खूबानी-अखरोट के बागानों के लिए फेमस है उत्तराखंड का लोहाघाट, 3 दिन का ट्रिप यूं करें प्लान
उत्तराखंड के किसी शांत हिल स्टेशन पर जाना चाहते हैं तो लोहाघाट जाएं। ये हिल स्टेशन खूबानी-अखरोट के बागानों के लिए फेमस है। यहां पर आप तीन दिन का ट्रिप प्लान कर सकते हैं, जानिए इस जगह का ट्रिप कैसे प्लान करें।

उत्तराखंड के भीड़भाड़ वाले टूरिस्ट प्लेसिस से दूर एक शांत और सुकून भरी जगह की तलाश में हैं तो लोहाघाट जाएं। ये घूमने-फिरने के लिए ये एक बेहतरीन ऑप्शन है। खासतौर से उन लोगों के लिए जो शांतिपूर्ण जगहों की तलाश कर रहे हैं। अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो ड्राइव करके इस जगह पर पहुंचने पर लगभग 10-12 घंटे लग सकते हैं। जानिए यहां लोहाघाट में घूमने की जगह और 3 दिन का ट्रिप कैसे प्लान करें।
लोहाघाट में घूमने की जगह
1) एबॉट माउंट- लोहाघाट से 8 किलोमीटर दूर ये एक शानदार, एकांत पहाड़ी पर कोलोनियल काल की 13 झोपड़ियां और एक कथित तौर पर भूतिया चर्च भी है। त्रिशूल और नंदा देवी चोटियों के नजारे देखने के लिए ये बेस्ट है।
2) मायावती आश्रम- स्वामी विवेकानंद के शिष्यों द्वारा स्थापित ये आश्रम पुराने चाय बागानों से घिरा है। इसके शांत होने की वजह से ये जगह ध्यान लगाने के लिए बेस्ट है।
3) बाणासुर का किला- बाणासुर नामक राक्षस के नाम पर बना एक किला है। यहां तक पहुंचने के लिए 2 किमी की छोटी सी चढ़ाई करनी पड़ती है, जहां से चारों ओर का सुंदर नजारा दिखाई देता है।
4) देवीधुरा मंदिर- रक्षा बंधन के दौरान बगवाल यानी पत्थर फेंकने वाले उत्सव के लिए फेमस है।
5) कोली ढेक झील- टहलने या पिकनिक मनाने के लिए ये एक शांत जगह है।
तीन दिन का ट्रिप कैसे प्लान करें
पहला दिन
-लोहाघाट पहुंचें और अपने होटल में चेक-इन करें।
-शाम को लोकल बाजार में टहलें और शिव मंदिर के दर्शन करें।
-कोली ढेक झील पर सूर्यास्त का नजारा देखें। ये टहलने या छोटी-मोटी पिकनिक के लिए एक शांत जगह।
दूसरा दिन
-सुबह एबट माउंट पहुंचे और पुराने चर्च को देखें और पहाड़ों की सुंदर तस्वीरें क्लिक करें।
-दोपहर में मायावती आश्रम में कुछ देर शांति से चिंतन करें और जंगलों की सैर करें।
तीसरा दिन
-सुबह-सुबह बानासुर का किला के लिए ट्रेकिंग करें।
-वापसी के रास्ते में चंपावत पर रुकें और बालेश्वर मंदिर में की नक्काशी देखें।
-अपनी वापसी यात्रा शुरू करें।
टिप
अगर आप इस जगह पर जा रहे हैं तो यहां की फेमस बाल मिठाई जरूर खाएं।इसके अलावा सिंगोरी का स्वादभी जरूर चखें। ध्यान रखें कि गर्मियों में भी कुमाऊं की पहाड़ियों में शामें ठंडी हो सकती हैं। इसलिए एक हल्की जैकेट साथ रखना जरूरी है।
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