Eco Friendly Bakrid Goats Go Viral Maker Compares Them to Holi and Diwali Celebrations बकरीद के लिए किसने तैयार करा दिए 'इको फ्रेंडली बकरे', कहा- होली, दिवाली की तरह..., Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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बकरीद के लिए किसने तैयार करा दिए 'इको फ्रेंडली बकरे', कहा- होली, दिवाली की तरह...

बकरीद पर भोपाल में एक हिंदू संगठन ने इको फ्रेंडली बकरे तैयार किए हैं। उनका कहना है कि अगर होली, दिवाली इको फ्रैंडली मनाई जा सकती है तो बकरीद क्यों नहीं…

Thu, 28 May 2026 08:10 AMGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल
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बकरीद के लिए किसने तैयार करा दिए 'इको फ्रेंडली बकरे', कहा- होली, दिवाली की तरह...

देश के कई हिस्सों में बकरीद मनाई जा रही है। कई राज्यों में सरकार ने बकरीद की छुट्टी 27 मई तो किसी ने गुरुवार यानी 28 मई को तय की है। बकरीद पर यूपी, दिल्ली समेत कई राज्यों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। इस बीच भोपाल के एक हिंदू संगठन ने बकरीद पर पर्यावरण बचाने के लिए अनोखी पहल शुरू की है। यह संगठन इको फ्रेंडली बकरीद के लिए मिट्टी के बकरे बेच रहा है और मुस्लिम युवाओं को कुर्बानी के लिए उपलब्ध करा रहा है। इनकी कीमत प्रति बकरा 1000 रुपए रखी गई है। संगठन का कहना है कि वे इस तरह का प्रयास पिछले 3 साल से कर रहे हैं।

इको फ्रैंडली बकरीद का आह्वान करने वाले इस हिंदू संगठन का नाम हिंदू उत्सव समिति है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी का कहना है कि बकरीद के लिए इस बार हमने इको फ्रैंडली बकरों को तैयार किया है। ये बकरे मिट्टी के हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह होली और दीवाली का त्योहार इको फ्रेंडली हो सकता है तो बकरीद क्यों नहीं... ऐसा करने से न सिर्फ बेजुबान जानवरों की जान बच सकेगी, बल्कि पर्यावरण की भी रक्षा होगी।

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इको फ्रेंडली बकरे क्यों नहीं हो सकती...

इको फ्रेंडली जब होली हो सकती है... पानी मत यूज करो। सूखी होली खेलो। इको फ्रेंडली जब दीवाली हो सकती है... पटाखे मत फोड़ो क्योंकि प्रदूषण रोकना है। इको फ्रेंडली जब दुर्गा अष्टमी हो सकती है। इको फ्रेंडली गणेश उत्सव हो सकता है। जिसमें हम मिट्टी के गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। जब यह सब हो सकता है तो इको फ्रैंडली ईद क्यों नहीं हो सकती...।

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मिट्टी के बकरों से पर्यावरण बचेगा

अगर आप जब इन बकरों की हत्या करेंगे, कुर्बानी करेंगे। हम तो इसे हत्या कहते हैं और वो कुर्बानी। जब हजारों बकरे कटेंगे तो खून भी बहेगा। तो उसे साफ करने के लिए हजारों लीटर पानी भी बहाया जाएगा। गंदगी होगी, उससे प्रदूषण हो सकता है। कई मुस्लिम युवाओं ने भी इसका समर्थन किया है।

बोले- तीन वर्षों से प्रयासरत हैं

हम तीन वर्ष से यह प्रयास कर रहे हैं। अगर इससे कुछ लोग भी इससे समझ जाएं और हजारों लीटर पानी बचता है तो हम समझेंगे कि हमारा प्रयास सफल रहा। उनका कहना था कि हमने 15 मिट्टी के बकरे बनाए थे। हमें अगर और ऑर्डर आते हैं तो हम उन्हें भी पूरा करेंगे।

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