भोजशाला छावनी में तब्दील; 1,200 पुलिसकर्मी तैनात, किन्हें कड़ी चेतावनी?
भोजशाला परिसर की सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। धार शहर और परिसर के आसपास करीब 1,200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। यही नहीं प्रशासन की ओर से एक कड़ी चेतावनी भी जारी की गई है।

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। विवादित स्थल की घेराबंदी कर दी गई है। धार में लगभग 1,200 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। यह विवाद हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों के बीच था, जो इस 11वीं सदी के स्मारक पर अपना-अपना दावा पेश कर रहे थे। एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इसे हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार दिया है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने और सोशल मीडिया पर अफवाह नहीं फैलाने की सख्त चेतावनी दी है।
हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार दिया
वकील विष्णु शंकर जैन ने फैसले के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इंदौर हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जिसमें ASI के 7 अप्रैल, 2003 के आदेश को रद्द कर दिया गया है। अदालत ने हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार दिया है और भोजशाला परिसर को राजा भोज का माना है।
मुस्लिम पक्ष को दूसरी जमीन देने पर सरकार करे विचार
वकील विष्णु शंकर जैन ने आगे बताया कि अदालत ने लंदन के एक म्यूजियम में रखी सरस्वती की मूर्ति को वापस लाने की मांग पर सरकार से विचार करने को भी कहा है। अदालत ने सरकार से मुस्लिम पक्ष को कोई दूसरी जमीन देने पर विचार करने के लिए भी कहा है। कोर्ट ने परिसर में अब से विधिवत पूजा-पाठ करने का अधिकार दिया है। यही नहीं सरकार को इस जगह के इंतजाम की देखरेख करने का निर्देश दिया है।
क्या था ASI का आदेश?
बता दें कि ASI की ओर से 7 अप्रैल, 2003 को दिए आदेश में परिसर में नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया था। वकील विष्णु शंकर जैन ने आगे बताया कि अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने इस आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। इस आदेश से साफ है कि अब से भोजशाला परिसर में केवल पूजा ही होगी।
भोजशाला परिसर की सुरक्षा कड़ी, 1,200 पुलिसकर्मी तैनात
इस बीच भोजशाला परिसर में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। पूरे धार शहर के साथ ही भोजशाला परिसर के आसपास करीब 1,200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। धार के जिलाधिकारी राजीव रंजन मीणा ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
पूरे परिसर की घेराबंदी, इलाका छावनी में तब्दील
प्रशासन ने भोजशाला स्थल पर अवरोधक लगाकर घेराबंदी कर दी है। पूरा इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया है। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता रहा है जिस पर हाई कोर्ट ने भी मुहर लगा दी है। मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता था। वहीं, जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता का दावा था कि यह परिसर मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।
अब से परिसर में केवल पूजा
एएसआई की 2003 की व्यवस्था के तहत हिंदू और मुस्लिम समुदाय क्रमशः मंगलवार और शुक्रवार को यहां पूजा-अर्चना और नमाज अदा करते रहे हैं। हिंदू पक्ष ने इस व्यवस्था को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हिंदू पक्ष ने परिसर में पूजा के अधिकार की मांग की थी। इसे कोर्ट ने मान लिया है। अब से परिसर में केवल पूजा ही होगी।
HC ने दिया था परिसर के वैज्ञानिक सर्वे का आदेश
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था। एएसआई ने 22 मार्च 2024 से सर्वेक्षण शुरू किया और 98 दिन तक चले विस्तृत सर्वेक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की थी। इंदौर खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अफवाहें फैलाने वालों पर होगा सख्त ऐक्शन
मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक परिसर में नमाज अदा करते थे। अब प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अफवाहें नहीं फैलाने की चेतावनी दी है। धार के जिलाधिकारी राजीव रंजन मीणा ने कहा कि किसी भी भ्रामक सूचना या अफवाह पर ध्यान न दें। जिला प्रशासन ऐसी सूचनाओं पर नजर रखे हुए है। आपत्तिजनक सामग्री फैलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बीच मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।




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