HC Takes Strict Stance on Disrespect to Vande Mataram, Notices Issued to Two Indore Corporators राष्ट्रीय गीत के अपमान को लेकर हाई कोर्ट का सख्त रुख, इंदौर की दो पार्षदों को जारी किया नोटिस, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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राष्ट्रीय गीत के अपमान को लेकर हाई कोर्ट का सख्त रुख, इंदौर की दो पार्षदों को जारी किया नोटिस

याचिकाकर्ता ने स्वयं न्यायालय के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि वर्तमान में सरकारी व सार्वजनिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन के दौरान आचरण और अनुशासन को लेकर कोई स्पष्ट एवं प्रभावी कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं है।

Thu, 16 April 2026 05:47 PMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, इंदौर, मध्य प्रदेश
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राष्ट्रीय गीत के अपमान को लेकर हाई कोर्ट का सख्त रुख, इंदौर की दो पार्षदों को जारी किया नोटिस

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की गरिमा और सार्वजनिक मंचों पर उसके गायन के दौरान आचरण को लेकर उठे विवाद ने अब कानूनी रूप ले लिया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में इस संबंध में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवरथी की खंडपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई में इंदौर नगर निगम से जुड़े विवाद को गंभीर मानते हुए संबंधित पार्षदों रूबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

विवाद के बाद बढ़ा मामला

यह कानूनी कार्यवाही इंदौर नगर निगम की एक हालिया घटना के बाद शुरू हुई है, जहां राष्ट्रीय गीत के दौरान हुए विवाद ने प्रदेश भर का ध्यान खींचा था। दरअसल, हाल ही में इंदौर नगर निगम के एक कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर विवाद सामने आया था, जिसने प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी। इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर यह जनहित याचिका दायर की गई है।

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स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग

याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता योगेश हेमनानी ने स्वयं न्यायालय के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि वर्तमान में सरकारी व सार्वजनिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन के दौरान आचरण और अनुशासन को लेकर कोई स्पष्ट एवं प्रभावी कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं है। ऐसे में उन्होंने न्यायालय से आग्रह किया कि राष्ट्रीय गीत की गरिमा बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया जाए, जिससे सभी सार्वजनिक मंचों पर एक समान मर्यादा का पालन सुनिश्चित हो सके।

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संविधान का दिया हवाला

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 51A का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि प्रत्येक नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य है कि वह राष्ट्र के आदर्शों, प्रतीकों और संस्थाओं का सम्मान करे। ऐसे में जनप्रतिनिधियों सहित सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए यह जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

सरकार से भी मांगा जवाब

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन के प्रमुख सचिव, गृह विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों को भी नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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भविष्य के लिए अहम पहल

इस जनहित याचिका के माध्यम से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि भविष्य में किसी भी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत के दौरान अनुशासनहीनता की स्थिति उत्पन्न न हो और उसकी गरिमा एवं पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे।

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