History Of Papad: 2500 साल पुराना है भारतीय पापड़ का इतिहास, जानें कैसे बना होली का हिस्सा और क्या था पहला नाम?
होली के खास मौके पर पापड़-चिप्स जरूर बनाए जाते हैं और खाने के साथ भी पापड़ खाना लोग पसंद करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं पापड़ कहां से आया और सबसे पहले कहां बना। चलिए इसका पूरा इतिहास हम आपको बताते हैं।

आलू, चावल, साबूदाना, चना दाल, उड़द दाल और भी कई तरीकों से पापड़ बनाया जाता है। होली आने से पहले ही लोगों की घरों की छत पर पापड़ सूखते हुए दिखने लगते हैं। होली में पापड़-चिप्स बनाना और खिलाना पुराना रिवाज है। साथ ही शादी-फंक्शन में खाने के साथ पापड़ रखना भी थाली का अहम हिस्सा बन चुका है। गुजरात में तो लोग बिना पापड़ के खाना ही नहीं खाते हैं। इस बात से समझ आता है कि पापड़ को पसंद करने वालों की संख्या भारत में ज्यादा है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है पापड़ भारत में कब और कैसे आया? इसे सबसे पहले किसने और कहां बनाया था? पापड़ को पहले क्या बोला जाता था और कौन सा पापड़ सबसे पहले बना? अगर आपके मन में भी ये सभी सवाल उठते हैं, तो हम आज आपको पापड़ के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।
ए हिस्टोरिकल डिक्शनरी ऑफ इंडियन फूड की जानकारी
खाद्य इतिहासकार और लेखक केटी आचार्य की एक किताब ए हिस्टोरिकल डिक्शनरी ऑफ इंडियन फूड से मिली जानकारी के अनुसार, भारत में पापड़ का इतिहास 500 ईसा पूर्व यानी 2500 साल पुराना है। उनकी इस किताब में उड़द, मसूर और चने की दाल से बने पापड़ का जिक्र किया गया है। अब लोग आलू और साबूदाना का पापड़ भी बनाने लगे हैं।
पाकिस्तान से आया भारत
पापड़ का पहला उल्लेख जैन साहित्य में मिलता है। मारवाड़ के जैन समुदाय के लोग खाने के साथ पापड़ खाते थे और उनके समुदाय से ही पापड़ फेमस हुआ। ये लोग लंबी यात्रा के दौरान भी पापड़ साथ लेकर जाते थे। अगर बात करें पापड़ के भारत आने की तो यह पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से हमारे देश में आया था। पापड़ बनाने के लिए सिंध (पाकिस्तान) को काफी सही माना जाता था। यहां की हवा और तापमान पापड़ बनाने के लिए बिल्कुल सही था। साल 1947 में जब भारत-पाक का बंटवारा हुआ, तो ज्यादातर सिंधी हिंदू भारत आ गए और अपने साथ पापड़ भी ले आए।
पापड़ का बिजनेस
जब सिंधी हिंदू भारत आए तो उनके पास रोजगार नहीं था। उन्होंने पापड़ बनाकर बेचने का काम करना शुरू किया। ऐसे भारत में पापड़ फैल गया और फिर लोग इसे बनाने लगे और पसंद लगे।
पापड़ के कई नाम
आज हम इसे पापड़ के नाम से जानते हैं लेकिन पहले इसका नाम पर्पट था और लोग इसे इसी नाम से जानते थे। पर्पट संस्कृत का शब्द है। फिर इसे पापड़ी कहा गया और फिर इसका नाम पापड़ हो गया। अब सभी लोग इसे पापड़ के नाम से जानते हैं। लेकिन अलग-अलग राज्यों में इसे आज भी अलग नाम से पुकारा जाता है, जैसे तमिलनाडु में जहां इसे अप्पलम कहते हैं, तो वहीं कर्नाटक में इसे हप्पला नाम से जाना जाता है। इसके अलावा इसे केरल में पापड़म, उड़ीसा में पम्पाड़ा और उत्तर भारत में पापड़ के नाम से जाना जाता है।
होली का कैसे बना हिस्सा
भारत में पापड़ होली का भी खास हिस्सा बन चुका है और इसके पीछे वजह है नया आलू। होली पर आमतौर पर लोग आलू का पापड़ और चिप्स बनाते-खाते हैं। होली वाले सीजन में नए आलू आते हैं और ऐसे में इसके पापड़-चिप्स टेस्टी बनते हैं। आलू का नया स्वाद पापड़-चिप्स में अच्छा लगता है। यही वजह है कि इसे होली में लोग बनाने लगे और स्नैक्स के तौर पर खाने लगे।
बनाने का तरीका भी आसान
अब तो कई तरह के पापड़ बनने लगे हैं लेकिन अगर आप आलू का पापड़ बना रहे हैं, तो आलू को उबालकर उसमें मसाला, नमक मिलाकर गोल आकार में धूप में डालकर कई दिनों तक सुखाया जाता है। ऐसे ही आटे, चावल, रागी, साबूदाना का पापड़ भी अलग ढंग से बनता है। पापड़ को लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है।
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