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MP में दो बार निलंबित शिक्षक के सम्मान पर बवाल, विभाग बोला- हमने तो किसी का नाम ही नहीं दिया था

कलेक्टर को दिए अपने आवेदन में शिकायतकर्ता ने न केवल सम्मान निरस्त करने की बल्कि ऐसे शिक्षक का नाम अनुशंसित करने वाले अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Wed, 28 Jan 2026 04:10 PMSourabh Jain वार्ता, बैतूल, मध्य प्रदेश
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MP में दो बार निलंबित शिक्षक के सम्मान पर बवाल, विभाग बोला- हमने तो किसी का नाम ही नहीं दिया था

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में गणतंत्र दिवस पर हुए जिला स्तरीय समारोह में उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए एक शिक्षक को सम्मानित किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ता रामेश्वर लक्षणे ने संकुल केंद्र कन्या गंज की प्राथमिक शाला मरामझिरी में पदस्थ शिक्षक सुभाष सिंह ठाकुर को प्रशंसा पत्र दिए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। लक्षणे द्वारा मंगलवार को कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि नियमों की अनदेखी कर ठाकुर का सम्मान किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ठाकुर को दो बार निलंबित किया जा चुका है, साथ ही उनका एक इंक्रीमेंट भी रूक चुका है। उधर सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग का कहना है कि उसने तो किसी शिक्षक के नाम प्रस्ताव ही नहीं दिया था।

दो बार निलंबित हुआ, एक बार वेतन वृद्धि रूकी

शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस सुभाष सिंह ठाकुर का सम्मान किया गया, उसके खिलाफ पूर्व में गंभीर शिकायतें और दंडात्मक कार्रवाइयां हो चुकी हैं। आवेदन में बताया गया है कि जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण पालकों की शिकायतों के आधार पर शिक्षक को दो बार निलंबित किया गया था। इसके अलावा मध्याह्न भोजन व्यवस्था से जुड़ी शिकायत की जांच में भी ठाकुर दोषी पाए जा चुके हैं, जिसके बाद तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी ने ठाकुर का एक स्थायी इंक्रीमेंट भी रोक दिया था।

विभाग बोला- हमने तो किसी का नाम नहीं दिया

इतना सब होने के बाद भी सुभाष सिंह को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। उधर इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि गणतंत्र दिवस सम्मान के लिए उनकी ओर से किसी भी शिक्षक का नाम प्रस्तावित नहीं किया गया था। मंच से नाम घोषित होने पर विभाग के अधिकारी भी चौंक गए थे।

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विभाग कर रहा जांच- सम्मान के लिए नाम कैसे पहुंचा

शिक्षा विभाग ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि शिक्षक का नाम सम्मान सूची में किस स्तर से और किस आधार पर जोड़ा गया। जिला शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र वरकड़े ने बताया कि विभाग की तरफ से किसी भी शिक्षक का नाम 26 जनवरी पर सम्मान के लिए प्रस्तावित नहीं किया गया है। उन्हें कैसे सम्मानित कर दिया गया, इसकी जानकारी हमें भी नहीं है। मामले की जांच कराई जा रही है।

कलेक्टर को दिए अपने आवेदन में शिकायतकर्ता ने न केवल सम्मान निरस्त करने की बल्कि ऐसे शिक्षक का नाम अनुशंसित करने वाले अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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