्रशासन अब कॉल डिटेल, डिजिटल गतिविधियों और संपर्कों की गहन जांच कर रहा है। खुद कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए साफ कहा है कि, छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने के बाद छात्रा को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है और एक सप्ताह में कमरा खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। साथ ही उसके परिजनों को भी सूचना दे दी गई है।
डाटा साइंस विभाग की है छात्रा, पढ़ने में भी तेज
प्रशासन की नजर अब छात्रा की हर गतिविधि पर है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि वह डाटा साइंस विभाग की मेधावी छात्रा बताई जा रही है। पढ़ाई में तेज, लेकिन आचरण बेहद आपत्तिजनक। यही विरोधाभास पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है। सबसे बड़ा सवाल आखिर क्यों वह अन्य धर्म की लड़कियों को खास तौर पर निशाना बना रही थी? क्या यह महज व्यक्तिगत सोच थी या किसी बड़े एजेंडे का हिस्सा?
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन हर एंगल से जांच में जुटा है। अगर आगे अन्य तथ्य सामने आते हैं, तो छात्रा पर विश्वविद्यालय से भी निष्कासन की तलवार भी लटक रही है। यह मामला सिर्फ एक छात्रा का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो माता-पिता अपने बच्चों को उच्च शिक्षा संस्थानों में भेजते समय करते हैं। अगर हॉस्टल के कमरे साजिश के अड्डे बनेंगे, तो फिर सुरक्षा का दावा किस आधार पर किया जाएगा? इंदौर का यह मामला अब सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि व्यवस्था की सतर्कता की परीक्षा बन चुका है।
रिपोर्ट...हेमंत




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