बाघों के लिए 'डेथ जोन' बना देश का यह अभयारण्य? ढाई महीने में आठ टाइगरों की मौत ने चौंकाया
याचिका में राज्य में बाघों के शिकार को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने, विशेषज्ञों की सिफारिशों को तुरंत लागू करने और संबंधित अधिकारियों के बीच तालमेल स्थापित करने के निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है।

मध्यप्रदेश का बांधवगढ़ अभयारण्य बाघों के लिए 'डेथ जोन' बनता जा रहा है। यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि इस बात का खुलासा राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बांधवगढ़ अभयारण्य में साल 2025 के अंत और 2026 के शुरुआती कुल ढाई महीने की अवधि की दौरान आठ बाघों की मौत हुई है। इनमें से चार बाघों की मौत करंट लगने से हुई है। बांधवगढ़ के क्षेत्र निदेशक द्वारा प्रस्तुत इस स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि बाघ अभयारण्य के भीतर चार बाघों की मौत हुई है जबकि इतने ही बाघों ने 'सामान्य वन क्षेत्र' में अपनी जान गंवाई है।
74 दिनों में गई 8 बाघों की जान
रिपोर्ट के अनुसार, बांधवगढ़ अभयारण्य में पिछले साल 21 नवंबर से इस साल 2 फरवरी के बीच आठ बाघों की मौत हुई है। रिपोर्ट में मौत की वजह बताते हुए कहा गया कि अभयारण्य के भीतर हुई सभी चार बाघों की मौत का कारण प्राकृतिक था, जबकि सामान्य वन क्षेत्र में जिन चार बाघों की मौत हुई, वह बिजली का करंट लगने से मारे गए। यह रिपोर्ट उस याचिका के जवाब में दाखिल की गई, जिसमें मध्यप्रदेश के जंगलों में संदिग्ध परिस्थितियों में बाघों की मौत होने का दावा किया गया है।
25 मार्च को होगी मामले की अगली सुनवाई
यह रिपोर्ट बुधवार को उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ में सौंपी गई। इसमें कहा गया कि अभयारण्य के अंदर आपसी संघर्ष के कारण दो बाघों की मौत हो गई जबकि एक की मौत कुएं में डूबने से हुई और एक ने बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। वहीं रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अभयारण्य से प्राप्त रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 25 मार्च के लिए निर्धारित की।
करंट लगने से हुई 4 बाघों की मौत
रिपोर्ट में बिजली का करंट लगने से वन क्षेत्र के अंदर चार बाघों की मौत होना बताया गया है। साथ ही वन क्षेत्र के कोर और बफर जोन के अंदर बिजली लाइनों का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली के तारों को सुव्यवस्थित करने और अभयारण्य के संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण मानकों का पालन करने के लिए समय-समय पर बिजली विभाग को पत्र भेजे गए हैं। इस रिपोर्ट में अभयारण्य में होने वाली गश्त के संबंध में भी जानकारी दी गई तथा सरकार ने मुख्य याचिका पर जवाब भी दाखिल किया।
पिछले साल राज्य में गई 45 बाघों की जान: याचिकाकर्ता
भोपाल के वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने यह याचिका दायर की है। याचिका में 'टाइगर स्टेट' मध्यप्रदेश में बाघों का जीवन असुरक्षित होने का दावा करते हुए कहा गया है कि सिर्फ साल 2025 में ही राज्य में सबसे ज्यादा 54 बाघों की मौत हुई है। याचिका में उन्होंने कहा कि 'प्रोजेक्ट टाइगर' की शुरुआत के बाद से एक साल में सबसे ज्यादा बाघों की मौत हुई है और इनमें से 57 प्रतिशत की मौत का कारण अप्राकृतिक है।
हाईकोर्ट ने याचिका को गंभीरता से लिया
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए केन्द्र और राज्य सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग से तथा NTCA से जवाब तलब किया था। याचिका में राज्य में बाघों के शिकार को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने, विशेषज्ञों की सिफारिशों को तुरंत लागू करने और संबंधित अधिकारियों के बीच तालमेल स्थापित करने के निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है।
देश के कुल बाघों में से 25 प्रतिशत बाघ MP में हैं
इस याचिका में कहा गया है कि दुनिया में बाघों की कुल आबादी 5,421 है, जिसमें से भारत में 3167 बाघ हैं। इसमें कहा गया है इनमें से लगभग 25 प्रतिशत आबादी यानी 785 बाघ मध्यप्रदेश में हैं। दुबे ने याचिका में कहा कि 'टाइगर स्टेट' होने के बावजूद साल 2025 में मध्यप्रदेश में 54 बाघों की मौत हुई है जबकि इससे पहले साल 2022 में 43, साल 2023 में 45 और साल 2024 में 46 बाघों की जान प्रदेश में गई थी।
याचिका में कहा गया है कि इन मौतों में 57 प्रतिशत मौतें अप्राकृतिक मानी जाती हैं, जिनमें आपसी संघर्ष, करंट लगना या अनजान हालात जैसे कारण होते हैं। दुबे ने बताया कि इस साल के पहले सप्ताह में ही राज्य में छह बाघों की मौत हो गई।
भारत ने देश में बाघों की घटती आबादी की रक्षा और वृद्धि के लिए 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' शुरू किया था। मध्यप्रदेश में कान्हा, पेंच, बांधवगढ़, पन्ना, सतपुड़ा, संजय-धुबरी, वीरांगना, दुर्गावती, रातापानी और माधव सहित नौ बाघ अभयारण्य हैं।




साइन इन