यह सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का क्षण; भोजशाला के फैसले पर बोले MP के CM
सीएम यादव ने कहा, ‘हमारी संस्कृति सदैव ‘सर्वधर्म समभाव’, सामाजिक समरसता और भाईचारे की वाहक रही है। हम न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हैं और प्रदेश में सौहार्द, सांस्कृतिक गौरव एवं सामाजिक सद्भाव को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर को लेकर शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उसे वाग्देवी सरस्वती का मंदिर माना, साथ ही वहां होने वाली नमाज की अनुमति को रद्द कर दिया। इस फैसले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी प्रतिक्रिया दी और इसे देश की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि माननीय न्यायालय का यह निर्णय स्वागतयोग्य है। राज्य सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।
इस बारे में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश के मुखिया ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'माननीय उच्च न्यायालय द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक एवं मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानते हुए दिया गया निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है। ASI (भारतीय पुरातत्व विभाग) के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और द्यादा मजबूत होगी तथा श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा।'
इसके आगे उन्होंने अदालत द्वारा केंद्र सरकार को दिए गए उस निर्देश की भी तारीफ की, जिसमें सरकार को लंदन म्यूजियम में रखी वाग्देवी की प्रतिमा को लाने के लिए कोशिशें करने को कहा गया है। सीएम ने लिखा, 'मां वाग्देवी की प्रतिमा को UK (इंग्लैंड) से भारत वापस लाने के संबंध में केंद्र सरकार को विचार करने का निर्देश स्वागतयोग्य है। इस दिशा में राज्य सरकार भी आवश्यक प्रयास करेगी।'
आगे उन्होंने कहा, 'हमारी संस्कृति सदैव ‘सर्वधर्म समभाव’, सामाजिक समरसता और भाईचारे की वाहक रही है। हम न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हैं और प्रदेश में सौहार्द, सांस्कृतिक गौरव एवं सामाजिक सद्भाव को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। माननीय न्यायालय का यह निर्णय स्वागतयोग्य है। राज्य सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।'
इस मामले में शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सामाजिक संगठन 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' और कुलदीप तिवारी व अन्य लोगों की दायर दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं मंजूर करते कहा,'भोजशाला परिसर और कमाल मौला मस्जिद के विवादित क्षेत्र का धार्मिक स्वरूप वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर वाली भोजशाला के रूप में तय किया जाता है।'
इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने विवादित परिसर में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिए जाने की याचिका स्वीकार की और इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार स्मारक में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।
हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर पुरातात्विक साक्ष्यों व ऐतिहासिक तथ्यों, ASI की अधिसूचनाओं व उसके वैज्ञानिक सर्वेक्षण और कानूनी प्रावधानों की रोशनी में फैसला सुनाया।
उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के मुकदमे में शीर्ष अदालत के फैसले में निर्धारित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया।




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