बर्फ बेचकर परिवार का पेट पालते, अब श्रीलंका में खेलेंग क्रिकेट; शाहिद खान की संघर्ष भरी कहानी
शाहिद खान अब श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित होने वाले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस टूर्नामेंट में भारत के साथ श्रीलंका और नेपाल की टीमें भी हिस्सा लेंगी।

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के एक छोटे से गांव ललपुर में रहने वाले 32 वर्षीय शाहिद खान ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ा मुकाम हासिल किया है। उनका चयन भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में हुआ है। इसके चलते वे अब श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित होने वाले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस टूर्नामेंट में भारत के साथ श्रीलंका और नेपाल की टीमें भी हिस्सा लेंगी।
बर्फ बेचकर परिवार का पेट पालते
शाहिद खान का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने कभी अपने सपनों को नहीं छोड़ा। वे बर्फ बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं। उनके पिता लाल खान मजदूरी का काम करते हैं और परिवार का गुजारा बड़ी मुश्किल से होता है।
शाहिद आज भी एक कच्चे मकान में रहते हैं, जहां सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपने खेल को निखारा। सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते हुए इस मुकाम तक पहुंचे।
शाहिद एक मीडियम फास्ट गेंदबाज हैं
शाहिद खान एक मीडियम फास्ट गेंदबाज हैं, जो अपनी सटीक लाइन-लेंथ और नियंत्रित गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। भारतीय पैरा क्रिकेट टीम के सचिव संतोष गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि शाहिद एक उभरते हुए प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और टीम में उनका चयन उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शाहिद आगामी मैचों में बेहतर प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करेंगे।
गांव में छाया खुशी का माहौल
शाहिद के चयन की खबर मिलते ही पूरे ललपुर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने इसे गांव के लिए गर्व का क्षण बताया। शाहिद के पिता लाल खान ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है और यह पूरे गांव के लिए सम्मान की बात है कि उनका बेटा देश के लिए खेलने जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शाहिद की सफलता से गांव के युवाओं को प्रेरणा मिलेगी और वे भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
अधिकारियों की उदासीनता पर उठे सवाल
जहां एक ओर शाहिद की उपलब्धि पर गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक उदासीनता भी सामने आई है। चयन के बाद शाहिद खान जब छतरपुर कलेक्ट्रेट अधिकारियों से मिलने पहुंचे, तो उन्हें समय नहीं दिया गया और न ही उनसे मुलाकात की गई।
इस संबंध में कलेक्ट्रेट से संपर्क करने पर अधिकारियों ने जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि वे संबंधित अधिकारी (सीओ) से जानकारी प्राप्त करेंगे। इस रवैये को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
अब देश के लिए दिखाएंगे दम
शाहिद खान अब कोलंबो में होने वाले टी-20 मुकाबलों में अपनी गेंदबाजी का दम दिखाने के लिए तैयार हैं। क्षेत्र के लोगों को उनसे बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद है। शाहिद की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे छतरपुर जिले और मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है। उनका संघर्ष और सफलता की कहानी युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरी है।




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