Female Police Officer Knew Military Officer Was Married, Yet she...; HC Quashes FIR पुलिसकर्मी महिला को पता था सैन्य अधिकारी शादीशुदा है, फिर भी संबंध बनाए; HC ने रद्द की FIR, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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पुलिसकर्मी महिला को पता था सैन्य अधिकारी शादीशुदा है, फिर भी संबंध बनाए; HC ने रद्द की FIR

कोर्ट के अनुसार, यदि कोई संबंध इतने लंबे समय तक चलता है और महिला को पुरुष की वैवाहिक स्थिति की जानकारी होने के बाद भी अगर वह लगातार जारी रहता है, तो इसे 'सहमति' माना जाएगा, न कि दुष्कर्म।

Sun, 15 March 2026 11:52 AMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, जबलपुर, मध्य प्रदेश
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पुलिसकर्मी महिला को पता था सैन्य अधिकारी शादीशुदा है, फिर भी संबंध बनाए; HC ने रद्द की FIR

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की FIR और चार्जशीट को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि 13 सालों तक चले लंबे संबंधों को केवल 'शादी के वादे' के आधार पर दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ ने मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में पदस्थ महिला आरक्षक की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

दरअसल भोपाल पुलिस विभाग में पदस्थ एक महिला आरक्षक ने सेना के अधिकारी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने खुद को अविवाहित बताते हुए उनसे सम्पर्क किया और शादी का झांसा देकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए। महिला का दावा था कि अधिकारी ने लंबे समय तक उसे धोखे में रखा।

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आरोप अदालत में टिकने योग्य नहीं

अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता खुद पुलिस विभाग में कार्यरत है, इसलिए यह तर्क देना कि उसे 'धोखे में रखकर' संबंध बनाए गए, कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। एक पुलिसकर्मी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह कानून और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो।

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'इसे सहमति माना जाएगा, न कि दुष्कर्म'

कोर्ट के अनुसार, यदि कोई संबंध इतने लंबे समय (13 साल) तक चलता है और महिला को पुरुष की वैवाहिक स्थिति की जानकारी होने के बाद भी अगर वह लगातार जारी रहता है, तो इसे 'सहमति' माना जाएगा, न कि दुष्कर्म। अदालत ने कहा कि इस मामले में आईपीसी की धारा 376 के तहत अपराध नहीं बनता है।

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अदालत ने रद्द कर दी FIR

मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस विनय सराफ की पीठ ने रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों पर गौर करते हुए मामले को केस चलने योग्य नहीं माना और लेफ्टिनेंट कर्नल के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उसके बाद पेश की गई चार्जशीट को पूरी तरह से निरस्त करने का आदेश दे दिया।

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