ईरान युद्ध से बिगड़ेगा आपके घर का बजट , बिस्किट-साबुन से लेकर दूध-दही तक के बढ़ेंगे दाम
मध्य-पूर्व के देशों में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति यदि कुछ दिन और बनी रही, तो बिस्किट, साबुन और तेल समेत रोजमर्रा की जरूरतों (एफएमसीजी) वाली वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी तय है।

मध्य-पूर्व के देशों में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति यदि कुछ दिन और बनी रही, तो बिस्किट, साबुन और तेल समेत रोजमर्रा की जरूरतों (एफएमसीजी) वाली वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी तय है। अब आप सोच रहे होंगे कि महंगा तो क्रूड ऑयल और गैस हो रही है, तो फिर बिस्किट, साबुन, तेल, शैंपु जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतें क्यों बढ़ेंगी? दरअसल सब कुछ एक दूसरे से जुड़ा है, आगे के हिस्से में जानिए आखिर कैसे?
क्रू़ड ऑयल में उछाल से महंगी हुई पॉलिमर
एफएमसीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के अनुसार, निर्माण कंपनियों के पास कच्चे माल (रॉ मटेरियल) का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। यदि आने वाले कुछ दिनों में स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ना निश्चित है। दरअसल, इन उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने से पॉलीमर की कीमतों में भारी उछाल आया है।
पॉलीमर के दाम बढ़ने से दूध, दही, बिस्किट भी होंगे महंगे
पॉलीमर, जिससे प्लास्टिक उत्पादों का निर्माण होता है, उसकी कीमत युद्ध से पहले 110 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 160-170 रुपये तक पहुंच गई है। पॉलीमर महंगा होने का सीधा असर दूध और दही की पैकेजिंग पर भी पड़ रहा है, क्योंकि इनकी पैकिंग में पॉली फिल्म और फ्लेवर्ड मिल्क में श्रिंक रैप का उपयोग होता है।
मेधा डेयरी के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल उनके पास एक महीने का स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन वेंडर्स ने संकेत दिए हैं कि नया कंसाइनमेंट बढ़ी हुई दरों पर आएगा। लागत बढ़ने की स्थिति में उत्पादों की कीमतों में इजाफा करना उनकी मजबूरी होगी।
प्लास्टिक सामान की कीमतें बढ़ना शुरू
पॉलीमर की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के कारण पानी की टंकी, बाल्टी, मग और जग जैसे घरेलू उत्पादों के दाम बढ़ने शुरू हो गए हैं। हिमगिरी के प्रोपराइटर दीपक मारू ने बताया कि लागत बढ़ने के कारण पानी की टंकी की कीमतों में सवा रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी करनी पड़ी है।
वहीं, झारखंड प्लास्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के रवि टिबरेवाल ने प्लास्टिक उद्योग की खराब स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि रॉ मटेरियल की भारी किल्लत है। एमओयू के बावजूद कंपनियों को केवल 30 प्रतिशत कच्चा माल ही मिल पा रहा है। इधर, उद्यमियों का कहना है कि उनके पास केवल 10-15 दिनों का स्टॉक शेष है, जिसके बाद कीमतें और बढ़ सकती हैं।
पैकेजिंग लागत बढ़ने से महंगा होगा सामान
एफएमसीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय अखौरी के मुताबिक, साबुन, तेल, टूथपेस्ट और शैंपू जैसे उत्पादों की पैकेजिंग लागत बढ़ गई है। कंपनियों के पास 25 मार्च तक का ही स्टॉक बचा है, जिसके बाद कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। दूसरी ओर, प्लास्टिक कैरी बैग की कीमतों में भी 50 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा हुआ है।
पीपी प्लास्टिक जो पहले 160 रुपये प्रति किलो था, अब 220 रुपये तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय हालातों और आपूर्ति शृंखला बाधित होने के कारण छोटे उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा है, जिसका अंतिम बोझ उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ना तय माना जा रहा है।




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