केजरीवाल व सिसोदिया समेत 4 नेताओं के खिलाफ लें ऐक्शन; फांसी घर विवाद मामले में समिति की सिफारिश
रिपोर्ट में कहा गया कि विधानसभा के पूर्व सदस्य होने के नाते AAP नेता 'फांसी घर' खोले जाने से जुड़ी घटनाओं से अच्छी तरह वाकिफ थे, और पैनल के सामने पेश होना और स्ट्रक्चर से जुड़े दावे की सच्चाई का पता लगाने में पैनल की मदद करना उनका फर्ज था।

दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने विधानसभा परिसर में स्थित 'फांसी घर' की प्रामाणिकता से जुड़े एक मामले में अपने सामने पेश न होने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित चार AAP (आम आदमी पार्टी) नेताओं के खिलाफ सदन से उचित कार्रवाई करने की सिफारिश कर दी है। रिपोर्ट में समिति ने कहा कि केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व स्पीकर राम निवास गोयल और पूर्व डिप्टी स्पीकर राखी बिड़ला ने जानबूझकर और सोच-समझकर इस मामले में उसकी कार्यवाही से दूर रहने का फैसला किया।
रिपोर्ट में कहा गया- यह उनका फर्ज था
रिपोर्ट में कहा गया है कि AAP नेता 13 नवंबर और 20 नवंबर, 2025 को समिति के सामने पेश नहीं हुए। साथ ही इसमें कहा गया कि विधानसभा के पूर्व सदस्य होने के नाते AAP नेता 'फांसी घर' खोले जाने से जुड़ी घटनाओं से अच्छी तरह वाकिफ थे, और पैनल के सामने पेश होना और स्ट्रक्चर से जुड़े दावे की सच्चाई का पता लगाने में पैनल की मदद करना उनका फर्ज था।
पेश ना होना सदन व कमेटी की अवमानना
इसमें आगे कहा गया कि चार AAP नेताओं का कमेटी के सामने पेश न होना सदन और उसकी कमेटी की अवमानना थी। इसी आधार पर रिपोर्ट में कहा गया कि कमेटी सिफारिश करती है कि सदन अरविंद केजरीवाल, राम निवास गोयल, मनीष सिसोदिया और राखी बिड़ला के खिलाफ उचित कार्रवाई करे, क्योंकि वे 13 नवंबर और 20 नवंबर, 2025 को प्रिविलेज कमेटी की तय बैठकों में बिना किसी सही वजह या पैनल की इजाज़त के जानबूझकर गैर-हाजिर रहे।
साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हालांकि, कमेटी 'फांसी घर' की सच्चाई से जुड़े मुख्य मुद्दे की जांच जारी रखेगी और अगले सेशन में रिपोर्ट पेश करेगी।
AAP बोली- प्रदूषण पर चर्चा से भाग रही भाजपा
उधर इस रिपोर्ट को लेकर AAP ने भाजपा पर कवर फायर लेने का आरोप लगाया। उसने कहा कि भाजपा जानती है कि प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर बहस पूरे देश और दुनिया के सामने उसकी नाकामियों को उजागर कर देगी। इसीलिए वह 'फांसी घर' मुद्दे पर बात करने को उत्सुक है, लेकिन प्रदूषण पर चर्चा की इजाजत देने से इनकार कर रही है।
रिनोवेशन वाले हिस्से से जुड़ा है विवाद
'फांसी घर' विवाद दिल्ली विधानसभा के एक पुनर्निमित हिस्से से संबंधित है, जिसे AAP सरकार ने ब्रिटिश-युग का फांसी घर घोषित किया था, लेकिन भाजपा उसके एक टिफिन रूम होने का दावा करती है, साथ ही इस मामले में उसने पिछली केजरीवाल सरकार पर सदन और लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
AAP ने जिसे बताया फांसीघर, भाजपा बोली- वह टिफिन रूम
साल 2022 में इस ढांचे का रिनोवेशन होने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सिसोदिया, राखी बिड़ला और गोयल की मौजूदगी में इसका उद्घाटन किया था। वहीं पिछले साल अगस्त में विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान, भाजपा ने अपने दावे को दोहराया और कहा कि लोगों को जबरन यह विश्वास दिलाया गया कि फांसी घर एक ऐतिहासिक स्मारक है, जबकि असल में यह ब्रिटिश-युग की इमारत में एक टिफिन रूम था।
इसके बाद यह मामला विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया गया था, जिसने 9 सितंबर, 2025 को चार AAP नेताओं को पत्र जारी कर उनसे फांसी घर के अस्तित्व की प्रामाणिकता पर अपना लिखित जवाब भेजने का अनुरोध किया था। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि चार AAP नेताओं ने अपने जवाब में यह दावा करते हुए समिति के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी, कि विशेषाधिकार का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। बाद में पूर्व सीएम केजरीवाल और सिसोदिया ने समिति के पत्र, नोटिस और समन को रद्द करने की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की।




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