Induction Vs Cylinder: इंडक्शन पर खाना बनाना सस्ता या महंगा? जानें क्या सिलेंडर की कीमत से ज्यादा आएगा बिजली का बिल
LPG Cylinder Vs Induction Cooking Comparison: सिलेंडर जल्दी खत्म ना हो जाए इसलिए इंडक्शन खरीद रहे। तो समझें क्या सिलेंडर के प्राइज से ज्यादा कीमत इंडक्शन में खाना बनाने पर खर्च करने होंगे। बिजली के यूनिट से समझे पूरा गणित।

शहर से लेकर कस्बे और गांवों में सिलेंडर की किल्लत बनी हुई है। लोगों के घरों में गैस खत्म हो रही और बुकिंग ना होने या बुकिंग के बाद सिलेंडर ना मिलने की समस्या से लोग जूझ रहे। ऐसे में लोग खाना पकाने के लिए इंडक्शन कुकटॉप को खरीद रहे। लेकिन काफी सारे लोगों के मन में सवाल है कि क्या इंडक्शन पर खाना बनाना गैस चूल्हे पर खाना बनाने से सस्ता है या महंगा। अब अगर आपके मन में भी ये सवाल चल रहा तो चलिए इसके गणित को समझते हैं।
एक एलपीजी सिलेंडर में लगभग 14.2 किलो गैस होती है। जो लगभग 900 से 1000 रुपये तक अलग-अलग शहरों और गांवों में पड़ जाती है। अब अगर गैस चूल्हे पर 4 से 5 लोगों का खाना बनता है तो एक गैस सिलेंडर एक महीने के करीब चलता है। वहीं अगर सदस्य ज्यादा हो तो ये टाइम और कम हो जाता है। मतलब सिलेंडर जल्दी खत्म हो जाएगा। यहीं नहीं खाना पकाने का प्रोसेस भी फर्क डालता है। जैसे हैवी मील बनाना है या खाना दिनभर में कई बार बनता है तो इससे भी गैस जल्दी खत्म होती है। एक ऐवरेज घर में सुबह, दोपहर और रात के खाने को बनाने में कुल मिलाकर लगभग 4-5 घंटे लगते हैं।
बात करें इंडक्शन और गैस चूल्हे की काम करने की क्षमता पर तो ये एक दूसरे से काफी अलग होती है। गैस पर खाना बनाते वक्त बर्तन पर हीट पूरे जलने वाली गैस का केवल 40-50 प्रतिशत ही पहुंच पाती है। वहीं इंडक्शन पर ये क्षमता बढ़ जाती है। इंडक्शन पर जब कोई बर्तन रखा जाता तो हीट डायरेक्ट लगभग 80-90 प्रतिशत बढ़ जाती है। इसलिए जब हम गैस पर खाना बनाते हैं तो इंडक्शन के मुकाबले ज्यादा समय लगता है और खर्च बढ़ जाता है।
इंडक्शन चूल्हे पर खाना बनाने का औसत कैसे निकालें
मान लीजिए आपने 1 हजार वॉट का इंडक्शन खरीदकर रखा है। अब आप उस पर दिनभर में 4 घंटे खाना बनाते हैं तो इसका मतलब है कि आपने 4000 वॉट बिजली खर्च की और एक यूनिट पर 1000 वॉट होता है तो कुल आपने 4 यूनिट बिजली खर्च की। तो महीनेभर में बिजली का खर्च पूरे 120 यूनिट होगा। अब बिजली की यूनिट 7 से लेकर 8 रुपये यूनिट होती है। तो इसका मतलब है कि 8 रुपये के हिसाब से जोड़ा जाए तो 960 रुपये बिजली का बिल होगा। जो एक गैस सिलेंडर की कीमत के करीब ही होगा। हालांकि यहां एक चीज और ध्यान देने वाली है कि क्योंकि इंडक्शन ज्यादा तेजी के बर्तन को गर्म करता है तो उस पर खाना पकाने में कम समय खर्च होता है। दूध, चाय उबालने, चावल पकाने में गैस के मुकाबले कम समय लगता है। इस वजह से उन चार घंटों की कुकिंग में समय कम होगा और बिजली यूनिट का खर्च भी कम होगा।
तो क्या इंडक्शन गैस के मुकाबले सस्ता होगा?
ये कहना जल्दीबाजी होगी क्योंकि सालों से हमारे कुकिंग का प्रोसेस पूरी तरह से गैस पर डिपेंड है। ज्यादा मात्रा में और ज्यादा परिवार के लिए खाना बनाना, छौंक, तड़का,दाल, सब्जी, रोटी, पूड़ी,पराठा जैसे ढेरों आइटम बनाना इंडक्शन पर कई बार मुश्किल हो जाता है। वहीं इंडक्शन पर आप हर तरह के छोटे-बड़े बर्तनों को नहीं चढ़ा सकते। वहीं लोगों को गैस पर खाना बनाना आसान लगता है।
बिजली पर निर्भरता
इंडक्शन चूल्हा बिजली पर डिपेंड करता है। छोटे शहरों, कस्बों, गांवों में जिन जगहों पर लाइट की कटौती ज्यादा है। वोल्टेज में फ्लक्चुएशन होता रहता है और ठीक तरह से बिजली नहीं आती। किसी भी वक्त बिजली चली जाती है। ऐसी जगहों पर इंडक्शन चूल्हे पर खाना बनाना मुश्किल हो सकता है। सबसे खास बात कि इसे इनवर्टर से नहीं चला सकते। तो इंडक्शन पर पूरी तरह से कुकिंग की निर्भरता संभव नही है।
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