इस समय हिंदू-मुस्लिम की बात उचित नहीं; भोजशाला फैसले पर क्या बोले दिग्विजय सिंह?
भोजशाला मामले में आए हाई कोर्ट के फैसले पर दिग्विजय सिंह ने कहा है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का ही फैसला मान्य होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस समय हिंदू-मुस्लिम की बात करना ठीक नहीं है।

दिग्विजय सिंह ने भोजशाला केस में आए हाई कोर्ट के फैसले पर कहा है कि अब इस मामले का अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को ही करना होगा। उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट को ही तय करना होगा कि धार स्थित भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना की अनुमति है या नहीं। हम भोजशाला मामले में हाई कोर्ट के फैसले का अध्ययन करेंगे। भोजशाला ASI की ओर से संरक्षित स्मारक है। ऐसे स्मारक में पूजा-अर्चना की जा सकती है या नहीं, इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट को ही करना है।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि हम लोग इस फैसले का अध्ययन करेंगे। देश के कानून के आधार पर काम होना चाहिए। ऐसे ही तीन मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। वाराणसी में ज्ञानवापी, संभल में शाही जामा मस्जिद और मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। भोजशाला भी ASI संरक्षित स्मारक है। ऐसे में इसमें पूजा-अर्चना किस प्रकार की जाएगी इस पर अध्ययन की जरूरत है।
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि मैंने हमेशा यह बात कही है कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी देवी सरस्वती की मूर्ति को भारत वापस लाया जाना चाहिए। लेकिन लेकिन मैंने इस बारे में कुछ नहीं कहा है कि भारत वापस आने के बाद इस मूर्ति को कहां स्थापित किया जाना चाहिए। ASI की रिपोर्ट में कहीं भी इस मूर्ति का उल्लेख नहीं है। ऐसे में जब देश में आर्थिक और सामाजिक संकट है, तब हिंदू-मुस्लिम की बात करना उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ही देगा फैसला
दिग्विजय सिंह ने अंत में यह भी कहा कि भोजशाला ASI संरक्षित स्मारक है। ऐसे में इसमें पूजा-अर्चना की जाएगी इस पर भी सुप्रीम कोर्ट को ही फैसला देना है। बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए भोजशाला की धार्मिक प्रकृति वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर के तौर पर तय की। इसके साथ ही अदालत ने एएसआई के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को उस स्थल पर शुक्रवार की नमाज अदा करने की इजाजत थी।
अदालत ने माना- स्थल पर कभी समाप्त नहीं हुई पूजा-अर्चना
अदालत ने साफ किया कि परमार वंश के राजा भोज की विरासत से जुड़े इस स्थल पर हिंदुओं की पूजा-अर्चना कभी समाप्त नहीं हुई है। अदालत ने कहा कि इस बात पर अविश्वास की कोई वजह नहीं है कि विवादित क्षेत्र भोजशाला था, जिसमें मां सरस्वती का मंदिर था। अदालत ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद बनाने के लिए जिले में अलग भूमि के लिए मध्य प्रदेश सरकार से संपर्क कर सकता है। केंद्र सरकार उन आवेदनों पर विचार कर सकती है जिनमें लंदन संग्रहालय से देवी सरस्वती की 'प्रतिमा' को वापस लाने और उसे परिसर के भीतर स्थापित करने की मांग की गई है।




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